समझिएटेलीकॉम
टेलीकॉम सैंडबॉक्स समझिए: नए नियमों में कंपनियां असली उपयोगकर्ताओं पर 6जी और एआई सेवाएं कैसे परख सकेंगी
केंद्र ने दूरसंचार (रेगुलेटरी सैंडबॉक्स) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। सैंडबॉक्स क्या है, कौन आवेदन कर सकता है, उपयोगकर्ताओं से क्या वादे हैं, और पहली बार यह विचार आने के बाद से नियम कैसे बदले हैं।
संक्षेप में
रेगुलेटरी सैंडबॉक्स एक जीवंत परीक्षण व्यवस्था है, जिसमें कोई कंपनी किसी नए टेलीकॉम उत्पाद, सेवा या बिज़नेस मॉडल को तय समय के लिए असली उपयोगकर्ताओं के एक सीमित समूह पर परख सकती है, और इस दौरान उसे कुछ कानूनी नियमों से छूट मिलती है। दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 27 केंद्र को ऐसे सैंडबॉक्स बनाने की अनुमति देती है, और 22 अक्टूबर को अधिसूचित 2026 के नियम शर्तें तय करते हैं: 24 महीने का परीक्षण, 12-12 महीने के विस्तार के साथ, ₹10,000 का शुल्क, उपयोगकर्ताओं की लिखित सहमति, उनसे कोई शुल्क नहीं और परीक्षण के दौरान कोई व्यावसायिक बिक्री नहीं।
सरकार ने क्या अधिसूचित किया है?
दूरसंचार (रेगुलेटरी सैंडबॉक्स) नियम, 2026, जो बताते हैं कि कंपनियां और शोधकर्ता नई टेलीकॉम तकनीक को बिक्री से पहले असली लोगों पर कैसे परख सकते हैं।
केंद्र ने ये नियम गुरुवार, 22 अक्टूबर को अधिसूचित किए। इनके तहत भागीदार नियंत्रित, असली माहौल में नई तकनीकों, सेवाओं और बिज़नेस मॉडल को आज़मा सकते हैं, और परीक्षण चलने तक उन्हें दूरसंचार अधिनियम, 2023 और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) अधिनियम, 1997 के तय प्रावधानों से छूट मिलेगी। छठी पीढ़ी के मोबाइल नेटवर्क (6जी) और उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता उन तकनीकों में हैं जिनके परीक्षण की सरकार को उम्मीद है।
रेगुलेटरी सैंडबॉक्स आखिर है क्या?
एक घेरा हुआ दायरा, जहां सामान्य नियम ढीले किए जाते हैं ताकि कुछ नया छोटे पैमाने पर और सीमित समय के लिए सुरक्षित ढंग से आज़माया जा सके।
दूरसंचार अधिनियम, 2023 इस विचार को कानूनी आधार देता है। इसकी धारा 27 केंद्र को टेलीकॉम में नवाचार बढ़ाने के लिए एक या ज़्यादा सैंडबॉक्स बनाने की अनुमति देती है, और सैंडबॉक्स को ऐसा जीवंत परीक्षण माहौल बताती है जिसमें नए उत्पाद, सेवाएं, प्रक्रियाएं और बिज़नेस मॉडल तय अवधि के लिए उपयोगकर्ताओं के सीमित समूह पर, अधिनियम के कुछ प्रावधानों से छूट के साथ, लागू किए जा सकते हैं।
सोच सीधी है। टेलीकॉम के कई नियम पहले से मौजूद सेवाओं के लिए लिखे गए थे। जो उत्पाद उनमें ठीक से नहीं बैठता, वह प्रयोगशाला और बाज़ार के बीच अटक सकता है। सैंडबॉक्स नियामक को यह देखने देता है कि वह उत्पाद कैसे काम करता है, उसके बाद तय किया जाए कि उसे किन नियमों से चलाया जाए।
कौन आवेदन कर सकता है, और कैसे?
