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चिदंबरम नटराज मंदिर पांच सदस्यीय बोर्ड को सौंपने के मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
पोदु दीक्षितारों की याचिका पर आए अंतरिम आदेश से हाईकोर्ट का वह निर्देश रुक गया है, जिसमें सेवानिवृत्त जजों की अगुवाई वाले बोर्ड को मंदिर का प्रबंधन सौंपा गया था।

मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने चिदंबरम नटराज मंदिर के लिए बोर्ड बनाने वाले मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी।
- हाईकोर्ट ने 30 अक्टूबर को एक सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय प्रबंधन बोर्ड बनाया था।
- पोदु दीक्षितारों की दलील थी कि यह आदेश मंदिर के प्रबंधन के उनके अनुच्छेद 26 के अधिकार का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें चिदंबरम के नटराज मंदिर, यानी श्री सभानायगर मंदिर, का प्रबंधन सेवानिवृत्त जजों और अधिकारियों के एक बोर्ड को सौंपा गया था।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने यह अंतरिम आदेश पोदु दीक्षितारों की याचिका पर दिया। ये वंशानुगत पुजारी लंबे समय से मंदिर चलाते आए हैं। उनकी दलील थी कि हाईकोर्ट का निर्देश संविधान के अनुच्छेद 26 के तहत उनके अधिकार में दखल है। यह अनुच्छेद धार्मिक संप्रदायों को धर्म से जुड़े मामलों में अपना प्रबंधन खुद करने का अधिकार देता है।
हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया था
30 अक्टूबर को जस्टिस जी जयचंद्रन और जस्टिस ई मनोहरन की खंडपीठ ने मंदिर के कामकाज से जुड़ी कई रिट याचिकाओं का निपटारा किया था। कथित कुप्रबंधन से निपटने के लिए न्यायिक दखल को जरूरी बताते हुए पीठ ने पांच सदस्यीय प्रबंधन बोर्ड बनाया, जिसे “बुराई दूर होने तक” मंदिर चलाना था।
बोर्ड के अध्यक्ष मद्रास हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस वी भारतीदासन होते, सह-अध्यक्ष सेवानिवृत्त जज जस्टिस आर सुरेश कुमार और सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सी राजेंद्रन। पोदु दीक्षितारों और राज्य के हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआर एंड सीई) विभाग के सचिव पदेन सदस्य होते।
हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया था कि रोजाना की पूजा और समय-समय पर होने वाले उत्सव स्थापित परंपराओं के मुताबिक केवल पोदु दीक्षितारों के अधिकार में रहेंगे।
आगे क्या
बुधवार की रोक के बाद बोर्ड फिलहाल कार्यभार नहीं संभाल सकेगा और मंदिर का प्रबंधन हाईकोर्ट के फैसले से पहले जैसा ही रहेगा। अगली सुनवाई की तारीख अभी सामने नहीं आई है।