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सुप्रीम कोर्ट से के एन नेहरू को राहत नहीं, भ्रष्टाचार एफआईआर का मद्रास हाईकोर्ट का आदेश बरकरार
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने तमिलनाडु के नगर प्रशासन विभाग में कथित नौकरी के बदले पैसे घोटाले पर हाईकोर्ट के निर्देश में दखल से इनकार किया।

मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पूर्व मंत्री के एन नेहरू की याचिका खारिज कर दी।
- उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की एफआईआर दर्ज करने का मद्रास हाईकोर्ट का निर्देश बना रहेगा।
- ईडी ने 2,538 पदों के लिए करीब ₹634 करोड़ की कथित रिश्वत की बात कही थी।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और डीएमके नेता के एन नेहरू की याचिका खारिज कर दी। नेहरू ने नौकरी के बदले पैसे के कथित घोटाले में अपने खिलाफ भ्रष्टाचार की एफआईआर दर्ज करने के मद्रास हाईकोर्ट के निर्देश को चुनौती दी थी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के 20 फरवरी के फैसले या नेहरू की पुनर्विचार याचिका ठुकराने वाले 26 अक्टूबर के आदेश में दखल का कोई आधार नहीं है। तमिलनाडु सरकार ने इस मामले में कैविएट दाखिल की थी।
पीठ ने क्या कहा
पीठ ने एक रियायत दी। उसने कहा कि हाईकोर्ट की टिप्पणियां सिर्फ उसके सामने आई याचिकाओं के निपटारे के लिए थीं और ये नेहरू को उचित चरण पर अपना बचाव रखने से नहीं रोकेंगी। जस्टिस दत्ता इस दलील से सहमत नहीं हुए कि हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री के खिलाफ कोई निष्कर्ष दिया है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने केवल टिप्पणियां दर्ज की थीं।
नेहरू की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने दलील दी कि मामला उनके मुवक्किल के राजनीतिक विरोधियों ने उठाया है, इसलिए अदालत को सावधानी बरतनी चाहिए।
“जब कोई राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी अदालत आता है, तो अदालत को और अधिक सतर्क रहना चाहिए।”
दीवान ने यह भी कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का मनी लॉन्ड्रिंग मामला (ईसीआईआर) जुलाई 2025 में रद्द हो चुका था, इसलिए पीएमएलए की धारा 66(2) के तहत एजेंसी राज्य पुलिस को अपनी सामग्री नहीं दे सकती थी। पीठ इससे सहमत नहीं हुई और याचिका खारिज कर दी।
मामला दिल्ली कैसे पहुंचा
अक्टूबर 2025 में ईडी ने तमिलनाडु के पुलिस प्रमुख को पत्र लिखकर नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग में नौकरी के बदले पैसे के घोटाले का आरोप लगाया था। इसमें 2,538 पदों पर भर्ती और करीब ₹634 करोड़ की कथित रिश्वत की बात थी। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अथिनारायणन और अन्नाद्रमुक के राज्यसभा सदस्य आई एस इनबदुरई की रिट याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने फरवरी में एफआईआर का आदेश दिया। राज्य सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर की, लेकिन सरकार बदलने के बाद उसे वापस ले लिया। फिर नेहरू ने यह कहते हुए अपनी पुनर्विचार याचिका दायर की कि उनकी बात नहीं सुनी गई। हाईकोर्ट ने 26 अक्टूबर को इसे खारिज किया और उसी दिन वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।
सोमवार के आदेश के बाद अब राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी को ईडी की जानकारी पर कार्रवाई करनी होगी।