समझिएचुनाव
उत्तर प्रदेश 2027: मैदान में कौन, किसके साथ
योगी आदित्यनाथ तीसरी बार सत्ता चाहते हैं, अखिलेश यादव अपने पीडीए गठजोड़ पर दांव लगा रहे हैं और मायावती अकेले लड़ेंगी। प्रमुख नेता, करीबी सीटों का फैसला करने वाले जाति आधारित छोटे दल, और हिस्सेदारी चाहने वाले नए खिलाड़ी।
संक्षेप में
2027 का चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाले भाजपा गठबंधन (एनडीए), जिसमें अपना दल (सोनेलाल), निषाद पार्टी, सुभासपा और रालोद साथी हैं, और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबले की शक्ल ले रहा है, जो कांग्रेस से सीटों पर बातचीत कर रही है। मायावती की बसपा अकेले लड़ेगी, और चंद्रशेखर आज़ाद की आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) उसी दलित वोट के लिए मैदान में है।
भाजपा के अभियान की कमान किसके हाथ में है?
2017 से उत्तर प्रदेश चला रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार तीसरे कार्यकाल की भाजपा की कोशिश का चेहरा हैं।
आदित्यनाथ ने 2022 में भाजपा को दूसरी बार बहुमत दिलाया और अपनी गोरखपुर शहर सीट भी जीती। उनकी सरकार में दो उपमुख्यमंत्री हैं, केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक।
पार्टी संगठन की कमान अब पंकज चौधरी के पास है, जो महराजगंज से सात बार लोकसभा सांसद रहे हैं और पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रमुख कुर्मी नेता हैं। उन्होंने दिसंबर 2025 में पश्चिमी यूपी के जाट नेता भूपेंद्र सिंह चौधरी की जगह प्रदेश अध्यक्ष का पद संभाला। पूर्व से एक ओबीसी चेहरे का चुनाव 2024 के लोकसभा चुनाव में वहां पार्टी को लगे झटके के बाद हुआ, जब राज्य में भाजपा की सीटें 80 में से 33 पर आ गईं।
भाजपा के साथी कौन हैं?
चार छोटे दल, जिनमें से हर एक की खास जातियों और इलाकों में मज़बूत पकड़ है।
अनुप्रिया पटेल के नेतृत्व वाले अपना दल (सोनेलाल) ने 2022 में 12 सीटें जीतीं, जो किसी भी सहयोगी में सबसे ज़्यादा हैं। संजय निषाद की निषाद पार्टी का आधार निषाद समुदाय है, जो पूर्व में अहमियत रखने वाले छोटे पिछड़े समुदायों में से एक है, और उसने छह सीटें जीतीं।
बाकी दो दल पिछला विधानसभा चुनाव भाजपा के खिलाफ लड़े थे। पूर्वांचल के राजभरों में मज़बूत ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने सपा के साथ छह सीटें जीती थीं और बाद में एनडीए में आ गई; राजभर अब पंचायती राज मंत्री हैं। सितंबर में उन्होंने देवरिया की एक रैली में राज्य के बंटवारे की बात फिर छेड़ी: “प्रदेश चार हिस्सों में बंटेगा।” पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आधार रखने वाले जयंत चौधरी के राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने 2022 में सपा के साथ आठ सीटें जीती थीं। चौधरी अब केंद्रीय मंत्री हैं।
मुख्य चुनौती कौन दे रहा है?
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव।
यादव ने 2022 में करहल सीट 67,504 वोटों से जीती और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में कन्नौज, जब सपा ने राज्य की 80 में से 37 सीटें जीतीं, जो किसी राष्ट्रीय चुनाव में उसका सबसे अच्छा प्रदर्शन है। यह नतीजा उस फॉर्मूले पर टिका था जिसे वे पीडीए कहते हैं: पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक।
उन्होंने मार्च में दादरी की एक रैली से सपा का 2027 अभियान शुरू किया। उन्होंने कहा, “पीडीए आंदोलन एक-दो चुनावों के लिए नहीं, बल्कि ऐतिहासिक अन्याय के खिलाफ लंबा संघर्ष है।” सितंबर में उन्होंने रायबरेली से पीडीए रथ यात्रा निकाली। पार्टी की प्रदेश इकाई की कमान श्याम लाल पाल के पास है।
कांग्रेस कहां खड़ी है?
