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हाथ में तोता लेकर राहुल बोले, 'मोदी जी की जान ज्ञानेश कुमार में है'; खड़गे का एलान, सीईसी के हटने तक लड़ेंगे
विपक्ष का मार्च रामलीला मैदान पहुंचते ही कांग्रेस के दो सबसे बड़े नेता मंच पर आए। एक ने लोककथा और तोते के सहारे वार किया, दूसरे ने कहा कि 'चोरी की सरकार' नहीं चलने देंगे।
मुख्य बातें
- राहुल गांधी बोले, मोदी जी की जान ज्ञानेश कुमार में है, जैसे कहानी में राजा की जान तोते में थी।
- मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, सीईसी के हटने तक लड़ते रहेंगे।
- राहुल ने आरोप लगाया कि भाजपा ने कनॉट प्लेस की दुकानें जबरन बंद करवाईं।
रविवार दोपहर रामलीला मैदान में राहुल गांधी ने एक पुरानी लोककथा का सहारा लिया। हाथ में तोता लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने इंडिया गठबंधन की रैली में कहा कि प्रधानमंत्री की जान मुख्य चुनाव आयुक्त में है।
उन्होंने कहा, “राजा की जान तोते में थी और मोदी जी की जान ज्ञानेश कुमार में है।” यह उस कहानी की ओर इशारा था जिसमें राजा की जान एक पक्षी में छिपी होती है। इस तंज में मंच से उठी पूरे दिन की मांग समाई थी: चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में मतदाता सूचियों से नाम कटने के मामले में ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें।
मिंटो ब्रिज से चला विपक्ष का मार्च मध्य दिल्ली से धीरे धीरे गुजरता हुआ करीब 3 बजे मैदान पहुंचा। खुली बस में राहुल के साथ अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव और फारूक अब्दुल्ला सवार थे। प्रियंका गांधी, सुप्रिया सुले और के सी वेणुगोपाल भी रैली में मौजूद नेताओं में थे।
‘चोरी की सरकार’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने यही मांग और तीखे शब्दों में रखी। उन्होंने कहा, “चोरी की सरकार नहीं चलने देंगे।” उन्होंने नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर सीईसी को बचाने का आरोप लगाया।
खड़गे ने कहा, “नरेंद्र मोदी-शाह ने जिस तरह से जनता का वोट छीनने की कोशिश की, आज हम उसके खिलाफ यहां एकजुट हुए हैं।” उन्होंने कहा, “ज्ञानेश कुमार को जाना होगा और जब तक उसे नहीं हटाया जाएगा, तब तक हम लड़ते रहेंगे।”
उन्होंने कहा कि सरकार ने युवाओं, महिलाओं और दलितों का वोट छीनने की कोशिश की है। बताया गया कि उन्होंने भीड़ से यह भी कहा कि सीईसी पाताल में भी छिप जाएं तो विपक्ष उन्हें ढूंढ निकालेगा। उन्होंने लोकतंत्र बचाने के लिए मोदी को हटाने के आह्वान के साथ भाषण खत्म किया।
कनॉट प्लेस में गिरे शटर
राहुल ने दिल्ली के व्यापारियों की बात भी उठाई, जिनसे उन्होंने रैली से पहले भीड़ का स्वागत करने की अपील की थी। उन्होंने कहा, “हमने लोगों से कहा कि आप महारैली के लिए आएं, तो खरीदारी करें। मगर कनॉट प्लेस में आते हुए हमें पता लगा कि भाजपा ने दुकानें जबरदस्ती बंद करवा दी।” उन्होंने पूछा कि व्यापारियों के नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा।
भाजपा इस रैली को अराजकता फैलाने की कोशिश बता चुकी है, और उसके नेता पूरे दिन कांग्रेस को याद दिलाते रहे कि 1 नवंबर 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी है। चुनाव आयोग राजनीतिक पक्षपात के आरोपों से इनकार करता रहा है और देर दोपहर तक उसने इन भाषणों पर कोई जवाब नहीं दिया था।
दिल्ली पुलिस ने आयोजकों से कार्यक्रम शाम 5 बजे तक खत्म करने को कहा है।