भारतअदालतें
दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों की फास्ट ट्रैक अदालतें 2031 तक जारी रहेंगी, संख्या बढ़कर 850 होगी
केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को फास्ट ट्रैक विशेष अदालत योजना को ₹3,788.04 करोड़ की लागत से पांच साल और बढ़ाने को मंजूरी दी। जिन जिलों में मामले ज्यादा लंबित हैं, वहां 71 नई अदालतें खुलेंगी।

मुख्य बातें
- फास्ट ट्रैक विशेष अदालत योजना अब 31 मार्च 2031 तक चलेगी।
- अदालतों की संख्या 779 से बढ़कर 850 होगी, नई अदालतें ज्यादा लंबित मामलों वाले जिलों में खुलेंगी।
- पांच साल की योजना पर ₹3,788.04 करोड़ खर्च होंगे, जिसमें ₹2,353.15 करोड़ केंद्र निर्भया फंड से देगा।
केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को फास्ट ट्रैक विशेष अदालत योजना को पांच साल के लिए बढ़ा दिया। दुष्कर्म और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मुकदमे सुनने वाली ये अदालतें अब 31 मार्च 2031 तक चलेंगी।
कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की घोषणा की। योजना का दायरा भी बढ़ेगा। सरकार काम कर रही अदालतों की संख्या 779 से बढ़ाकर 850 करेगी और नई अदालतें उन जिलों में खुलेंगी जहां दुष्कर्म और पॉक्सो के मामले बड़ी संख्या में लंबित हैं। विशेष पॉक्सो अदालतों समेत इस योजना पर अप्रैल 2026 से पांच साल में ₹3,788.04 करोड़ खर्च होंगे।
वैष्णव ने कहा कि यह विस्तार “दुष्कर्म और बाल यौन शोषण के मामलों में तेज न्याय सुनिश्चित करने” के लिए है। उन्होंने कहा, “सरकार किसी भी सामाजिक चुनौती या कमजोरी से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है।”
खर्च कौन उठाएगा, हर अदालत को क्या मिलेगा
केंद्र निर्भया फंड से ₹2,353.15 करोड़ देगा, जबकि राज्य और केंद्रशासित प्रदेश केंद्र प्रायोजित योजनाओं के सामान्य फॉर्मूले के तहत ₹1,434.89 करोड़ का हिस्सा उठाएंगे।
हर अदालत में एक न्यायिक अधिकारी, एक विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक कर्मचारी होते हैं। योजना से कमजोर गवाहों के बयान दर्ज करने के केंद्र और बच्चों के अनुकूल अदालती सुविधाएं भी बनाई जाती हैं।
फास्ट ट्रैक सुनवाई के छह साल
यह योजना 2 अक्टूबर 2019 को आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 और ऐसे मुकदमों में तेजी लाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद शुरू हुई थी। अभी यह 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही है और शुरुआत से अब तक इन अदालतों ने दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के तहत 4.02 लाख से ज्यादा मामले निपटाए हैं।
न्याय विभाग एक ऑनलाइन डैशबोर्ड, नियमित समीक्षा और हाई कोर्ट व राज्य सरकारों से सलाह-मशविरे के जरिए हर अदालत के कामकाज पर नजर रखेगा।
एक नजर में योजना
- 850 अदालतों का लक्ष्यअभी 779 अदालतें काम कर रही हैं।
- ₹3,788.04 करोड़ पांच साल का खर्चइसमें ₹2,353.15 करोड़ निर्भया फंड से।
- 4.02 लाख निपटाए गए मामलेअक्टूबर 2019 से दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों में फैसले।
इसी कैबिनेट बैठक में ऊर्जा भंडारण, महत्वपूर्ण खनिजों और सशस्त्र बलों से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।