दुकानों के बिल पर जीएसटी की नजर: अप्रैल 2027 से खुदरा ई-इनवॉइसिंग का पायलट
अधिकारियों के मुताबिक, चुनिंदा क्षेत्रों में आम ग्राहकों को दिए जाने वाले बिल एक सरकारी सिस्टम पर दर्ज करने का स्वैच्छिक ट्रायल शुरू होगा। रेस्तरां उन क्षेत्रों में शामिल हैं जिन पर विचार हो रहा है।

मुख्य बातें
- अधिकारियों के अनुसार जीएसटी विभाग 1 अप्रैल 2027 से खुदरा ई-इनवॉइसिंग पायलट की तैयारी में है।
- शुरुआत में ट्रायल स्वैच्छिक होगा, पर कर चोरी वाले क्षेत्रों को बाद में अनिवार्य रूप से जोड़ा जा सकता है।
- बैंक, बीमा कंपनियां और एनबीएफसी, जो अभी बी2बी ई-इनवॉइसिंग से छूट में हैं, पायलट में शामिल नहीं हैं।
देश का जीएसटी विभाग 1 अप्रैल 2027 से खुदरा बिलों की ई-इनवॉइसिंग का पायलट शुरू करने की तैयारी कर रहा है। दो अधिकारियों ने बताया कि इसके तहत चुनिंदा क्षेत्रों में दुकानें और कारोबारी आम ग्राहकों को जो बिल देते हैं, वे एक सरकारी सिस्टम पर दर्ज होंगे।
यह ट्रायल स्वैच्छिक योजना के रूप में शुरू होगा। जीएसटी परिषद के कार्यवृत्त के मुताबिक, कर चोरी की आशंका वाले क्षेत्रों को बाद में इसमें अनिवार्य रूप से जोड़ा जा सकता है। संभावित क्षेत्रों में रेस्तरां का नाम लिया गया है।
बी2बी के बाद अगला कदम
सालाना ₹5 करोड़ से ज्यादा बिक्री वाले कारोबार पहले से बी2बी बिल एक सरकारी पोर्टल पर दर्ज करते हैं, कुछ छूट के साथ। अधिकारी ग्राहकों के बिलों को इसका स्वाभाविक अगला कदम मानते हैं: खुदरा बिल दर्ज होने के बाद कर अधिकारी दुकानों के काउंटर पर हुए लेनदेन का मिलान कारोबारियों के जीएसटी रिटर्न से कर सकेंगे।
यह विचार नया नहीं है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली जीएसटी परिषद ने सितंबर 2024 में अपनी 54वीं बैठक में स्वैच्छिक ट्रायल की सिफारिश की थी, चुनिंदा क्षेत्रों और राज्यों के लिए। एक तीसरे अधिकारी ने बताया कि छोटे लेनदेन की भारी संख्या के कारण इसे लागू करने में देर हुई, क्योंकि इसके लिए कहीं ज्यादा सर्वर क्षमता चाहिए।
समर्थकों का कहना है कि ग्राहकों को बिल फोन पर मिलेंगे, कागजी बिल कम होंगे और विदेशी पर्यटकों के लिए जीएसटी रिफंड लेना आसान हो सकता है। पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि ई-इनवॉइसिंग से ग्राहक सही जीएसटी बिल मांगने के लिए प्रेरित होंगे और असंगठित क्षेत्र औपचारिक अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ेगा।
बैंक, बीमा कंपनियां और एनबीएफसी, जिन्हें अभी बी2बी ई-इनवॉइसिंग से छूट है, बाद में जोड़े जा सकते हैं, पर वे पायलट का हिस्सा नहीं हैं। ईवाई इंडिया के टैक्स पार्टनर दिव्येश लापसीवाला ने कहा कि ज्यादा लेनदेन और खास बिलिंग सिस्टम के कारण इन क्षेत्रों को बदलाव के लिए पर्याप्त समय चाहिए।
अधिकारियों ने बताया कि सरकार ब्राजील और चिली के ई-इनवॉइसिंग सिस्टम का भी अध्ययन कर रही है। वित्त मंत्रालय ने इस योजना पर कोई टिप्पणी नहीं की है।