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जीएसटी ₹2.31 लाख करोड़: अक्टूबर में 22.9% की छलांग क्यों, और इसमें आयात का हिस्सा कितना

अक्टूबर में सकल जीएसटी संग्रह महीनों की सबसे तेज़ रफ्तार से बढ़ा, और आयातित सामान पर टैक्स 42% उछला। हर महीने का यह आंकड़ा असल में क्या बताता है, पिछले साल का कमज़ोर अक्टूबर इस बढ़त को बड़ा क्यों दिखाता है, और कमज़ोर रुपया इस कहानी का हिस्सा कैसे है।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित

संक्षेप में

अक्टूबर का सकल जीएसटी ₹2,31,290 करोड़ रहा, जो एक साल पहले से 22.9% ज़्यादा है। इसके पीछे तीन बातें हैं। घरेलू संग्रह 15.8% बढ़ा, लेकिन इसकी तुलना अक्टूबर 2025 से है, जब 22 सितंबर 2025 की जीएसटी दर कटौती के इंतज़ार में खरीदारी टलने से वृद्धि उस साल की सबसे कमज़ोर रही थी। आयात पर टैक्स 42.2% बढ़कर ₹72,246 करोड़ हो गया, जो महीनों से घरेलू टैक्स से कहीं आगे चल रहा है, क्योंकि कमज़ोर रुपया और महंगी कमोडिटी बाहर से आने वाली हर चीज़ का रुपये में मूल्य बढ़ा देते हैं। और रिफंड सिर्फ 6.5% बढ़े, इसलिए शुद्ध राजस्व और तेज़ी से, 25.6% बढ़कर ₹2,03,356 करोड़ पहुंचा।

हर महीने का जीएसटी आंकड़ा क्या मापता है?

उस महीने कारोबारियों ने सरकार को जो टैक्स चुकाया, जो ज़्यादातर पिछले महीने की बिक्री पर होता है। जो व्यापारी सितंबर में माल बेचता है, वह अक्टूबर में रिटर्न भरकर टैक्स चुकाता है, इसलिए अक्टूबर का संग्रह काफी हद तक सितंबर के कारोबार की तस्वीर है। इस साल यह बात अहम है। दिवाली 8 नवंबर को है, इसलिए त्योहारी खरीदारी का बड़ा हिस्सा अक्टूबर में हुआ, और उसका असर मुख्य रूप से नवंबर के आंकड़ों में दिखेगा, इनमें नहीं।

सुर्खियों वाला आंकड़ा, यानी सकल जीएसटी, तीन हिस्सों को जोड़ता है: किसी राज्य के भीतर बिक्री पर केंद्रीय जीएसटी और राज्य जीएसटी, और राज्यों के बीच बिक्री व आयात पर एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी)। अक्टूबर में केंद्रीय जीएसटी से ₹42,935 करोड़, राज्य जीएसटी से ₹51,340 करोड़ और आईजीएसटी से ₹1,37,015 करोड़ आए। इस आईजीएसटी में ₹72,246 करोड़ विदेश से आए सामान पर चुकाए गए।

अक्टूबर में इतनी तेज़ बढ़त क्यों?

कुछ हद तक इसलिए कि अक्टूबर 2025 असामान्य रूप से कमज़ोर था। जीएसटी 2.0 नाम से जानी गई दर कटौती 22 सितंबर 2025 से लागू हुई थी। कम दरों का फायदा लेने के लिए पिछले साल सितंबर की शुरुआत में बहुत से खरीदारों और कारोबारों ने खरीद रोक ली थी, खासकर कारों और दूसरे महंगे सामान की, इसलिए उस महीने के सिर्फ आखिरी आठ दिन नई दरों पर बिल हुए।

नतीजा यह हुआ कि अक्टूबर 2025 में सकल जीएसटी सिर्फ 4.6% बढ़ा, जो उस वित्त वर्ष में सबसे धीमा था, और 36 में से 20 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में संग्रह घटा। केपीएमजी के पार्टनर अभिषेक जैन ने तब कहा था कि ऊंची कीमत वाले क्षेत्रों में टली खरीद की वजह से वह महीना असलियत से कमज़ोर दिखा।

उस कमज़ोर आधार के मुकाबले इस साल का आंकड़ा खास तौर पर मज़बूत दिखता है। महाराष्ट्र का संग्रह, जो पिछले अक्टूबर में 3% बढ़ा था, इस बार 13% बढ़ा। हरियाणा शून्य वृद्धि से 17% पर पहुंच गया।

आयात पर जीएसटी इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ रहा है?

