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समझिएगृह मंत्रालय

21 अक्टूबर को ही क्यों याद किए जाते हैं शहीद पुलिसकर्मी: 1959 के हॉट स्प्रिंग्स हमले की कहानी

बुधवार को अमित शाह ने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर देश की ओर से श्रद्धांजलि दी। यह तारीख 67 साल पहले लद्दाख के उत्तर-पूर्वी छोर पर एक गश्ती दल से जुड़ी है, जब चीनी सैनिकों की गोलीबारी में दस पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित

संक्षेप में

21 अक्टूबर 1959 को उत्तर-पूर्वी लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स के पास लापता साथियों को खोज रहे लगभग 20 भारतीय पुलिसकर्मियों के दल पर चीनी सैनिकों ने गोलीबारी की। दस पुलिसकर्मी शहीद हुए और सात घायल हुए, और चीन ने शव 13 नवंबर को ही लौटाए। जनवरी 1960 में राज्यों के पुलिस प्रमुखों के वार्षिक सम्मेलन में तय हुआ कि 21 अक्टूबर देश की हर पुलिस लाइन में स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाएगा। 2018 से मुख्य समारोह नई दिल्ली के राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर होता है, जहां आज़ादी के बाद से ड्यूटी पर जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों के नाम दर्ज हैं।

हॉट स्प्रिंग्स में क्या हुआ था?

लद्दाख में पुलिस के एक गश्ती दल पर चीनी सैनिकों ने घात लगाकर हमला किया, और दल के दस जवान शहीद हो गए।

1959 की शरद ऋतु तक लद्दाख में तिब्बत से लगी भारत की सीमा की निगरानी सेना नहीं, पुलिस करती थी। उस साल अक्टूबर में लगभग 20 पुलिसकर्मियों का एक दल गश्त पर लापता हुए अपने साथियों को खोजने लद्दाख के उत्तर-पूर्वी कोने में हॉट स्प्रिंग्स से निकला। इसका नेतृत्व डिप्टी सेंट्रल इंटेलिजेंस ऑफिसर रैंक के अधिकारी करम सिंह कर रहे थे। कुछ जवान घोड़ों पर थे, बाकी पैदल पीछे चल रहे थे।

21 अक्टूबर को एक पहाड़ी पर मोर्चा जमाए चीनी सैनिकों ने दल पर गोलियां चलाईं। दस पुलिसकर्मी शहीद हुए और सात घायल हुए। करीब तीन हफ्ते बाद, 13 नवंबर 1959 को, चीन ने शव लौटाए। हॉट स्प्रिंग्स में ही पूरे पुलिस सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

यही तारीख राष्ट्रीय दिवस क्यों बनी?

क्योंकि पुलिस नेतृत्व ने इसे ड्यूटी पर जान देने वाले हर साथी को याद करने का दिन चुना।

जनवरी 1960 में अपने वार्षिक सम्मेलन में राज्यों के पुलिस महानिरीक्षकों ने तय किया कि अब से 21 अक्टूबर देश की सभी पुलिस लाइनों में स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाएगा। तब से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से लेकर छोटी जिला इकाइयों तक, सभी इस दिन परेड करते हैं, पुष्पचक्र चढ़ाते हैं और पिछले एक साल में शहीद हुए साथियों को याद करते हैं।

राष्ट्रीय पुलिस स्मारक क्या है?

नई दिल्ली के चाणक्यपुरी में बना राष्ट्रीय स्मारक, जो आज़ादी के बाद से ड्यूटी पर शहीद हुए पुलिसकर्मियों को समर्पित है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 अक्टूबर 2018 को इसे राष्ट्र को समर्पित किया था। इसके केंद्र में 30 फुट ऊंचा ग्रेनाइट का स्मृति स्तंभ है। इसके पास ‘वीरता की दीवार’ पर शहीदों के नाम खुदे हैं, और एक संग्रहालय भारत में पुलिस व्यवस्था का इतिहास दिखाता है। सोमवार को छोड़कर यह रोज़ आम लोगों के लिए खुला रहता है। इसके बनने के बाद से राष्ट्रीय समारोह अलग-अलग पुलिस मुख्यालयों के बजाय यहीं होता है।

इस साल क्या हुआ?

गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को मुख्य समारोह की अध्यक्षता की।

गृह मंत्रालय के घोषित कार्यक्रम में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और दिल्ली पुलिस की संयुक्त परेड, वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस पृष्ठभूमि वाले सांसदों और सेवानिवृत्त महानिदेशकों की ओर से पुष्पांजलि, और अंत में हॉट स्प्रिंग्स के शहीदों की वेदी पर शाह की पुष्पांजलि शामिल थी। उन्हें उत्तरी राज्यों और केंद्रीय बलों के लगभग 90 सवारों की मोटरसाइकिल रैली को भी हरी झंडी दिखानी थी, जो “नशे के खिलाफ लड़ाई” थीम के साथ 31 अक्टूबर की एकता परेड के लिए गुजरात के एकता नगर जा रही है।

यह आयोजन 30 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान शहीदों के परिवार स्मारक आएंगे, बैंड प्रदर्शन होंगे, ‘शहीदों के लिए दौड़’, रक्तदान शिविर और बच्चों के लिए निबंध व चित्रकला प्रतियोगिताएं होंगी। राज्यों की पुलिस भी इन्हीं दिनों अपने कार्यक्रम करेगी।

आज भी इसका महत्व क्यों है?

क्योंकि यह दिन किसी एक हमले से बड़ा है। तारीख हॉट स्प्रिंग्स से आई है, लेकिन बल इस दिन पिछले साल खोए हर साथी को याद करते हैं, और स्मारक की ‘वीरता की दीवार’ पर नाम जुड़ते जाते हैं। 1959 के वे दस जवान पुलिसकर्मी थे जो एक दूरदराज़ सीमा पर सैनिक का काम कर रहे थे। यह दिन देश को याद दिलाता है कि पुलिसकर्मी भी उसकी खातिर खतरे में भेजे जाते हैं।