स्टार्टअप, बड़ी कंपनियां, शोधकर्ता और वैज्ञानिक, सरकार के एक डिजिटल पोर्टल के ज़रिए।
आवेदकों को पहले किए गए प्रयोगशाला परीक्षणों की रिपोर्ट लगानी होगी और उन नियमों की सूची देनी होगी जिनसे वे छूट चाहते हैं। ₹10,000 का प्रोसेसिंग शुल्क लगेगा, जो वापस नहीं होगा। परीक्षण को मंज़ूरी देने का फैसला सरकार करती है।
2026 के सैंडबॉक्स नियम एक नज़र में
- 24 महीनेमंज़ूर परीक्षण की अवधि, 12-12 महीने बढ़ाई जा सकती है
- ₹10,000आवेदन का प्रोसेसिंग शुल्क, जो वापस नहीं होगा
- ₹0परीक्षण के दौरान किसी उपयोगकर्ता से लिया जा सकने वाला शुल्क
- 1 सालपरीक्षण खत्म होने के बाद डेटा और सहमति रिकॉर्ड रखने की न्यूनतम अवधि
परीक्षण कितने समय चल सकता है?
शुरू में 24 महीने, फिर 12-12 महीने के विस्तार के साथ।
ज़्यादा समय का अनुरोध मौजूदा अवधि खत्म होने से कम से कम 30 दिन पहले करना होगा। यह नियामक के पहले सुझाव से लंबा है। अप्रैल 2024 में जब ट्राई ने डिजिटल संचार क्षेत्र के लिए सैंडबॉक्स ढांचे की सिफारिश की थी, तो उसने 12 महीने तक के परीक्षण की अनुमति का प्रस्ताव दिया था, जिसे ज़रूरत पड़ने पर बढ़ाया या पहले खत्म किया जा सकता था।
उपयोगकर्ताओं को क्या सुरक्षा मिलती है?
उन्हें बताना होगा कि वे एक परीक्षण का हिस्सा हैं, उनकी लिखित सहमति लेनी होगी, और उनसे कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता।
भागीदारों को उपयोगकर्ताओं को बताना होगा कि उत्पाद परीक्षण में है और उनकी लिखित सहमति लेनी होगी। हिस्सा लेने वाले किसी व्यक्ति से पैसा नहीं लिया जा सकता, और परीक्षण चलने तक उत्पाद व्यावसायिक रूप से बेचा नहीं जा सकता। परीक्षण खत्म होने पर कंपनियों को अपना डेटा, कार्ययोजना और उपयोगकर्ताओं की सहमति के रिकॉर्ड कम से कम एक साल तक रखने होंगे, ताकि बाद में परीक्षण की जांच हो सके।
क्या यह पहला टेलीकॉम सैंडबॉक्स है?
नहीं। यह विचार कई रूपों से गुज़रा है।
मार्च 2024 में दूरसंचार विभाग ने रेडियो फ्रीक्वेंसी के प्रयोगों के लिए ‘वाईटी ज़ोन’ नाम के स्पेक्ट्रम सैंडबॉक्स के दिशानिर्देश जारी किए थे, लेकिन उसमें लाइव नेटवर्क से जुड़ने की अनुमति नहीं थी। अप्रैल 2024 में ट्राई की सिफारिशें आईं। नवंबर 2024 में दूरसंचार (रेगुलेटरी सैंडबॉक्स) नियमों का पहला सेट जारी हुआ, जिसमें 24 महीने की वैधता थी जो 12 महीने तक बढ़ाई जा सकती थी। उस संस्करण में हर सैंडबॉक्स की निगरानी के लिए एक गवर्नेंस कमेटी बनाई गई थी, और केंद्र को कमेटी की सलाह पर मंज़ूरी निलंबित या रद्द करने का अधिकार था, अगर आवेदक ने गलत जानकारी दी हो, मंज़ूरी की शर्तें तोड़ी हों, या राष्ट्रीय सुरक्षा या जनहित के आधार पर। 2026 के नियम निगरानी का वह ढांचा कितना बनाए रखते हैं, यह अभी ज़्यादा सामने नहीं आया है।
आगे क्या?
असली परीक्षा यह होगी कि कंपनियां इसका इस्तेमाल करती हैं या नहीं।
नियम दरवाज़ा खोलते हैं, लेकिन सैंडबॉक्स की कीमत इस पर टिकी है कि उससे क्या निकलता है: बाज़ार तक पहुंचने वाले उत्पाद, और ऐसे नियम जो इसलिए दोबारा लिखे गए क्योंकि किसी परीक्षण ने दिखाया कि उन्हें बदलने की ज़रूरत है। सरकार ने नहीं बताया है कि उसे कितने आवेदनों की उम्मीद है या वह उन पर कितनी जल्दी फैसला करेगी। अक्टूबर 2026 तक पोर्टल और पहली मंज़ूरियां ही देखने लायक अगली चीज़ें हैं।