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चैटजीपीटी के सभी यूजर्स को मिला जीपीटी-6, अब जवाब में चार्ट और नक्शे भी

पैसे देने वाले यूजर्स को जीपीटी-6 सोल और मुफ्त यूजर्स को उसका हल्का संस्करण लूना मिला है। नए 'इंटेलिजेंट यूआई' से चैटजीपीटी अब सिर्फ टेक्स्ट नहीं, डायग्राम, नक्शे और छोटे टूल के साथ जवाब दे सकता है।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित
स्मार्टफ़ोन पर चैटजीपीटी ऐप
स्मार्टफ़ोन पर चैटजीपीटी ऐपJernej Furman / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. जीपीटी-6 पेड प्लान वालों को 7 अक्टूबर को और फ्री व गो यूजर्स को 8 अक्टूबर को मिला।
  2. इंटेलिजेंट यूआई से चैटबॉट चार्ट, नक्शे, बटन और बिल बांटने जैसे छोटे टूल के साथ जवाब देता है।
  3. ओपनएआई की सुरक्षा रिपोर्ट दोनों मॉडलों को साइबर और जैविक जोखिम में 'हाई' क्षमता वाला मानती है।

ओपनएआई ने जीपीटी-6 को चैटजीपीटी इस्तेमाल करने वाले हर व्यक्ति के लिए डिफॉल्ट मॉडल बना दिया है, उनके लिए भी जो कोई पैसा नहीं देते। पैसे देने वाले सब्सक्राइबरों के लिए इसकी शुरुआत 7 अक्टूबर को हुई और अगले दिन यह फ्री और गो खातों तक पहुंच गया। इसके साथ एक नया फीचर आया है जिसे ओपनएआई इंटेलिजेंट यूआई कहती है। इससे चैटबॉट सिर्फ लंबे पैराग्राफ के बजाय चार्ट, नक्शे, बटन और काम करने वाले छोटे टूल के साथ जवाब दे सकता है।

एक नाम, दो मॉडल

प्लस, प्रो, बिजनेस और एंटरप्राइज प्लान वाले यूजर्स को जीपीटी-6 सोल मिला है। फ्री यूजर्स और कंपनी के सस्ते प्लान गो के यूजर्स को जीपीटी-6 लूना मिला है, जो इसका हल्का संस्करण है। दोनों रीज़निंग मॉडल हैं: इन्हें जवाब देने से पहले किसी सवाल पर भीतर ही भीतर लंबी ‘सोच की कड़ी’ (चेन ऑफ थॉट) चलाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। ये चैटजीपीटी के मुख्य चैट टैब में जीपीटी-5.6 मॉडलों की जगह लेते हैं, हालांकि यूजर्स चाहें तो जीपीटी-5.6 सोल पर लौट सकते हैं। चैटजीपीटी के वर्क और कोडेक्स टूल के पीछे के मॉडल नहीं बदल रहे।

रीज़निंग मॉडल आम तौर पर जवाब देने में वक्त लेते हैं। जीपीटी-6 सोचते-सोचते ही जवाब देना शुरू कर देता है और उसे किस्तों में पूरा करता है। ओपनएआई का कहना है कि जिन सवालों के लिए वेब सर्च की जरूरत होती है, उनमें जीपीटी-6 इंस्टेंट, जीपीटी-5.6 इंस्टेंट के मुकाबले औसतन 44% जल्दी जवाब देना शुरू करता है।

ऐसे जवाब जिन्हें छूकर इस्तेमाल करें

ओपनएआई के प्रोडक्ट मैनेजर आरुष सेल्वन ने कहा, “चैटजीपीटी मुख्य रूप से टेक्स्ट पर आधारित इंटरफेस रहा है।” लेकिन, उन्होंने कहा, “सबसे मददगार जवाब सिर्फ टेक्स्ट नहीं होते।”

जीपीटी-6 अब खुद तय करता है कि जवाब किस रूप में दिखाया जाए। किसी रेसिपी के साथ खाना पकाने की समय-सारिणी और एक विजेट आ सकता है जो मेहमानों की संख्या के हिसाब से सामग्री घटा-बढ़ा दे। रोड ट्रिप नक्शे पर पड़ावों के रूप में दिखती है। बचत से जुड़ा सवाल एक कैलकुलेटर बन जाता है जिसमें आप आंकड़े बदल सकते हैं। यूजर्स बिल बांटने वाले टूल या किसी आसान गेम जैसे छोटे टूल भी मांग सकते हैं। पत्रकारों के लिए एक प्रदर्शन में सेल्वन ने पूछा कि हवाई जहाज का पंख ऊपर उठने की ताकत (लिफ्ट) कैसे पैदा करता है, और चैटजीपीटी ने समझाने के लिए कई डायग्राम बना दिए।

इसके पीछे स्क्रीन पर दिखने वाले तैयार हिस्सों, जैसे बटन, चार्ट और फॉर्म, की एक लाइब्रेरी है, और एक कंपाइलर है जो मॉडल के लिखते-लिखते इन्हें जोड़ता जाता है। इसलिए पूरा जवाब बनने से पहले ही इंटरफेस के हिस्से दिखने लगते हैं। आसान सवालों के जवाब अब भी सादे टेक्स्ट में आते हैं, और यूजर्स सेटिंग में जाकर विज़ुअल कम कर सकते हैं। यह फीचर वेब और अपडेट किए गए मोबाइल ऐप पर काम करता है; पुराने डेस्कटॉप ऐप में यह अभी नहीं है। ओपनएआई खुद मानती है कि “मॉडल की डिज़ाइन से जुड़ी समझ पर अभी और काम की जरूरत है।”

सुरक्षा रिपोर्ट क्या कहती है

ओपनएआई ने लॉन्च के साथ एक सिस्टम कार्ड, यानी अपनी सुरक्षा रिपोर्ट, जारी की। इसके मुताबिक दोनों मॉडल कई चरणों वाली जेलब्रेक कोशिशों (सुरक्षा नियमों को चकमा देने के प्रयास) का जीपीटी-5.6 सोल से बेहतर मुकाबला करते हैं, और लगभग सभी पैमानों पर ये पहले से कम मनगढ़ंत दावे करते हैं।

कंपनी के प्रिपेयर्डनेस फ्रेमवर्क के तहत दोनों मॉडलों को साइबर सुरक्षा और जैविक व रासायनिक जोखिमों में “हाई” क्षमता वाला माना गया है। रिपोर्ट कहती है, “इनमें से कोई भी एआई के खुद को बेहतर बनाने (सेल्फ-इम्प्रूवमेंट) के मामले में हमारी ‘हाई’ सीमा तक नहीं पहुंचता।” रिपोर्ट में 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए बने कुछ परीक्षणों में गिरावट भी दर्ज है, जिनमें यौन सामग्री और भावनात्मक निर्भरता शामिल हैं। ओपनएआई का कहना है कि किशोरों के लिए ऐसी सामग्री रोकने वाला एक अतिरिक्त फिल्टर इन अंकों में नहीं झलकता।

कंपनी यह भी कहती है कि उसके कई परीक्षण “जानबूझकर कठिन बनाए गए” थे, और इनके अंकों को रोजमर्रा की गलतियों की दर नहीं समझा जाना चाहिए।

मूल दस्तावेज़