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नीतिअर्थव्यवस्था

टाटा का झगड़ा 'इस तरह सार्वजनिक नहीं होना चाहिए': निर्मला सीतारमण

वित्त मंत्री ने 158 साल पुराने समूह को अर्थव्यवस्था का बेहद अहम हिस्सा बताया और दोनों खेमों से आपस में विवाद सुलझाने को कहा। उन्होंने माना कि निवेशकों की चिंता की आवाज़ें तेज़ हुई हैं।

संपादकीय डेस्क से · मुंबईप्रकाशित
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (फ़ाइल फ़ोटो)
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: This file comes from the websites (mil.ru, минобороны.рф) of the Ministry of Defence of the Russian Federation and is co / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. निर्मला सीतारमण ने टाटा समूह को भारतीय अर्थव्यवस्था का बेहद अहम हिस्सा बताया।
  2. उन्होंने कहा कि टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स का विवाद आपस में सौहार्द से सुलझना चाहिए, सार्वजनिक रूप से नहीं।
  3. विदेशी निवेश की निकासी पर उन्होंने कहा कि भारत को अभी खास तौर पर पूंजी और इक्विटी चाहिए, पर टैक्स कटौती पर कुछ नहीं कहा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टाटा समूह में नेतृत्व की लड़ाई लड़ रहे दोनों पक्षों से मतभेद आपस में सुलझाने को कहा है। उन्होंने समूह को अर्थव्यवस्था का बेहद अहम हिस्सा बताया: “भारतीय अर्थव्यवस्था का बहुत महत्वपूर्ण घटक”।

सोमवार शाम मुंबई में फाइनेंशियल एक्सप्रेस लीडरशिप अवॉर्ड्स में उन्होंने कहा कि टाटा संस और उसकी सबसे बड़ी शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स के बीच का झगड़ा बहुत दिनों से खुले में चल रहा है। उन्होंने कहा, “इसे आपस में सौहार्द से सुलझाना होगा। यह इस तरह सार्वजनिक रूप से बाहर नहीं आ सकता।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चाहेगी कि यह जल्द सुलझे।

उन्होंने मामले को संवेदनशील बताया और यह कहने से इनकार किया कि सरकार दोनों खेमों से बात करेगी या नहीं। टाटा को वैश्विक ब्रांड बनाने में पारसी समुदाय के योगदान की भी उन्होंने सराहना की।

सितंबर में सामने आई दरार

टाटा संस (अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन) और टाटा ट्रस्ट्स (अध्यक्ष नोएल टाटा) के बीच की खाई 17 सितंबर की टाटा संस बोर्ड बैठक में खुलकर सामने आई। यह बैठक भारतीय रिज़र्व बैंक के उस पत्र के एक हफ्ते के भीतर हुई थी, जिसमें टाटा संस का कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में पंजीकरण रद्द करने का अनुरोध ठुकरा दिया गया था। बोर्ड ने केंद्रीय बैंक के निर्देश के मुताबिक लिस्टिंग की राह पकड़ने का फैसला किया और चंद्रशेखरन को फिर से अध्यक्ष नियुक्त किया।

नोएल टाटा अकेले असहमत रहे। ट्रस्ट्स के दूसरे नामित निदेशक वेणु श्रीनिवासन ने बहुमत के साथ वोट किया। पिछले हफ्ते नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति वाले बोर्ड प्रस्ताव को चुनौती दी।

मामला राजनीतिक भी हो गया है। 28 अक्टूबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लिखा था, “टाटा को आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है, और कोई कारोबारी नेता एक शब्द बोलने की हिम्मत नहीं करता।” सीतारमण ने उसी दिन जवाब में उनसे “हर जगह भूत देखना बंद करने” को कहा और व्यावसायिक व कानूनी मामलों को आपराधिक बताने को “अस्वीकार्य” कहा।

‘हमें पूंजी और इक्विटी चाहिए’

उसी शाम सीतारमण ने निवेशकों की चिंता पर भी बात की, जो भारतीय बाज़ारों से पैसा निकाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने चिंता की “तेज़” होती आवाज़ें सुनी हैं और सरकार खुदरा निवेशकों की बेचैनी समझती है, साथ ही बाज़ार के भागीदारों की भी।

उन्होंने कहा, “हमें पूंजी और इक्विटी चाहिए, खास तौर पर अभी।” उन्होंने टैक्स कटौती का कोई वादा नहीं किया, जिसकी मांग बाज़ार कर रहा है। उन्होंने कहा कि 2023-24 में भी टैक्स ढांचा लगभग ऐसा ही था, जब भारत में सबसे ज़्यादा विदेशी निवेश आया था, पर अब हालात बदल गए हैं। उन्होंने कहा कि निवेश लौटने लगा है और सरकार उठाई गई चिंताओं पर विचार करेगी।

उन्होंने वृद्धि का अनुमान दोहराया और “लगातार सात प्रतिशत से ज़्यादा की वृद्धि” की बात कही।