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राजनीतिअदालत

निर्मला सप्रे की सदस्यता पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के स्पीकर को दो महीने में फैसला करने को कहा

कांग्रेस नेता उमंग सिंघार की याचिका दो साल से ज़्यादा समय से स्पीकर के पास लंबित है। अदालत ने कहा कि जल्दी न होने के आधार पर दलबदल की याचिका को अनिर्णीत नहीं छोड़ा जा सकता।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
गांधी न्यूज़ ग्राफ़िक: सप्रे की याचिका पर स्पीकर को दो महीने
गांधी न्यूज़ ग्राफ़िक: सप्रे की याचिका पर स्पीकर को दो महीनेGraphic: Gandhi News

मुख्य बातें

  1. सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष से दो महीने में याचिका पर फैसला करने को कहा।
  2. बीना विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ उमंग सिंघार की याचिका जुलाई 2024 से लंबित है।
  3. सप्रे अयोग्य हैं या नहीं, इस पर अदालत ने कोई राय नहीं दी; यह स्पीकर तय करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष से कहा कि वे दो महीने के भीतर तय करें कि बीना की विधायक निर्मला सप्रे को कांग्रेस छोड़ने के आरोप में अयोग्य ठहराया जाए या नहीं।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह आदेश विधानसभा में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की याचिका पर दिया। दलबदल विरोधी कानून के तहत उनकी याचिका जुलाई 2024 से स्पीकर के पास है।

सप्रे 2023 के विधानसभा चुनाव में सागर जिले की बीना सीट से कांग्रेस के टिकट पर पहली बार जीती थीं। सिंघार की याचिका के मुताबिक मई 2024 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान वे मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ भाजपा के मंच पर दिखीं और सत्तारूढ़ दल में शामिल होने की घोषणा की। सप्रे इससे इनकार करती हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कांग्रेस से कभी इस्तीफा नहीं दिया और न ही औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हुईं। वे खुद को अब भी कांग्रेस का सदस्य बताती हैं।

सिंघार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने पीठ से कहा, “यह दसवीं अनुसूची का क्लासिक मामला है।” उन्होंने दलील दी कि विधायक पार्टी छोड़ चुकी हैं और दूसरे दल के लिए प्रचार कर रही हैं, जबकि स्पीकर ने अब तक कार्यवाही शुरू ही नहीं की।

हाई कोर्ट से अलग राय

सिंघार सुप्रीम कोर्ट तब पहुंचे जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने समयबद्ध फैसले का आदेश देने से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट का कहना था कि कोई जल्दी नहीं है, क्योंकि कार्यवाही चल रही है और सप्रे दल बदलने से इनकार करती हैं।

पीठ ने इस रुख से असहमति जताई। उसने कहा कि दसवीं अनुसूची की याचिकाओं का निपटारा जल्द होना चाहिए, भले ही तुरंत कोई जल्दी न हो और विधानसभा का कार्यकाल काफी बचा हो। अदालत ने पाडी कौशिक रेड्डी मामले के अपने फैसले का हवाला दिया, जिसमें उसने तेलंगाना के स्पीकर के लिए दलबदल याचिकाओं पर फैसले की समय-सीमा तय की थी।

सप्रे दलबदल मामला

  1. 2023सप्रे कांग्रेस टिकट पर बीना से जीतीं
  2. मई 2024मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ भाजपा के कार्यक्रम में दिखीं
  3. जुलाई 2024सिंघार ने अयोग्यता याचिका दायर की
  4. 4 नवंबर 2026सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर को दो महीने का समय दिया

अदालत ने सप्रे की अयोग्यता पर कोई फैसला नहीं दिया। यह सवाल स्पीकर के पास ही है, जिन्हें अपने सामने मौजूद तथ्यों के आधार पर इसे तय करना है।