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रायहमारा मत

दिल्ली ने आखिरकार स्मॉग से पहले कदम उठाया। अब पाबंदियां निष्पक्ष हों, लागू हों और बसें साथ दें

आज से बाहर की पुरानी गाड़ियों की एंट्री बंद है, दफ्तर आधी हाज़िरी पर चल रहे हैं और पार्किंग दोगुनी महंगी है। कैलेंडर देखकर कदम उठाना सही सोच है। लेकिन जो रोक धुएं की जगह नंबर प्लेट देखे, और यात्रियों से कार छोड़ने को कहे पर विकल्प न बताए, वह पूरी सर्दी नहीं टिकेगी।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित
दिल्ली सीमा पर दिल्ली-गुड़गांव टोल प्लाज़ा (फ़ाइल फ़ोटो)
दिल्ली सीमा पर दिल्ली-गुड़गांव टोल प्लाज़ा (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: User:GurgaonShoppingMalls.com / Wikimedia Commons, CC BY-SA 2.0

ग्यारह दिन पहले इसी अखबार ने लिखा था कि दिल्ली की खराब हवा हर अक्टूबर तय समय पर आती है, और सरकार को अलार्म बजने का इंतज़ार करने के बजाय कैलेंडर देखकर कदम उठाना चाहिए। आधी रात से उसने यही किया है। दिल्ली के बाहर पंजीकृत जो गाड़ियां बीएस-VI उत्सर्जन मानक पर खरी नहीं उतरतीं, उन पर 31 जनवरी तक रोक है। दफ्तरों से आधे कर्मचारियों को घर से काम कराने को कहा गया है, धूल उड़ाने वाला निर्माण रुक गया है, और अधिकृत पार्किंग स्थलों पर शुल्क दोगुना हो गया है, मेट्रो स्टेशनों को छोड़कर।

इसका श्रेय बनता है। बरसों से शहर की प्रतिक्रिया एक झटके जैसी रही है, जो धुंध जम जाने के बाद ही शुरू होती थी। अक्टूबर में घोषित, तय तारीखों और निगरानी कैमरों वाला पैकेज एक अलग और बेहतर आदत है।

लेकिन जिस योजना को तीन महीने की असुविधा झेलनी है, उसका निष्पक्ष और व्यावहारिक होना भी ज़रूरी है। दो अहम मामलों में यह योजना अभी ऐसी नहीं है।

नंबर प्लेट देखने वाली रोक

गाड़ियों वाला नियम सिर्फ दिल्ली के बाहर पंजीकृत वाहनों पर लागू है। गुरुग्राम या गाज़ियाबाद की बीएस-IV कार दिल्ली में नहीं आ सकती, पर दिल्ली में पंजीकृत बीएस-IV कार उसके बगल से निकल सकती है। दोनों का धुआं एक जैसा है। हवा पंजीकरण प्रमाणपत्र पर लिखा पता नहीं देखती।

इसका बोझ उन लोगों पर भारी पड़ता है जो आसपास के शहरों में रहते हैं और राजधानी में काम करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक एनसीआर में 10 लाख से ज़्यादा गाड़ियां बीएस-VI मानक से नीचे हैं।

इसके पक्ष में भी तर्क है। दिल्ली अपने वाहनों पर दूसरे तरीकों से नियंत्रण रख सकती है, और सीमा पर गाड़ियां रोकना उसके बस में है, हर गली में नहीं। ट्रांसपोर्टरों को पहले से सूचना भी थी: एक साल पहले सरकार ने बाहर की बीएस-IV मालवाहक गाड़ियों को 31 अक्टूबर 2026 तक की ही अस्थायी छूट दी थी। लेकिन अगर मकसद बाहर वालों को कम करना नहीं, हवा साफ करना है, तो कसौटी उत्सर्जन मानक होनी चाहिए, जो दिल्ली की सड़कों पर चलने वाली हर गाड़ी पर लागू हो।

कार की जगह क्या?

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लोगों से “निजी वाहनों का गैर-ज़रूरी इस्तेमाल घटाने और सार्वजनिक परिवहन व कारपूलिंग को प्राथमिकता देने” की अपील की है। यह वाजिब सलाह है। पर यह तभी काम करती है जब सार्वजनिक परिवहन मौजूद हो। सर्दियों की योजना में ज़्यादा इलेक्ट्रिक बसों, बेहतर मेट्रो कनेक्टिविटी और लास्ट-माइल परिवहन की बात है, लेकिन कोई संख्या, रूट या तारीख नहीं दी गई है।

फरीदाबाद के जिस यात्री की कार पर अब रोक है, उसे जानना चाहिए कि कौन-सी बस, कहां से और कितनी देर में मिलेगी। सीमा से सबसे पास के मेट्रो स्टेशन तक फीडर बसें, इसी हफ्ते से, नियम का पालन कराने में किसी भी संख्या के ई-चालान से ज़्यादा कारगर होंगी।

दफ्तरों वाले नियम पर भी यही सवाल है। आधी हाज़िरी का आदेश देना आसान है, जांचना मुश्किल, खासकर निजी कंपनियों में। जब तक सरकार यह न बताए कि निगरानी कैसे होगी, यह सरकारी इमारतों में टिकेगा और बाकी जगह फीका पड़ जाएगा।

सरकार क्या करे

पहला, इसी अवधि के लिए उत्सर्जन की कसौटी दिल्ली में पंजीकृत गाड़ियों पर भी लागू करे, ताकि नियम प्रदूषण के बारे में हो, गाड़ी कहां से आई इसके बारे में नहीं।

दूसरा, इसी हफ्ते बताए कि कितनी अतिरिक्त बसें चलेंगी, एनसीआर से किन रूटों पर और कितने अंतराल पर, और पड़ोसी राज्यों से अपनी तरफ से इतनी ही बसें चलाने को कहे।

तीसरा, हर महीने एक सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करे कि क्या लागू हुआ: कितनी गाड़ियां रोकी गईं और कितने जुर्माने हुए, कितने निर्माण स्थल सील हुए, कितने दफ्तरों की जांच हुई, और साथ में शहर की वायु गुणवत्ता के आंकड़े। पाबंदियां काम कर रही हैं तो आंकड़े दिखाएंगे। नहीं कर रहीं, तो अगले साल योजना दोहराने से पहले दिल्ली को यह पता होना चाहिए।

जल्दी कदम उठाना मुश्किल हिस्सा था। नियमों को निष्पक्ष बनाना, और लोगों को उनका पालन करने का रास्ता देना, यही तय करेगा कि वे जनवरी तक टिकते हैं या नहीं।

इस राय के पीछे की रिपोर्टिंग

  • 31 जनवरीतारीख जब तक दिल्ली के बाहर की गैर-बीएस-VI गाड़ियों पर रोक है और दफ्तर 50% हाज़िरी पर चलेंगे
  • 10 लाख+एनसीआर में बीएस-VI मानक से नीचे की अनुमानित गाड़ियां
  • 2 गुना28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर शुल्क, मेट्रो पार्किंग को छूट