राज्यमध्य प्रदेश
कूनो के चीते KNG-22 को गोली मारने के आरोप में दो भाई गिरफ्तार, लाइसेंसी बंदूक बरामद
मुरैना के भगवान सिंह और प्रीतम सिंह को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत जेल भेजा गया है। जांचकर्ताओं का कहना है कि 19 महीने के नर चीते की हत्या में किसी शिकारी गिरोह का हाथ नहीं दिखता।

मुख्य बातें
- मुरैना के दो भाइयों को सोमवार को विजयपुर की अदालत ने जेल भेजा।
- उन्होंने लाइसेंसी दोनाली बंदूक से चीते पर गोली चलाना कबूल किया है।
- निगरानी में लापरवाही पर दो रेंजरों समेत चार वनकर्मी निलंबित किए गए हैं।
कूनो नेशनल पार्क के 19 महीने के नर चीते KNG-22 को गोली मारकर मारने के आरोप में मुरैना के दो भाइयों को गिरफ्तार किया गया है। अफ्रीका से लाए गए चीतों में से किसी को बंदूक से मारे जाने का यह पहला ज्ञात मामला है।
मध्य प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स ने 31 अक्टूबर को भगवान सिंह को गिरफ्तार किया। उसके बयान पर और मुरैना पुलिस की मदद से उसके भाई प्रीतम सिंह को पकड़ा गया। सोमवार को दोनों को श्योपुर जिले की विजयपुर अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें जेल भेज दिया। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 9 और 51 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
एसटीएफ के मुताबिक दोनों विजयपुर इलाके के नितनवास गांव के पास जंगल में शिकार कर रहे थे, तभी उन्हें यह युवा नर चीता दिखा और उन्होंने उसे गोली मार दी। भगवान सिंह ने जांचकर्ताओं को बताया कि चीता सामने आया तो उसने अपनी लाइसेंसी बंदूक से उस पर गोली चला दी। यह लाइसेंसी दोनाली बंदूक मुरैना वन मंडल के जंगल से बरामद हुई, जहां आरोपी टीम को लेकर गए।

पांच छर्रे
दक्षिण अफ्रीकी चीता निरवा का शावक KNG-22, 24 अक्टूबर को गोली लगने के बाद मुरैना-श्योपुर सीमा के पास बुरी तरह घायल मिला था। उसे जबलपुर के पशु चिकित्सा केंद्र ले जाया गया, जहां सर्जरी कर उसके शरीर से पांच छर्रे निकाले गए। 27 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई।
केंद्र ने घटनास्थल की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय टीम मुरैना भेजी और राज्य सरकार ने चार सदस्यों वाली एसटीएफ बनाई। जांचकर्ताओं ने चीते के रेडियो कॉलर के सिग्नल का पीछा किया और पहली गिरफ्तारी से पहले आसपास के गांवों में छापे मारे।
अधिकारियों का कहना है कि यह हत्या तस्करों का काम नहीं लगती। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “शुरुआती जांच के आधार पर हमें नहीं लगता कि यह किसी संगठित शिकारी नेटवर्क का मामला है। लेकिन हम इस संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे।” उन्होंने कहा, “हमारी जांच जारी है और हम जल्द ही अंतिम रिपोर्ट सौंपेंगे।”
ग्वालियर के मुख्य वन संरक्षक ने निगरानी और सुरक्षा में लापरवाही के लिए दो रेंजर, एक डिप्टी रेंजर और एक बीट गार्ड समेत चार वनकर्मियों को निलंबित किया है।