दुनियाअमेरिकी मध्यावधि चुनाव
सीनेट भी डेमोक्रेट्स के हाथ, ट्रंप से छिना कांग्रेस के दोनों सदनों का नियंत्रण
टेक्सस में जेम्स टालारिको और ओहायो में शेरोड ब्राउन की जीत से डेमोक्रेट्स को वे चार सीनेट सीटें मिल गईं जिनकी उन्हें ज़रूरत थी। हाउस पहले ही उनके हाथ जाने का अनुमान था, अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने आख़िरी दो साल डेमोक्रेटिक कांग्रेस के साथ गुज़ारने होंगे।

मुख्य बातें
- अनुमान है कि सीनेट पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होगा, 53-47 का रिपब्लिकन बहुमत ख़त्म।
- पार्टी ने टेक्सस, ओहायो, नॉर्थ कैरोलाइना और साउथ कैरोलाइना की सीटें छीनीं, चारों राज्य 2024 में ट्रंप ने जीते थे।
- ट्रंप ने कहा कि वे ख़ुद मैदान में नहीं थे, वरना जीत जाते।
अमेरिकी टीवी नेटवर्कों के अनुमान के मुताबिक सीनेट पर डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण होगा। भारतीय समय से बुधवार सुबह आए इस अनुमान के साथ, हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स के कुछ घंटे बाद, कांग्रेस के दोनों सदन डेमोक्रेट्स के हाथ चले गए। यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सबसे बड़ी मध्यावधि हार है। जनवरी 2025 से व्हाइट हाउस, हाउस और सीनेट तीनों रिपब्लिकन के पास थे।
मंगलवार के मतदान से पहले सीनेट में रिपब्लिकन के पास 53-47 का बहुमत था। डेमोक्रेट्स को चार सीटों की शुद्ध बढ़त चाहिए थी और ये सीटें उन्हें उन राज्यों में मिलीं जिन्हें ट्रंप ने दो साल पहले आराम से जीता था। गिनती पूरी होने पर 100 में से कम से कम 51 सीटें उनकी होंगी। 2021 से 2025 तक सीनेट के नेता रहे चक शूमर फिर बहुमत नेता बनने वाले हैं।
ट्रंप के गढ़ में चार सीटें
सबसे बड़े उलटफेर देर रात हुए। टेक्सस में जेम्स टालारिको ने केन पैक्सटन को हराया, जो राज्य के रिपब्लिकन अटॉर्नी जनरल हैं। पैक्सटन के पक्ष में बाहर से भारी पैसा ख़र्च हुआ था। ओहायो में पूर्व सीनेटर शेरोड ब्राउन ने जॉन हस्टेड को हराया, जिनके पास यह सीट थी। 2024 में ट्रंप ने दोनों राज्य दहाई अंकों के अंतर से जीते थे।
इससे पहले रात में दो सीटें पलट चुकी थीं। साउथ कैरोलाइना में बाल रोग विशेषज्ञ एनी एंड्रयूज़ ने डार्लीन ग्राहम को हराया, जिन्हें उनके भाई सीनेटर लिंडसे ग्राहम के निधन के बाद नियुक्त किया गया था। इस राज्य में ट्रंप लगभग 18 अंकों से जीते थे। नॉर्थ कैरोलाइना में पूर्व गवर्नर रॉय कूपर ने खुली सीट जीती।
डेमोक्रेट्स ने जॉर्जिया भी बचाया, जहां जॉन ऑसॉफ़ ने माइक कॉलिन्स को हराया, और न्यू हैम्पशर भी। उनका बहुमत मिशिगन और मिनेसोटा की अपनी सीटें बचाए रखने पर टिका है। फ़्लोरिडा में रिपब्लिकन ऐशली मूडी गिनती में डेमोक्रेट एंजी निक्सन से लगभग 3 अंक आगे थीं।
‘बैलट पर नहीं था’
समर्थकों से “मान लीजिए कि मैं बैलट पर हूं” कहने वाले ट्रंप ने हार का ठीकरा अपनी ग़ैरमौजूदगी पर फोड़ा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे “बैलट पर नहीं थे” और अगर होते तो “भारी बहुमत से” जीतते।
जॉर्जिया में जीत का जश्न मनाते हुए ऑसॉफ़ ने कहा कि अमेरिकी जनता ने राष्ट्रपति की “नैतिक पतन, भ्रष्टाचार और अक्षमता को नकार दिया है”।
मतदान ख़त्म होने से पहले शूमर ने ख़ुद को “घबराहट भरा आशावादी” बताया था। मंगलवार को उन्होंने कहा, “अमेरिकी लोग चाहते हैं कि हम ऐसे काम करें जिनसे उनकी ज़िंदगी बेहतर हो। हम उनकी सुन रहे हैं। ट्रंप नहीं सुन रहे।”
मतदाता क्यों पलटे
एग्ज़िट पोल के मुताबिक आधे मतदाताओं ने इस चुनाव को राष्ट्रपति को सबक़ सिखाने का मौक़ा माना, और हर चार में से तीन देश की दिशा से नाराज़ या असंतुष्ट थे। 70 प्रतिशत ने कहा कि वे चाहते हैं कि कांग्रेस प्रशासन पर ज़्यादा अंकुश रखे। महंगाई और भ्रष्टाचार मतदाताओं की सबसे बड़ी चिंता रहे, साथ ही फ़रवरी में ट्रंप के ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने के बाद बढ़ी ईंधन की क़ीमतें भी।
अब क्या बदलेगा
दोनों सदनों के साथ डेमोक्रेट्स ट्रंप के विधेयक रोक सकते हैं, संसदीय समितियों के ज़रिए जांच चला सकते हैं और ख़र्च तय कर सकते हैं। सीनेट के नियंत्रण से उन्हें ट्रंप के न्यायाधीशों और मंत्रियों की नियुक्तियों पर भी फ़ैसले का अधिकार मिलेगा, क्योंकि इनके लिए सीनेट की मंज़ूरी ज़रूरी है। हाउस में डेमोक्रेट्स ने कम से कम आठ रिपब्लिकन सीटें छीनी हैं, जिनमें केंटकी, न्यू जर्सी और नॉर्थ कैरोलाइना की सीटें शामिल हैं।
नई कांग्रेस जनवरी में बैठेगी। हाउस और सीनेट के कुछ कड़े मुकाबलों की गिनती अभी जारी है।