राज्यआंध्र प्रदेश
चक्रवात मुरासु ओंगोल के पास आंध्र तट पार कर गया, 198 मिमी बारिश, कई जगह पेड़ गिरे
गंभीर चक्रवाती तूफान ने मंगलवार सुबह 3:30 से 5:30 बजे के बीच दक्षिण आंध्र प्रदेश का तट पार किया। सबसे ज्यादा बारिश प्रकाशम और बापटला में हुई, और अधिकारियों का कहना है कि इसका असर अगले 24 घंटे तक रह सकता है।

मुख्य बातें
- आईएमडी के अनुसार मुरासु ने सुबह 3:30 से 5:30 बजे के बीच ओंगोल के पास तट पार किया।
- प्रकाशम के नागुलुप्पलपाडु में सुबह 6 बजे तक 24 घंटे में 198 मिमी बारिश दर्ज हुई।
- सुबह तक किसी की मौत की खबर नहीं, लेकिन प्रकाशम में कई सड़कों पर पेड़ गिरे।
गंभीर चक्रवाती तूफान मुरासु ने ओंगोल के पास दक्षिण आंध्र प्रदेश का तट पार कर लिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मंगलवार सुबह यह जानकारी दी। लैंडफॉल रात करीब 1 बजे शुरू हुआ था और तड़के तक चलता रहा। तूफान उत्तर-उत्तरपश्चिम की ओर बढ़ते हुए नेल्लोर और नरसापुर के बीच सुबह 3:30 से 5:30 बजे के बीच तट पार कर गया। उस समय हवा की रफ्तार 100 से 110 किमी प्रति घंटा थी, जो झोंकों में 120 किमी तक पहुंची।
सुबह होते होते तूफान जमीन पर आ चुका था और पश्चिम-उत्तरपश्चिम की ओर बढ़ते हुए इसके धीरे धीरे कमजोर पड़ने का अनुमान है। आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एपीएसडीएमए) के अधिकारियों ने चेताया कि इसका असर अगले 24 घंटे तक रह सकता है, क्योंकि तटीय जिलों में बारिश अब भी जारी है।
कहां कितनी बारिश
सबसे ज्यादा बारिश लैंडफॉल वाली जगह के दोनों ओर के जिलों, प्रकाशम और बापटला में हुई। सुबह 6 बजे तक के 24 घंटों के एपीएसडीएमए आंकड़ों में नागुलुप्पलपाडु 198 मिमी के साथ सबसे ऊपर है। इसके बाद कोथापट्टनम है, वही तटीय गांव जहां तूफान की आंख पहुंची थी, जहां 182 मिमी बारिश हुई। बापटला, चीराला और ओंगोल शहर में भी 100 मिमी से ज्यादा पानी बरसा।
उत्तर में पश्चिम गोदावरी के मोगलतुरु और कोनसीमा के मलिकिपुरम में भी 90 मिमी से ज्यादा बारिश हुई, जिससे पता चलता है कि तूफान के बारिश वाले बादल कितनी दूर तक फैले थे। पश्चिम गोदावरी, एलुरु, कृष्णा, एनटीआर, गुंटूर, बापटला, पलनाडु, मार्कापुरम, प्रकाशम और नेल्लोर में चेतावनी जारी है।
पेड़ गिरे, सड़कें बंद
अब तक जो नुकसान दिखा है, वह ज्यादातर गिरे हुए पेड़ और बंद सड़कें हैं। प्रकाशम में कोंडापि-टंगुटूरु सड़क और निडमानुरु-उप्पलपाडु व ओंगोल-निडमानुरु सड़कों पर बड़े पेड़ गिर गए। बापटला जिले में चीराला और उसके आसपास भी पेड़ उखड़ गए। खबर है कि कोल्लम-विशाखापत्तनम एक्सप्रेस को सिंगरायकोंडा स्टेशन पर रोक दिया गया।
सुबह तक किसी की मौत की खबर नहीं थी। यह मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के लिए कुछ राहत की बात होगी, जिन्होंने अधिकारियों से यह पक्का करने को कहा था कि “जान का कोई नुकसान न हो”। कुछ ही दिन पहले राज्य से टकराए चक्रवात अर्नब में हुई मौतें उनके सामने थीं। उन्होंने सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों के लोगों से तूफान पूरी तरह गुजरने तक घरों में रहने को कहा और बिजली कर्मचारियों को जल्दी आपूर्ति बहाल करने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया।
आगे क्या
मछुआरों से बुधवार सुबह तक समुद्र में न जाने को कहा गया है। लगातार बारिश के कारण एलुरु जिले ने मंगलवार को स्कूलों, कॉलेजों और आंगनवाड़ियों में छुट्टी घोषित की, जबकि कई जिलों में स्कूल पहले से बंद हैं। तूफान आने से पहले आंध्र प्रदेश और ओडिशा में 2 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया।
लोगों से जलभराव वाली सड़कों से बचने और गिरे हुए खंभों व पेड़ों से दूर रहने को कहा गया है। राज्य की हेल्पलाइन 9552300009 और मन मित्र व्हाट्सऐप सेवा पर मदद मांगी जा सकती है।