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जापान का एमएमएक्स मिशन: वैज्ञानिक मंगल के चांद की मिट्टी क्यों चाहते हैं
जाक्सा का मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन यान मंगलवार को एक ऐसी यात्रा पर निकला जो 2031 में फोबोस की मिट्टी ऑस्ट्रेलिया में उतारकर पूरी होनी है। मिशन क्या करेगा, नमूना कैसे लेगा, और किस सवाल का जवाब ढूंढ रहा है।
संक्षेप में
एमएमएक्स जापान का अंतरिक्ष यान है, जिसे 20 अक्टूबर 2026 को तानेगाशिमा से एच3 रॉकेट पर छोड़ा गया। इसे 2027 में मंगल पहुंचना है, उसके दो छोटे चांदों फोबोस और डेइमोस का अध्ययन करना है, फोबोस पर दो बार उतरकर कम से कम 10 ग्राम सतही सामग्री लेनी है और 2031 में नमूना धरती पर भेजना है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इससे तय होगा कि ये चांद पकड़े गए क्षुद्रग्रह हैं या मंगल पर किसी बड़ी टक्कर का मलबा। कामयाब हुआ तो यह मंगल प्रणाली से धरती पर लाई गई पहली सामग्री होगी।
एमएमएक्स क्या है?
एक जापानी अंतरिक्ष यान, जो मंगल तक जाकर उसके एक चांद पर उतरेगा और घर लौटेगा।
जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जाक्सा) का मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन मिशन जापान के समय से मंगलवार तड़के तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से एच3 रॉकेट की दसवीं उड़ान पर रवाना हुआ। जाक्सा ने पुष्टि की कि यान रॉकेट के ऊपरी चरण से अलग होकर मंगल की ओर बढ़ रहा है।
यान के तीन हिस्से हैं: वहां तक पहुंचाने वाला प्रणोदन मॉड्यूल, मंगल पर काम करने वाला अन्वेषण मॉड्यूल, और नमूना वापस लाने वाला रिटर्न मॉड्यूल। यह 5.3 मीटर ऊंचा है और 11 उपकरण ले जा रहा है। इसकी लागत करीब 57.8 करोड़ डॉलर बताई गई है।
मंगल के बजाय उसके चांद क्यों?
क्योंकि कोई नहीं जानता कि वे कहां से आए, और इसका जवाब मंगल के बारे में भी कुछ बताता है।
मंगल के दो छोटे, ऊबड़-खाबड़ चांद हैं। बड़ा फोबोस करीब 22 किलोमीटर चौड़ा है; डेइमोस उससे भी छोटा। इनकी उत्पत्ति पर वैज्ञानिक दशकों से बहस कर रहे हैं। एक राय है कि ये क्षुद्रग्रह हैं जो बहुत पास आ गए और मंगल के गुरुत्व ने इन्हें पकड़ लिया। दूसरी राय है कि ये उस मलबे से बने जो किसी बड़े पिंड के मंगल से टकराने पर कक्षा में फैल गया, कुछ वैसे ही जैसे धरती का चांद बना माना जाता है।
मिशन के लिए नासा के कार्यक्रम वैज्ञानिक टॉम स्टैटलर ने कहा, “फोबोस और डेइमोस मंगल पर हुई किसी विशाल टक्कर के अवशेष हो सकते हैं।” अगर ऐसा है, तो फोबोस पर प्राचीन मंगल के टुकड़े हो सकते हैं। जाक्सा मिशन का लक्ष्य “मंगल क्षेत्र और सौर मंडल के निर्माण को स्पष्ट करना” बताती है।
कक्षा से किए गए माप यह बहस नहीं सुलझा पाए। धरती की प्रयोगशाला में रखा नमूना, जिसकी उम्र और बनावट बारीकी से जांची जा सके, शायद सुलझा दे।
नमूना कैसे लिया जाएगा?
