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राजनीतिअदालत

'हवाई सफर मत कीजिए': महंगे हवाई किराये की याचिका पर जस्टिस विक्रम नाथ का एक पंक्ति का जवाब

सोमवार को एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि किराये 700% तक बढ़ गए हैं और हवाई यात्रा एक आवश्यक सेवा है। जज सीधे अगले मामले पर बढ़ गए।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
नई दिल्ली में भारत का सुप्रीम कोर्ट (फ़ाइल फ़ोटो)
नई दिल्ली में भारत का सुप्रीम कोर्ट (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Pinakpani / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. सोमवार सुबह महंगे हवाई किराये पर एक याचिका का जस्टिस विक्रम नाथ के सामने उल्लेख किया गया।
  2. वकील ने कहा कि किराये 700% तक बढ़ गए हैं और यह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।
  3. जज ने कहा, "हवाई सफर मत कीजिए। अगला मामला।" कोई आदेश पारित नहीं हुआ।

सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) में सोमवार सुबह आसमान छूते हवाई किराये के खिलाफ एक याचिका को सिर्फ एक पंक्ति का जवाब मिला।

जस्टिस विक्रम नाथ के सामने मामले का उल्लेख करते हुए वकील ने कहा कि किराये बेतहाशा बढ़े हैं। “हवाई किराये 700% तक बढ़ गए हैं। यह एक आवश्यक सेवा है। यह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है,” वकील ने पीठ से कहा। अनुच्छेद 14 कानून के सामने बराबरी की संवैधानिक गारंटी देता है।

जज इस दलील से सहमत नहीं हुए। “हवाई सफर मत कीजिए। अगला मामला,” जस्टिस नाथ ने कहा और अदालत आगे बढ़ गई। इस उल्लेख पर कोई आदेश पारित नहीं हुआ।

उल्लेख (मेंशनिंग) दिन की शुरुआत की वह प्रक्रिया है जिसमें वकील किसी मामले को जल्द सूचीबद्ध करने का अनुरोध करते हैं। सोमवार को ही रजिस्ट्री का नया नियम लागू होने का पहला दिन भी था, जिसके तहत वरिष्ठ अधिवक्ता मौखिक उल्लेख नहीं कर सकते और यह काम जूनियर वकीलों पर छोड़ा गया है।

सुबह के बाकी मामले

इसी इमारत में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ के सामने कार्यकर्ता अरुणा रॉय और निखिल डे की याचिका सुनवाई के लिए थी। याचिका पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत उन “व्यापक” निषेधाज्ञा आदेशों को चुनौती देती है, जो लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगाते हैं। जस्टिस बी आर गवई की अगुवाई वाली एक पिछली पीठ ने निर्देश दिया था कि ऐसी सभाओं के आवेदनों पर अधिकारी दाखिल होने के तीन दिन के भीतर फैसला करें।

इसी पीठ के सामने अयोध्या के राम मंदिर को मिले दान की कथित चोरी की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिकाएं भी सूचीबद्ध थीं। दूसरी पीठों के सामने तमिलनाडु के पूर्व मंत्री के एन नेहरू की याचिका थी, जिसमें उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट के उस निर्देश को चुनौती दी है जिसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की एफआईआर दर्ज करने को कहा गया था। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की नीट परीक्षा में बदलाव की मांग वाली याचिकाओं पर भी सुनवाई जारी थी।