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सरहौल बॉर्डर पर जाम में फंसीं रैली की गाड़ियां; विपक्षी सांसदों का आरोप, बसें और ट्रेनें रोकी जा रहीं
दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर जाम में फंसे कांग्रेस कार्यकर्ता पैदल चल पड़े। संजय राउत और समाजवादी पार्टी के सांसदों ने आरोप लगाया कि रामलीला मैदान जा रहे समर्थकों को रास्ते में रोका जा रहा है।

मुख्य बातें
- रैली में जा रही गाड़ियां सरहौल बॉर्डर पर जाम में फंसीं।
- संजय राउत ने आरोप लगाया कि ट्रेनें और बसें रोकी गई हैं।
- सपा सांसद राजीव राय ने कहा कि राज्यों की सीमाओं पर चेकपोस्ट लगाए गए हैं।
रविवार को इंडिया गठबंधन की रैली में समर्थकों को ला रही गाड़ियां दिल्ली और गुरुग्राम के बीच सरहौल बॉर्डर पर भीषण जाम में फंस गईं। कतार में अटके नाराज कांग्रेस कार्यकर्ता गाड़ियों से उतरकर पैदल ही चल पड़े। जाम की खबर दोपहर करीब 12:30 बजे आई।
इन रुकावटों ने विपक्षी नेताओं को नया मुद्दा दे दिया। दोपहर 12 बजे के कुछ देर बाद पहुंचे शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने इसे “महारैली” बताया और आरोप लगाया कि लोगों को दिल्ली पहुंचने से रोका जा रहा है और ट्रेनें और बसें रोकी गई हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा।
समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने भी यही आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “राज्यों की सीमाओं पर बसें रोकी जा रही हैं, चेकपोस्ट लगाए गए हैं।” उनकी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने कहा कि रैली में आना “हमारा मौलिक अधिकार” है, और जोड़ा, “आज हम सत्ता में बैठे लोगों को दिखा देंगे कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है।”
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने भी यही बात कही कि यह रैली इंडिया गठबंधन के दलों तक सीमित न रहकर नागरिकों का आंदोलन बन गई है।
पुलिस या रेलवे की ओर से इन आरोपों पर तुरंत कोई जवाब नहीं आया। दिल्ली पुलिस ने रैली के लिए पहले ही करीब 10,000 जवान तैनात किए थे और मध्य दिल्ली में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक यातायात का रास्ता बदला था। आयोजकों ने 10 लाख तक लोगों के आने का अनुमान जताया है, जबकि पुलिस के मुताबिक मैदान की क्षमता करीब 50,000 है।