सपा के छोटे साथी के रूप में, हालांकि कितना छोटा, इस पर अब भी खींचतान है।
कांग्रेस 2022 में सिर्फ दो विधानसभा सीटें जीत पाई थी, पर 2024 में सपा के साथ लड़कर उसने छह लोकसभा सीटें जीतीं। उसकी प्रदेश इकाई की कमान अगस्त 2023 से अजय राय के पास रही है, जिन्होंने 2024 में वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इस हफ्ते आई खबरों में कहा गया कि सपा से बातचीत आसान करने के लिए पार्टी नेतृत्व ने उनकी जगह वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी की बेटी आराधना मिश्रा को ज़िम्मेदारी दी है।
सीटों का बंटवारा तय नहीं हुआ है। खबरों के मुताबिक कांग्रेस 150 या उससे ज़्यादा सीटें चाहती है, जबकि सपा के सूत्र करीब 75 से 80 सीटें देने की बात कर रहे हैं। सपा नेताओं ने कहा है कि बातचीत मीडिया के ज़रिए नहीं, सीधे अखिलेश यादव से होनी चाहिए।
मायावती की क्या योजना है?
अकेले लड़ना और उस पार्टी को फिर खड़ा करना जो 2022 में एक सीट पर सिमट गई।
बसपा चार बार उत्तर प्रदेश में सरकार बना चुकी है, और मायावती पांचवीं बार सत्ता चाहती हैं। फरवरी में उन्होंने कहा, “इसको लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी।”
उनके भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद को कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का काम सौंपा गया है। अगस्त में मायावती ने कहा कि आकाश के उम्मीदवार चुनने की खबरों में “रत्ती भर भी सच्चाई नहीं” है, और वे खुद दावेदारों का इंटरव्यू लेकर सूची तय कर रही हैं।
नए खिलाड़ी कौन हैं?
सबसे अहम है चंद्रशेखर आज़ाद की आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम)।
2022 के विधानसभा चुनाव में आज़ाद की पार्टी को सिर्फ 0.13% वोट मिले थे, पर 2024 में उन्होंने 51.19% वोट के साथ नगीना लोकसभा सीट जीती। जुलाई में पार्टी ने अपनी पहली 45 विधानसभा सीटों के प्रभारी घोषित किए; उसके प्रदेश उपाध्यक्ष के मुताबिक इनमें 18 अनुसूचित जाति, 16 ओबीसी, 10 मुस्लिम और एक सिख हैं। पार्टी का कहना है कि सूची में बहुजन समाज के अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया गया है, यानी वही मतदाता जिन्हें बसपा अपना मानती है। पिछले साल खबरें आई थीं कि सपा नेता आज़ाद के साथ गठबंधन का रास्ता खुला रख रहे हैं।
असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम, जो 2022 में कोई सीट नहीं जीत पाई थी, ने भी मुस्लिम मतदाताओं तक पहुंच तेज़ की है और उनसे कहा है कि सपा को वोट देकर उन्हें नुकसान हुआ।
आगे किन बातों पर नज़र रखें?
सीट बंटवारे के समझौते, दल-बदल और उम्मीदवारों की सूचियां।
सपा और कांग्रेस को अभी फॉर्मूला तय करना है, और एनडीए को पांच दलों के बीच सीटें बांटनी हैं। बसपा और आज़ाद समाज पार्टी उम्मीदवारों के नाम तय करना शुरू कर चुकी हैं। चुनाव फरवरी और मार्च 2027 में होने की उम्मीद है, 22 मई को विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से पहले।
हर मंत्री, सीट और 2022 के अंतर के लिए देखें हमारी उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 गाइड।
मूल दस्तावेज़
- Party-wise result, Uttar Pradesh, General Election to Lok Sabha 2024Election Commission of India, 4 जून 2024