राजनीतिविपक्ष
'पहले मुझसे संतुष्ट हो जाइए': निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी को कांग्रेस दफ्तर में बहस की पेशकश की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी गई राहुल गांधी की नई चुनौती पर भाजपा सांसद ने अपनी ओर से पेशकश कर दी और नेता प्रतिपक्ष से दिन और समय तय करने को कहा। किरेन रिजिजू पहले ही इस चुनौती का मज़ाक उड़ा चुके थे।

मुख्य बातें
- निशिकांत दुबे ने कांग्रेस दफ्तर में राहुल गांधी से बहस की पेशकश की।
- राहुल ने 'देशद्रोही' के आरोप पर मोदी को कोई भी मंच, कोई भी जगह चुनने की चुनौती दी थी।
- किरेन रिजिजू ने कहा कि शीर्ष स्तर की बहस परिपक्व लोगों के बीच होती है।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने मंगलवार रात राहुल गांधी को खुद बहस की पेशकश कर दी और नेता प्रतिपक्ष की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी गई चुनौती उन्हीं की ओर मोड़ दी।
गोड्डा से सांसद दुबे ने एक्स पर लिखा कि वह “कागज़ों और मुद्दों पर आपसे बहस करने के लिए कांग्रेस दफ्तर” आने को तैयार हैं और राहुल से दिन और समय तय करने को कहा। उन्होंने जोड़ा: “पहले मुझसे संतुष्ट हो जाइए, फिर हमारे नेताओं को चुनौती दीजिए।”
चुनौती
राहुल ने मंगलवार को इससे पहले प्रधानमंत्री को दोबारा चुनौती दी थी और कहा था कि पहली चुनौती को 24 घंटे बीत चुके हैं। यह चुनौती शनिवार को गुजरात में राष्ट्रीय एकता दिवस के कार्यक्रम में मोदी के उस आरोप का जवाब है कि विपक्ष “विरोध पक्ष” के बजाय “अवरोध पक्ष” बन गया है।
राहुल ने लिखा, “कोई भी मंच, कोई भी जगह चुनिए और इस पर मुझसे बहस कीजिए। देशद्रोही कौन है? विदेशी ताकतों से किसके संबंध हैं? हम दोनों वहां होंगे। मीडिया वहां होगा।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री संचालक चुन सकते हैं और “आप मोहन भागवत जी को भी जज बना सकते हैं।”
उन्होंने “विदेशी संबंधों” के आरोप पर मोदी को मानहानि का मुकदमा करने की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा, “आगे बढ़िए, मुकदमा कर दीजिए।”
भाजपा का पलटवार
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू एक्स पर पहले ही इस चुनौती को खारिज कर चुके थे। उन्होंने इसकी तुलना “इस्लामी कट्टरपंथियों के धर्मनिरपेक्षता की बात करने” से की और लिखा: “भारत के दुश्मनों का एजेंडा आगे बढ़ाना और फिर दूसरों पर विदेशी समर्थन का आरोप लगाना, खुद का मज़ाक बनाना है।” उन्होंने कहा कि शीर्ष स्तर की बहस परिपक्व लोगों के बीच होती है।
आधी रात तक प्रधानमंत्री की ओर से कोई जवाब नहीं आया था। यह बयानबाज़ी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के अभियान को लेकर भाजपा और इंडिया गठबंधन के बीच हफ्ते भर से चल रही तीखी बहस का हिस्सा है।