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लिस्टिंग के बाद पहले नतीजे: NSE का मुनाफा 23% बढ़कर ₹2,578 करोड़

देश के सबसे बड़े शेयर बाजार ने अपनी कोयला एक्सचेंज सहायक कंपनी की 40% तक हिस्सेदारी बेचने को भी मंजूरी दी, हालांकि जून तिमाही के मुकाबले मुनाफा घटा।

संपादकीय डेस्क से · मुंबईप्रकाशित
गांधी न्यूज़ ग्राफ़िक: लिस्टिंग के बाद पहली तिमाही में NSE का मुनाफा 23% बढ़ा
गांधी न्यूज़ ग्राफ़िक: लिस्टिंग के बाद पहली तिमाही में NSE का मुनाफा 23% बढ़ाGraphic: Gandhi News

मुख्य बातें

  1. सितंबर तिमाही में NSE का मुनाफा 23% बढ़कर ₹2,578 करोड़ रहा।
  2. परिचालन से आय 11% बढ़कर ₹4,067 करोड़ हुई, पर जून तिमाही से 10.8% कम रही।
  3. बोर्ड ने नेशनल कोल एक्सचेंज ऑफ इंडिया की 40% तक हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दी।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने सितंबर तिमाही में ₹2,578 करोड़ का मुनाफा कमाया, जो पिछले साल से 23% ज्यादा है। अपने शेयरों की लिस्टिंग के बाद एक्सचेंज के ये पहले तिमाही नतीजे हैं।

30 सितंबर को खत्म तीन महीनों का यह समेकित शुद्ध मुनाफा 2025 की इसी तिमाही में ₹2,098 करोड़ था। परिचालन से आय ₹3,677 करोड़ से 11% बढ़कर ₹4,067 करोड़ हो गई, क्योंकि कारोबार की मात्रा ने एक्सचेंज के मुख्य धंधे को बढ़ाए रखा।

जून से कमजोर तिमाही

पिछली तिमाही से तुलना करें तो तस्वीर कुछ फीकी है। मुनाफा जून तिमाही के ₹3,120 करोड़ से 17.4% घटा, और आय अप्रैल-जून के ₹4,560 करोड़ से 10.8% कम रही।

परिचालन मुनाफा यानी EBITDA ₹3,551 करोड़ से 13.3% घटकर ₹3,079 करोड़ रहा। फिर भी एक्सचेंज अपनी आय के हर चार में से तीन रुपये परिचालन मुनाफे के रूप में रखता है: उसका मार्जिन 75.7% रहा, जो जून तिमाही में 77.9% था।

कोयला एक्सचेंज में हिस्सेदारी बिकेगी

नतीजों के साथ बोर्ड ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी नेशनल कोल एक्सचेंज ऑफ इंडिया की 40% तक हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दी। एक्सचेंज के मुताबिक यह हिस्सेदारी एक या कई किस्तों में बेची जा सकती है। खरीदार या कीमत के बारे में कुछ नहीं बताया गया।

नतीजे बाजार बंद होने के बाद आए। मंगलवार को बीएसई पर NSE का शेयर 1.31% चढ़कर ₹1,803 पर बंद हुआ था, जो ₹1,785 के इश्यू मूल्य से थोड़ा ऊपर है। दोपहर में एक्सचेंज का बाजार मूल्य करीब ₹4.44 लाख करोड़ था।

श्रीनिवास इंजेती की अध्यक्षता और आशीषकुमार चौहान के प्रबंध निदेशक व सीईओ वाले बोर्ड में टीसीएस के पूर्व प्रमुख राजेश गोपीनाथन भी शामिल हैं।

इसके मायने

देश के सबसे व्यस्त शेयर और डेरिवेटिव बाजार को चलाने वाली कंपनी के लिए सालाना बढ़त दिखाती है कि उसकी कमाई अब भी कारोबार की रफ्तार के साथ ऊपर-नीचे होती है। बुधवार को पता चलेगा कि निवेशक लिस्टिंग के बाद के पहले नतीजों और कोयला कारोबार का हिस्सा बेचने के फैसले को कैसे लेते हैं।