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राजद के आलोक मेहता की मांग, भाजपा में गए दो निर्दलीय एमएलसी की सदस्यता रद्द हो
पूर्व मंत्री ने कहा कि राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी ने दलबदल कानून तोड़ा है, और सारण शिक्षक व तिरहुत स्नातक सीटों पर दोबारा चुनाव की मांग की।

मुख्य बातें
- आलोक कुमार मेहता ने मांग की कि भाजपा में शामिल हुए दो एमएलसी की सदस्यता रद्द हो।
- उन्होंने कहा कि यह कदम संविधान की दसवीं अनुसूची का उल्लंघन है।
- वह सारण शिक्षक और तिरहुत स्नातक सीटों पर दोबारा चुनाव चाहते हैं।
राष्ट्रीय जनता दल के विधायक और बिहार के पूर्व मंत्री आलोक कुमार मेहता ने सोमवार को मांग की कि निर्दलीय चुने जाने के बाद भाजपा में शामिल हुए बिहार विधान परिषद के दो सदस्यों की सदस्यता रद्द की जाए।
समस्तीपुर में पत्रकारों से बात करते हुए मेहता ने सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए राहुल राज और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए बंशीधर ब्रजवासी का नाम लिया। उन्होंने कहा कि उनका भाजपा में जाना “भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची के दलबदल विरोधी प्रावधानों का उल्लंघन है।”
उन्होंने इससे आगे बढ़कर दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में दोबारा चुनाव की मांग भी की।
कानून क्या कहता है
दसवीं अनुसूची, यानी दलबदल विरोधी कानून, पार्टी सदस्यों के साथ निर्दलीयों पर भी लागू होता है। बिना पार्टी के चुना गया कोई सदस्य चुनाव के बाद किसी दल में शामिल हो जाए तो उसे अयोग्य ठहराया जा सकता है। फैसला सदन के पीठासीन अधिकारी, यहां विधान परिषद के सभापति, के हाथ में है, इसलिए राजद की मांग तभी असर दिखाएगी जब उसे औपचारिक याचिका के रूप में उनके सामने रखा जाए। मेहता ने यह नहीं बताया कि पार्टी ऐसी याचिका दायर करेगी या नहीं।
सारण शिक्षक सीट उन आठ परिषद सीटों में थी जिन पर 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए यह मुकाबला उलझा हुआ रहा। एनडीए ने जनता दल (यूनाइटेड) के आनंद पुष्कर को उतारा था, जबकि राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राम पुकार सिन्हा उनके खिलाफ निर्दलीय लड़े और पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए निलंबित कर दिया।
सोमवार रात तक न राहुल राज, न ब्रजवासी और न ही भाजपा ने मेहता की मांग पर कोई जवाब दिया था।