दुनियापश्चिम एशिया
ईरान ने ब्रिटेन की रॉयल नेवी और वायुसेना को आतंकी संगठन घोषित किया, एमआई6 को 'शत्रु समूह' बताया
तेहरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम जुलाई में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को सूचीबद्ध करने के ब्रिटेन के फैसले का जवाब है। ईरान ने ब्रिटेन पर अमेरिका-इज़राइल के युद्ध के लिए अड्डे देने का आरोप भी लगाया।
मुख्य बातें
- ईरान ने रॉयल नेवी और रॉयल एयर फोर्स को आतंकी संगठन घोषित किया है।
- ब्रिटेन की विदेशी खुफिया एजेंसी एमआई6 को ईरान के जासूसी कानून के तहत शत्रु समूह माना जाएगा।
- तेहरान ने इसे ब्रिटेन द्वारा जुलाई में आईआरजीसी को सूचीबद्ध करने का जवाबी कदम बताया।
ईरान ने रविवार को ब्रिटेन की रॉयल नेवी और रॉयल एयर फोर्स को आतंकी संगठन घोषित कर दिया और ब्रिटेन की विदेशी खुफिया एजेंसी एमआई6 को ‘शत्रु समूह’ की श्रेणी में डाल दिया। ऐसे समय में जब वॉशिंगटन से बातचीत अधर में लटकी है, इस कदम से लंदन के साथ तेहरान का टकराव और गहरा गया है।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये कदम सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव के बाद उठाए गए हैं। मंत्रालय के मुताबिक एमआई6 को “‘शत्रु समूह’ की श्रेणी में रखा जाएगा”, यानी उस पर ईरान का जासूसी कानून लागू होगा। दोनों ब्रिटिश सैन्य सेवाओं पर वह ईरानी कानून लागू होगा जो इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के खिलाफ पश्चिमी कदमों के जवाब में बना था।
तेहरान ने ब्रिटेन पर आरोप लगाया कि वह ब्रिटिश नियंत्रण वाले इलाकों में सैन्य और रसद अड्डे देकर ईरान के खिलाफ अमेरिका-इज़राइल के युद्ध में मदद कर रहा है। मंत्रालय ने 13 जुलाई 2026 के ब्रिटिश फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें आईआरजीसी को स्टेट थ्रेट्स एक्ट 2026 के दायरे में लाया गया था। यह नया कानून ब्रिटिश सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माने जाने वाले विदेशी सरकारी निकायों को सूचीबद्ध करने का अधिकार देता है। ब्रिटेन में आईआरजीसी का साथ देने पर अब 14 साल तक की सज़ा हो सकती है।
मंत्रालय ने अपने कदम को कानूनी और जवाबी बताया और कहा कि इसके नतीजों की ज़िम्मेदारी ब्रिटेन की होगी। ब्रिटिश सरकार की ओर से फौरन कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
यह ऐलान ऐसे वक्त हुआ है जब ईरानी अधिकारियों के तेवर सख्त हो रहे हैं। सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमीनिया ने चेतावनी दी कि अमेरिका ने फिर हमला किया तो “तुरंत, करारा जवाब” मिलेगा जो “पहले से भी ज़्यादा व्यापक” होगा, और नया टकराव पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा।
विदेश मंत्री अब्बास अराघची कह चुके हैं कि अगर वॉशिंगटन प्रतिबंध हटाने समेत ईरान की शर्तें मान ले तो तेहरान का प्रस्ताव दो दिन में होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोल देगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा था कि ईरान से बातचीत चल रही है, लेकिन साथ ही चेताया कि उसके बचे हुए परमाणु ठिकानों पर हमला किया जा सकता है।