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राकांपा बैठक में भाजपा पर निशाना, भुजबल बोले: सभी 288 सीटों की तैयारी करें
देवगिरी में मंगलवार शाम हुई बैठक में राकांपा नेताओं ने वित्त विभाग पर भाजपा की शर्त को धोखा बताया, और पार्टी की अंदरूनी खींचतान भी खुलकर सामने आई।

मुख्य बातें
- भाजपा ने सुनेत्रा पवार से कहा है कि वित्त विभाग चाहिए तो दिल्ली जाकर अमित शाह से मिलें।
- छगन भुजबल ने राकांपा से सभी 288 सीटों की तैयारी करने को कहा।
- सुनील तटकरे के बोलना शुरू करते ही पार्थ पवार बैठक से उठकर चले गए।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने मंगलवार शाम अपने ही सहयोगी पर निशाना साधा। मुंबई के देवगिरी बंगले पर हुई बैठक में नेताओं ने वित्त विभाग पर भाजपा के रुख को धोखा बताया।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में बड़ी साझेदार भाजपा ने सुनेत्रा पवार से कहा है कि अगर उन्हें वित्त विभाग चाहिए तो वे दिल्ली जाकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलें। यह विभाग उनके दिवंगत पति अजित पवार के पास था और अब मुख्यमंत्री फडणवीस के पास है। सुनेत्रा पवार ने बैठक में बताया कि उन्होंने फडणवीस से इस बारे में बात की, पर कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
‘सभी 288 सीटों पर लड़ें’
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल और आगे गए। उन्होंने कहा, “2029 के चुनाव में भाजपा क्या करेगी, इसकी कोई निश्चितता नहीं है।” उन्होंने पार्टी से अपने दम पर सभी 288 सीटों की तैयारी करने को कहा। भुजबल ने महाराष्ट्र की मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर भी हमला बोला और कहा कि यह सिर्फ एक खास पार्टी, यानी भाजपा, के हित में है।
पुरानी दरार खुलकर सामने
बैठक में राकांपा की अंदरूनी कलह भी उजागर हुई। सुनील तटकरे के बोलना शुरू करते ही सुनेत्रा पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार बाहर चले गए। तटकरे और प्रफुल्ल पटेल ने हाल में राकांपा संस्थापक शरद पवार से शिकायत की थी कि पार्थ उनका अनादर करते हैं।
तटकरे ने पूछा, “सिर्फ प्रफुल्ल पटेल और मुझे ही आलोचना का निशाना क्यों बनाया जा रहा है?” उन्होंने कहा कि दोनों ने पार्टी सुनेत्रा पवार को सौंपने और अजित पवार के निधन के बाद उसे एकजुट रखने में मदद की, पर किसी और नेता ने उनका बचाव नहीं किया। पटेल मुंबई में होते हुए भी बैठक से दूर रहे।
भाजपा ने अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई जवाब नहीं दिया है। सुनेत्रा पवार दिल्ली का रुख करती हैं या नहीं, इसी से तय होगा कि गठबंधन में यह तनाव कितना लंबा चलेगा।