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ईरान बोला, दो दिन में खुल सकता है होर्मुज; रेजाई को अमेरिका का सुर बदला दिखा
विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक कतर के मध्यस्थों के साथ बनी योजना के तहत, अगर वॉशिंगटन तेहरान की शर्तें माने तो 48 घंटे में जलडमरूमध्य खोला जा सकता है। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव में दो दिन बचे हैं।

मुख्य बातें
- ईरान का कहना है कि अमेरिका शर्तें माने तो कतर के मध्यस्थों के साथ बनी योजना से दो दिन में होर्मुज खुल सकता है।
- सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई के मुताबिक जेडी वेंस की चिट्ठी के बाद वॉशिंगटन का सुर पूरी तरह बदल गया है।
- सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने किसी भी नए हमले पर भौगोलिक सीमा से परे जवाब का आदेश दिया है।
ईरान का कहना है कि वह कतर के मध्यस्थों के साथ बनी एक योजना के तहत दो दिन के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य खोल सकता है, बशर्ते अमेरिका उसकी शर्तें मान ले। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यह समयसीमा तब बताई जब एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल दोहा में बातचीत कर रहा था। रविवार तड़के ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि वॉशिंगटन का रवैया बदला है।
सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की चिट्ठी पढ़ी है और वॉशिंगटन का “सुर पूरी तरह बदल गया है”। उन्होंने इसे “बहुत सकारात्मक संकेत” बताया। शनिवार को इससे पहले उन्होंने कहा था कि उन्होंने अभी चिट्ठी का जवाब नहीं दिया है और “परमाणु सिद्धांत में बदलाव को लेकर कोई नया फैसला नहीं हुआ है”, हालांकि उन्होंने चेताया कि नई जंग इसे बदल सकती है।
सात दिन से दो दिन
नई पेशकश तेहरान के सितंबर वाले प्रस्ताव से छोटी है। तब अराघची ने सात दिन में जलडमरूमध्य खोलने और परमाणु वार्ता फिर शुरू करने की बात कही थी। बदले में ईरान चाहता था कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी हटाए, उसके तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में छूट दे और लेबनान समेत युद्धविराम माने। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 26 सितंबर को इसे ठुकरा दिया था। तब उन्होंने कहा था, “मैं भी समझौता करना चाहूंगा। लेकिन वह समझौता मंजूर नहीं होगा।”
अराघची ने बातचीत की अमेरिकी पेशकश को “सकारात्मक कदम” बताया, लेकिन फिलहाल मुलाकात से इनकार किया। उन्होंने कहा, “अभी अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की कोई योजना नहीं है।” उन्होंने जोड़ा कि बातचीत सीधी होगी या परोक्ष, यह “वॉशिंगटन के ईरान की शर्तें मान लेने के बाद” तय होगा। शनिवार को दोहा में कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों की बैठक हुई, जिसमें एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था।
वॉशिंगटन ने विकल्प खुले रखे
अटलांटा में, जहां बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के विदेश मंत्री जी20 बैठक के लिए जुटे थे, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ट्रंप ने हमले दोबारा शुरू करने पर फैसला नहीं किया है। रुबियो ने कहा, “उन्होंने फैसला नहीं किया है। लेकिन हम इसे शांति से करना पसंद करेंगे।” ट्रंप कह चुके हैं कि मंगलवार, 3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिका ईरान पर हमला नहीं करेगा।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक अमेरिकी नाकेबंदी अब तक 144 जहाजों को लौटा चुकी है, जबकि दो हफ्ते पहले यह संख्या 138 थी। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, “आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर पर लौट आई है, बस ईरानी बैरल को छोड़कर।” दूसरी ओर ईरानी नौसेना ने दावा किया कि जलडमरूमध्य के पूर्व में एक प्रतिबंधित इलाके में समुद्री बारूदी सुरंगों से टकराकर एक टैंकर में आग लग गई। इस दावे की पुष्टि नहीं हो सकी।
सर्वोच्च नेता की चेतावनी
सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई, जो फरवरी में अपने पिता की जगह लेने के बाद से सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे हैं, शनिवार को अपने वरिष्ठ कमांडरों से मिले। उन्होंने आदेश दिया कि “किसी भी स्तर या किस्म के खतरे का तुरंत, असरदार और भौगोलिक सीमा से परे जवाब दिया जाए।” जंग के दौरान ईरानी हमलों ने इलाके में दो दर्जन से ज्यादा अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था; कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस पर कम से कम 30 बार हमला हुआ।
अरब सरकारें शांति पर जोर दे रही हैं। मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलअत्ती ने बहरीन में मनामा डायलॉग में कहा, “दूसरा दौर ज्यादा खतरनाक, ज्यादा विनाशकारी होगा, और उससे कुछ हासिल नहीं होगा।”
भारत के लिए जलडमरूमध्य खुलने से जहाजों के चालक दल और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव घटेगा। भारतीय नाविक इन हमलों की चपेट में आए हैं: 11 अक्टूबर को ओमान के सोहर के पास टैंकर एमटी पेट्रो डॉल्फिन पर ड्रोन हमले के बाद दो भारतीय लापता हो गए थे, और अगले दिन रेजाई ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से संकट पर बात की थी।