फोबोस पर दो बार उतरकर, दो अलग औज़ारों से।
2027 में मंगल पहुंचने के बाद एमएमएक्स उस कक्षा में जाएगा जिसे जाक्सा ‘क्वासी-सैटेलाइट’ कक्षा कहती है, यानी मंगल का चक्कर लगाते हुए फोबोस के पास बने रहना। वह चांद का नक्शा बनाएगा, उसके गुरुत्व और बनावट को मापेगा और फिर उतरने की जगह चुनेगा।
एक औज़ार, जाक्सा का सी-सैंपलर, रोबोटिक बांह पर लगा एक कोरर है जो सतह से कुछ सेंटीमीटर नीचे तक खोदेगा। दूसरा, ब्लू ओरिजिन की कंपनी हनीबी रोबोटिक्स का बनाया पी-सैंपलर, एक लैंडिंग लेग पर लगा है और नाइट्रोजन गैस के झोंकों से ढीले कणों को एक डिब्बे में उड़ा देगा। लक्ष्य कम से कम 10 ग्राम रेगोलिथ, यानी सतह को ढकने वाली धूल और टूटी चट्टान, लाने का है।
इससे पहले एमएमएक्स फ्रांस और जर्मनी का बनाया छोटा, चार पहियों वाला रोवर इडेफिक्स उतारेगा, जिसके करीब 100 दिन फोबोस पर घूमने की उम्मीद है।
एमएमएक्स की आने-जाने की यात्रा
- 20 अक्टूबर 2026जापान के तानेगाशिमा से एच3 पर प्रक्षेपण
- 2027मंगल पहुंचना; फोबोस का नक्शा बनाना शुरू
- 2028 के आखिर सेइडेफिक्स रोवर उतारना; नमूने के लिए दो लैंडिंग
- 2030डेइमोस के पास से उड़ानें, फिर धरती की ओर रवाना
- 2031नमूना कैप्सूल ऑस्ट्रेलिया में उतरेगा
नासा की भूमिका क्या है?
दो उपकरण, ट्रैकिंग, और नमूने में हिस्सा। नासा ने पी-सैंपलर और मेगाने दिए हैं। मेगाने जॉन्स हॉपकिन्स एप्लाइड फिज़िक्स लैबोरेटरी का बना स्पेक्ट्रोमीटर है, जो फोबोस से निकलने वाली गामा किरणों और न्यूट्रॉन को मापकर बताएगा कि सतह में कौन-से तत्व हैं। नासा का डीप स्पेस नेटवर्क यान को ट्रैक करने में मदद करेगा, और नासा को लौटे नमूने का करीब 15% मिलेगा, जिसे ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर में रखा जाएगा।
क्या जापान पहले ऐसा कर चुका है?
हां, क्षुद्रग्रहों के साथ। जाक्सा का हायाबुसा 2010 में क्षुद्रग्रह इटोकावा से कण लाया था, और हायाबुसा2 ने 2020 में क्षुद्रग्रह र्युगु के नमूने लौटाए। एमएमएक्स उसी अनुभव को कहीं कठिन लक्ष्य पर आज़मा रहा है: दूसरे ग्रह के गुरुत्व में गहरे बसा एक चांद, और करीब पांच साल की आने-जाने की यात्रा।
यह अहम क्यों है?
यह पहली बार होगा। अब तक कोई मिशन मंगल या उसके चांदों से सामग्री वापस नहीं लाया है, इसलिए मंगल प्रणाली का पहला टुकड़ा धरती तक एमएमएक्स ला सकता है। नासा के साइंस मिशन डायरेक्टोरेट की प्रमुख निकी फॉक्स ने कहा, “एमएमएक्स के नमूने मंगल प्रणाली पर ऐसा विज्ञान सामने लाएंगे जो पीढ़ियों तक सोच बदल देगा।”
मूल दस्तावेज़
- What's MMXJAXA, 17 अक्टूबर 2026
- NASA to Help Unlock Mysteries of Mars' Moons in Upcoming MissionNASA, 15 अक्टूबर 2026