अर्थव्यवस्थाबाज़ार
फार्मा शेयरों और विदेशी खरीदारों के दम पर निफ्टी फिर 23,000 के पार
जियो की लिस्टिंग, फेड के स्थिर फैसले और दो महीने से ज़्यादा में पहली बार विदेशी निवेशकों की शुद्ध खरीद वाले हफ्ते में सेंसेक्स 1,335 अंक चढ़ा। छोटी कंपनियों के शेयर सबसे ज़्यादा उछले।

मुख्य बातें
- हफ्ते भर में सेंसेक्स 1,335.70 अंक यानी 1.83% चढ़कर 74,459.53 पर और निफ्टी 50 23,053.10 पर बंद हुआ।
- अस्थायी एक्सचेंज आंकड़ों के मुताबिक दस हफ्तों में पहली बार विदेशी निवेशक हफ्ते के शुद्ध खरीदार रहे।
- फार्मा शेयर सबसे आगे रहे, जबकि गाइडेंस घटाने के बाद शुक्रवार को सुज़लॉन एनर्जी करीब 8% टूटा।
अक्टूबर के आखिरी पूरे कारोबारी हफ्ते का अंत भारतीय शेयर बाज़ार ने मज़बूती से किया। दवा कंपनियों की अगुवाई में हफ्ते के आखिर की तेज़ी के बाद निफ्टी 50 शुक्रवार को 23,053.10 पर बंद हुआ, यानी फिर 23,000 के ऊपर। सेंसेक्स दिन में 308.49 अंक चढ़कर 74,459.53 पर रहा।
पूरे हफ्ते में सेंसेक्स 23 अक्टूबर के 73,123.83 के बंद स्तर से 1,335.70 अंक यानी 1.83% चढ़ा। निफ्टी करीब 2% या 453 अंक ऊपर रहा। पिछले हफ्ते बुरी तरह पिटी छोटी कंपनियों ने और ज़्यादा वापसी की, मुख्य स्मॉलकैप सूचकांक 4% से ज़्यादा चढ़े।
जिस दिन रुख बदला
हफ्ते की शुरुआत सुस्त रही। निफ्टी मंगलवार को हल्का फिसला और बुधवार को, जिस दिन जियो प्लेटफॉर्म्स शेयर बाज़ार में उतरी, 0.22% गिरकर 22,698.85 पर आ गया। रुख गुरुवार को बदला, जब सेंसेक्स 905.01 अंक उछलकर 74,151.04 पर पहुंचा और निफ्टी 237.90 अंक चढ़ा।
उससे पिछली रात अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ने बाज़ार की उम्मीद के मुताबिक ब्याज दरें नहीं बदली थीं, और खरीदारी बड़ी कंपनियों से बाकी बाज़ार तक फैल गई। शुक्रवार को टेक्नोलॉजी शेयरों ने कमान संभाली: निफ्टी आईटी सूचकांक 2.32% चढ़ा और विप्रो व इंफोसिस निफ्टी के सबसे बड़े लाभ वालों में रहे।
फार्मा सबसे आगे
दवा कंपनियों और अस्पताल समूहों ने हफ्ते की अगुवाई की। निफ्टी फार्मा और हेल्थकेयर सूचकांक 6% से ज़्यादा चढ़े, और बड़ी कंपनियों में डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेटरीज़ और अपोलो हॉस्पिटल्स सबसे ज़्यादा बढ़ने वालों में रहे। सितंबर तिमाही के नतीजों के बाद लॉरस लैब्स शुक्रवार को 7% से ज़्यादा उछला।
शुक्रवार को ट्रेंट 5.44% चढ़कर ₹3,017.30 पर निफ्टी का सबसे बड़ा लाभ वाला शेयर रहा, और अडानी पोर्ट्स का हफ्ता भी अच्छा रहा। बड़े नामों में श्रीराम फाइनेंस सबसे कमज़ोर रहा, जो शुक्रवार को 2.13% गिरा, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और कोल इंडिया हफ्ते में नीचे बंद हुए। तेल और गैस इकलौता सेक्टर रहा जो गिरा।
विदेशी पैसे की वापसी
सबसे साफ बदलाव खरीदारों में दिखा। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को अस्थायी तौर पर ₹3,598.54 करोड़ के शुद्ध शेयर खरीदे, जबकि एक दिन पहले उन्होंने ₹943.60 करोड़ बेचे थे। अस्थायी एक्सचेंज आंकड़ों के मुताबिक हफ्ते में उनकी शुद्ध खरीद ₹6,304.67 करोड़ रही, जिससे नौ हफ्तों की बिकवाली थमी। घरेलू संस्थानों ने पहले लगातार खरीदारी के बाद शुक्रवार को ₹817.51 करोड़ बेचे।
यह वापसी तब हुई जब तेल महंगा बना रहा। पश्चिम एशिया में तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड शुक्रवार तक $113 प्रति बैरल से ऊपर रहा, और पूरे हफ्ते रुपया डॉलर के मुकाबले 95 के आसपास टिका रहा।
हफ्ते के पिछड़े शेयर
हर शेयर इस तेज़ी में शामिल नहीं हुआ। गाइडेंस घटाने के बाद सुज़लॉन एनर्जी शुक्रवार को करीब 8% गिरकर लगभग ₹33.90 पर आ गया। प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी के इस्तीफे के बाद इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक के शेयर तेज़ी से टूटे, और आखिरी दिन सरकारी बैंक व मीडिया शेयर कमज़ोर रहे।
आगे क्या
नवंबर की शुरुआत अगले हफ्ते अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से होगी, जो हफ्तों से वैश्विक बाज़ारों पर छाए हुए हैं। देश में सवाल यह है कि क्या विदेशी खरीदार टिके रहेंगे, जिन्होंने अक्टूबर में शुद्ध रूप से करीब ₹45,162 करोड़ निकाले, और क्या आयातित कच्चे तेल पर निर्भर इस बाज़ार के लिए तेल के दाम नरम होंगे।