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'एक और जुमला': जयराम रमेश बोले, वीबी-जी राम जी शिकायत नियमों से मसौदे के प्रावधान गायब
कांग्रेस नेता ने ग्रामीण मजदूरों के लिए उन सुरक्षा प्रावधानों की सूची गिनाई, जो उनके मुताबिक मई के मसौदे और सोमवार को अधिसूचित नियमों के बीच हटा दिए गए।

मुख्य बातें
- जयराम रमेश ने बुधवार को नए शिकायत नियमों को "एक और जुमला" बताया।
- उनके मुताबिक मसौदे से समय-सीमा चूकने पर दंड और एफआईआर का प्रावधान हटा दिया गया।
- ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 2 नवंबर को नियम अधिसूचित किए थे।
कांग्रेस ने बुधवार को केंद्र पर ग्रामीण मजदूरों की शिकायत व्यवस्था को खोखला करने का आरोप लगाया। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने वीबी-जी राम जी कानून के तहत बने नए शिकायत नियमों को “एक और जुमला” करार दिया।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 2 नवंबर को शिकायत निवारण नियम अधिसूचित किए थे। पार्टी में संचार विभाग के प्रभारी रमेश ने एक्स पर लिखा कि अंतिम नियमों से मई में प्रकाशित मसौदे के कई वादे चुपचाप हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मजदूरों के अधिकार “कागज पर/क्लाउड में ही रहेंगे।”
उनके मुताबिक क्या गायब हुआ
मसौदे में कहा गया था कि सात कार्यदिवसों में शिकायत का निपटारा न करना कानून का उल्लंघन माना जाएगा और इस पर “धारा 27 के तहत कार्रवाई” होगी। रमेश ने कहा कि यह दंड प्रावधान हटा दिया गया, हालांकि समय-सीमाएं बनी हुई हैं। उनके मुताबिक वह प्रावधान भी नहीं रहा, जिसमें जिला कार्यक्रम समन्वयक से कहा गया था कि वित्तीय अनियमितता के प्रथम दृष्टया सबूत मिलने पर एफआईआर दर्ज कराना सुनिश्चित करें।
रमेश के अनुसार मसौदे के कई और प्रावधान भी काटे गए: मध्यवर्ती और जिला पंचायत बैठकों में शिकायतों की समीक्षा, शिकायतें लेने के लिए हफ्ते में एक तय दिन, हर ब्लॉक और जिले में शिकायत डेस्क, और राज्य सरकार को तिमाही रिपोर्ट। उन्होंने कहा कि अंतिम नियम अधिकारियों को रिकॉर्ड जांचने की छूट देते हैं, पर “भौतिक सत्यापन की स्पष्ट रूप से मांग नहीं करते।”
15 दिन बाद शिकायत को ऊपर भेजना अब भी अनिवार्य है, लेकिन अब स्पष्ट रूप से स्वचालित नहीं है। शिकायत तंत्र में अब सिर्फ ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर का नाम है, राज्य स्तर हटा दिया गया है, हालांकि दूसरे स्तर तय किए जा सकते हैं। मसौदे में अपील के लिए 45 दिन और निपटारे के लिए 30 दिन की सीमा थी; उसकी जगह अब “कानून की अनुसूची I” का हवाला है, और नियम “केंद्र सरकार द्वारा तय डिजिटल प्लेटफॉर्म” पर जोर देते हैं।
पुरानी लड़ाई
रमेश ने यह भी कहा कि लाखों मजदूर नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम पर हाजिरी नहीं लगा पा रहे या आधार आधारित भुगतान प्रणाली से मजदूरी नहीं पा रहे। वीबी-जी राम जी कानून ने 1 जुलाई को मनरेगा की जगह ली थी, और कांग्रेस शुरू से इस बदलाव का विरोध कर रही है।
बुधवार शाम तक सरकार ने उनकी आलोचना पर कोई जवाब नहीं दिया था।