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कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ता नौकरियों की मांग लेकर बेंगलुरु के आईटी पार्कों में पहुंचे, शिवकुमार की अपील ठुकराई
कर्नाटक रक्षणा वेदिके के प्रतिनिधिमंडल बागमने टेक पार्क से लेकर केआर पुरम में एचपीई के दफ्तर तक पहुंचे और कंपनियों से पूछा कि उनके यहां कितने कन्नड़भाषी काम करते हैं। राज्य सरकार ने उनसे कंपनियों से दूर रहने को कहा था।

मुख्य बातें
- कर्नाटक रक्षणा वेदिके के प्रतिनिधिमंडल ज्ञापन लेकर बेंगलुरु के कई आईटी दफ्तरों में पहुंचे।
- वे चाहते हैं कि कंपनियां पिछले तीन साल की भर्ती के आंकड़े और कन्नड़ कर्मचारियों का हिस्सा बताएं।
- डी के शिवकुमार ने संगठनों से आईटी-बीटी कंपनियों में सीधे न जाने की अपील की थी।
कर्नाटक रक्षणा वेदिके के कार्यकर्ता बेंगलुरु के आईटी दफ्तरों में पहुंच गए हैं और कंपनियों से सीधा सवाल पूछ रहे हैं: आपके कितने कर्मचारी कन्नड़भाषी हैं? राज्य सरकार की कंपनियों से दूर रहने की अपील को अनसुना करते हुए यह अभियान मंगलवार को भी जारी रहा।
प्रदेश अध्यक्ष टी ए नारायण गौड़ा के नेतृत्व वाले इस संगठन ने निजी कंपनियों में योग्य स्थानीय उम्मीदवारों की निष्पक्ष भर्ती की मांग को लेकर कन्नड़ राज्योत्सव के दिन 1 नवंबर से महीने भर का राज्यव्यापी अभियान शुरू किया है। सोमवार को इसके प्रतिनिधिमंडलों ने सी वी रमन नगर के बागमने टेक पार्क, केआर पुरम के पास बी नारायणपुरा में हेवलेट पैकार्ड एंटरप्राइज़, अली असकर रोड पर सफीना टावर में एग्ज़ीक्यूटिव सेंटर इंडिया और मगडी रोड पर क्वालिटी इवैल्यूएशंस में ज्ञापन सौंपे।

वेदिके क्या जानना चाहता है
ज्ञापनों में हर कंपनी से उसके कुल कर्मचारियों की संख्या, कर्नाटक के कर्मचारियों का हिस्सा, पिछले तीन साल की भर्ती के आंकड़े और भर्ती के मानदंड मांगे गए हैं। इनमें यह भी पूछा गया है कि कन्नड़भाषियों के साथ कथित भेदभाव पर क्या कदम उठाए गए, और स्थानीय युवाओं के लिए ज़्यादा कौशल प्रशिक्षण और इंटर्नशिप की मांग की गई है। वेदिके का कहना है कि जो कंपनियां कर्नाटक के बुनियादी ढांचे और प्रतिभा का लाभ उठाती हैं, उन्हें स्थानीय रोज़गार में योगदान देना चाहिए, और वह किसी एक कंपनी को निशाना बनाने के बजाय जानकारी जुटा रहा है। उसने कहा कि बागमने टेक पार्क में प्रतिक्रिया सकारात्मक रही।
सरकार ने संयम बरतने को कहा
डी के शिवकुमार ने कन्नड़ समर्थक संगठनों से कंपनियों के परिसरों में न जाने की अपील की थी। उन्होंने कहा, “मैं सभी संगठनों से अपील करता हूं कि वे आईटी-बीटी कंपनियों में सीधे न जाएं और मामले को अपने हाथ में न लें।” उन्होंने कहा, “ऐसे मुद्दे बातचीत से और कानून के दायरे में सुलझाए जाने चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार “कन्नड़भाषियों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है”।
वेदिके ने अपील ठुकराकर अभियान जारी रखा है और कहा है कि वह जुटाई गई जानकारी कंपनियों और राज्य सरकार के सामने रखेगा। 25 अक्टूबर को शिवकुमार ने चेतावनी दी थी कि अगर निजी संस्थान जानबूझकर कन्नड़भाषियों को किनारे करते पाए गए तो सरकार कार्रवाई करेगी।
यह अभियान 2024 की उस लड़ाई को फिर से जगा रहा है, जब निजी क्षेत्र की नौकरियों में स्थानीय लोगों को आरक्षण देने वाला कर्नाटक का प्रस्तावित कानून उद्योग जगत के कड़े विरोध के बाद रोक दिया गया था। किसी कंपनी ने इन दौरों पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है।