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ब्लैक होल की धाराएं आकाशगंगा के दूर-दराज़ तक गैस को हिलाती हैं: बेंगलुरु के नेतृत्व में अध्ययन

रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट और एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी के खगोलविदों ने पाया कि सक्रिय ब्लैक होल की ऊर्जा उनकी धाराओं के रास्ते मेज़बान आकाशगंगा के बाहरी हिस्सों तक पहुंचती है।

संपादकीय डेस्क से · बेंगलुरुप्रकाशित
बेंगलुरु के रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट का एक रेडियो टेलीस्कोप (फ़ाइल फ़ोटो)
बेंगलुरु के रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट का एक रेडियो टेलीस्कोप (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: PopePompus / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. अध्ययन का नेतृत्व बेंगलुरु के रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट की नम्रता रॉय ने किया।
  2. सैकड़ों आकाशगंगाओं के संकेत जोड़ने पर ब्लैक होल की धाराओं की दिशा में हाइड्रोजन गैस चमकती दिखी।
  3. शोधकर्ताओं के मुताबिक इस गैस के गर्म होने से नए तारे बनना मुश्किल हो सकता है।

बेंगलुरु के रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (आरआरआई) की एक खगोलविद के नेतृत्व में हुए अध्ययन के मुताबिक विशाल ब्लैक होल अपनी आकाशगंगाओं के केंद्र से बहुत दूर तक पहुंचकर आसपास की गैस में हलचल पैदा कर सकते हैं।

आरआरआई और अमेरिका की एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का यह काम उस बात का अवलोकन पर आधारित सबूत देता है, जिस पर खगोलविदों को लंबे समय से शक था पर जिसे सीधे दिखाना मुश्किल रहा: कि सक्रिय रूप से पदार्थ निगल रहे ब्लैक होल की ऊर्जा मेज़बान आकाशगंगा के बाहरी हिस्सों तक जा सकती है।

अपनी आकाशगंगाओं की तुलना में ब्लैक होल बहुत छोटे होते हैं, लेकिन सक्रिय होने पर वे बेहद गर्म पदार्थ की धाराएं बहुत दूर तक फेंक सकते हैं। अध्ययन का नेतृत्व करने वाली आरआरआई की असिस्टेंट प्रोफ़ेसर नम्रता रॉय ने कहा, “मुझे सबसे ज़्यादा रोमांचित इस जुड़ाव का पैमाना करता है। आकाशगंगा के मुकाबले ब्लैक होल बेहद छोटा होता है, लेकिन उसका असर अविश्वसनीय दूरी तक, लाखों प्रकाश वर्ष दूर तक पहुंच सकता है। यह ऐसा है जैसे धरती का एक छोटा ज्वालामुखी मंगल पर निशान छोड़ दे।”

टीम ने सक्रिय ब्लैक होल वाली सैकड़ों आकाशगंगाओं को देखा और उनके धुंधले संकेतों को जोड़कर आसपास की हाइड्रोजन गैस से आने वाली रोशनी पकड़ी। सभी दिशाओं को एक साथ लेने पर कोई मज़बूत संकेत नहीं मिला। लेकिन धाराओं की दिशा में एक साफ़ संकेत उभरा।

इससे पता चलता है कि धाराएं पूरी आकाशगंगा पर एक जैसा असर डालने के बजाय अपने रास्ते में आने वाली गैस को हिलाती और ऊर्जा देती हैं। नए तारे बनाने के लिए आकाशगंगाओं को अपेक्षाकृत ठंडी गैस चाहिए। गैस गर्म हो जाए तो वह ठंडी होकर इकट्ठा नहीं हो पाती और सिकुड़कर तारे नहीं बना पाती, जिससे तारे बनने की रफ़्तार धीमी हो सकती है। शोधकर्ताओं ने कहा कि धाराएं तारों को नष्ट नहीं करतीं, बल्कि उस कच्चे माल को बदल देती हैं जिससे तारे बनते हैं।

टीम अब हबल स्पेस टेलीस्कोप की मदद से अलग-अलग आकाशगंगाओं का अध्ययन करने की योजना बना रही है।