क्योंकि भारत जो कुछ भी बाहर से खरीदता है, वह अब रुपये में महंगा पड़ता है। आयात पर जीएसटी 42.2% बढ़कर ₹72,246 करोड़ हो गया, जबकि घरेलू जीएसटी 15.8% बढ़ा। यह एक महीने की बात नहीं है। सितंबर में आयात पर जीएसटी करीब 26% बढ़ा था, जबकि घरेलू जीएसटी करीब 10%।

आयात पर जीएसटी सामान के मूल्य के प्रतिशत के रूप में लगता है। रुपया कमज़ोर होता है तो वही डॉलर कीमत ज़्यादा रुपयों में बदलती है, और टैक्स भी उसी हिसाब से बढ़ता है। ग्रांट थॉर्नटन भारत के मनोज मिश्रा ने सितंबर के आंकड़ों को इसी तरह समझाया था: “रुपये की गिरावट ने डॉलर में तय आयात का रुपये में पहुंच मूल्य बढ़ा दिया है।” उन्होंने कच्चे तेल और कमोडिटी की ऊंची कीमतों और इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, सोने व उर्वरकों के बढ़े आयात की ओर भी इशारा किया। होर्मुज़ जलडमरूमध्य अब भी बंद है और ब्रेंट कच्चा तेल 113 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है, इसलिए कीमतों का यह दबाव कम नहीं हुआ है।

अक्टूबर का जीएसटी, इस साल बनाम पिछले साल

अक्टूबर 2025अक्टूबर 2026बदलाव
सकल जीएसटी
₹1,88,125 करोड़
₹2,31,290 करोड़
22.9% ऊपर
घरेलू जीएसटी
₹1,37,329 करोड़
₹1,59,044 करोड़
15.8% ऊपर
आयात पर जीएसटी
₹50,796 करोड़
₹72,246 करोड़
42.2% ऊपर
रिफंड
करीब ₹26,200 करोड़
₹27,934 करोड़
6.5% ऊपर
शुद्ध जीएसटी
₹1,61,900 करोड़
₹2,03,356 करोड़
25.6% ऊपर

क्या आयात पर ज़्यादा जीएसटी का मतलब सरकार के लिए ज़्यादा पैसा है?

पूरा पैसा सरकार के पास नहीं रहता। जो पंजीकृत कारोबारी माल आने पर आईजीएसटी चुकाता है, वह आम तौर पर उस माल को भारत में बेचते समय इस टैक्स को क्रेडिट के रूप में वापस ले सकता है। यानी आज के आयात जीएसटी का एक हिस्सा उस टैक्स में समायोजित होगा जो वरना बाद में नकद चुकाया जाता। इसीलिए टैक्स विशेषज्ञ आयात के आंकड़े को सावधानी से पढ़ते हैं। प्राइस वॉटरहाउस एंड कंपनी के प्रतीक जैन ने सितंबर में कहा था कि सुर्खियों वाली बढ़त का बड़ा हिस्सा घरेलू गतिविधि के बजाय आयात से आ रहा है।

सकल और शुद्ध जीएसटी में क्या फर्क है?

शुद्ध जीएसटी वह है जो रिफंड के बाद बचता है। रिफंड मुख्य रूप से निर्यातकों को मिलते हैं, जिन्हें विदेश में बेचे गए सामान पर जीएसटी नहीं देना होता, और उन कारोबारों को, जो अपने कच्चे माल पर अपनी बिक्री से ऊंची दर चुकाते हैं। अक्टूबर में रिफंड सिर्फ 6.5% बढ़कर ₹27,934 करोड़ रहे, जो संग्रह से काफी धीमा है। इसीलिए शुद्ध राजस्व 25.6% बढ़कर ₹2,03,356 करोड़ हुआ, सकल राजस्व से भी तेज़। आयात से जुड़ा शुद्ध जीएसटी 56.2% बढ़ा।

पूरे साल के लिए इसका क्या मतलब है?

केंद्र और राज्य पिछले साल से आगे चल रहे हैं। अप्रैल से अक्टूबर तक सकल संग्रह ₹14,77,569 करोड़ पहुंचा, जो 13.2% ज़्यादा है, और शुद्ध राजस्व ₹12,69,486 करोड़, जो 12.6% ज़्यादा है। अक्टूबर की छलांग से दोनों को साल के बाकी हिस्से का खर्च तय करने में मदद मिलेगी।

कठिन सवाल यह है कि इसमें से कितना टिकेगा। पिछले अक्टूबर जैसा कमज़ोर आधार नवंबर में नहीं होगा, और आयात से मिला सहारा, जैसा मिश्रा ने कहा, कमोडिटी कीमतों, रुपये और आयात की मात्रा पर निर्भर है। 1 दिसंबर को आने वाले नवंबर के आंकड़े पहली कसौटी होंगे कि अक्टूबर की बढ़त में असली मांग का हिस्सा कितना था।