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एशिया में शुरुआती कारोबार में तेल 1.4% सस्ता, ईरान बोला कतर से बातचीत 'आगे बढ़ रही है'
सोमवार को कारोबार शुरू होते ही ब्रेंट 111.84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया और पिछले हफ्ते की तेज़ी का कुछ हिस्सा गंवा दिया। विश्लेषकों का कहना है कि यह राहत थोड़े दिन की हो सकती है, क्योंकि मंगलवार को अमेरिकी मध्यावधि चुनाव हैं और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में टैंकरों पर हमले जारी हैं।

मुख्य बातें
- सोमवार के शुरुआती कारोबार में ब्रेंट कच्चा तेल 1.59 डॉलर यानी 1.4% गिरकर 111.84 डॉलर प्रति बैरल पर आया।
- ईरान और कतर के बीच युद्ध खत्म करने पर लगातार तीसरे दिन बातचीत हुई।
- एक विश्लेषक के मुताबिक मध्यावधि चुनाव के बाद ब्रेंट 120 डॉलर की ओर जा सकता है।
ईरान पर अमेरिका-इज़राइल के युद्ध को खत्म करने के लिए ईरान और कतर की बातचीत लगातार तीसरे दिन चलने के बीच सोमवार को एशिया में कारोबार शुरू होते ही कच्चा तेल 1% से ज़्यादा सस्ता हो गया।
भारतीय समय के अनुसार सुबह 5:40 बजे के कुछ देर बाद ब्रेंट कच्चा तेल 1.59 डॉलर यानी 1.4% गिरकर 111.84 डॉलर प्रति बैरल पर था, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 1.56 डॉलर यानी 1.5% फिसलकर 102.56 डॉलर पर आ गया। अक्टूबर के आखिर में ब्रेंट छह महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर बंद हुआ था।
केसीएम ट्रेड के मुख्य बाज़ार विश्लेषक टिम वॉटरर ने कहा, “पिछले हफ्ते की तेज़ बढ़त के बाद आज सुबह तेल में तकनीकी नरमी दिख रही है।” उन्होंने आगाह किया कि यह गिरावट टिकाऊ नहीं भी हो सकती और मंगलवार के अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान से जुड़ी बयानबाज़ी ब्रेंट को 120 डॉलर की ओर धकेल सकती है।
तेहरान में विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि बातचीत “जारी है और आगे बढ़ रही है”, और ईरान “रक्षा और कूटनीति, दोनों” के लिए तैयार है। सप्ताहांत में उन्होंने कहा था कि अगर वॉशिंगटन ईरान की शर्तें मान ले तो कतर के मध्यस्थों के साथ तैयार योजना से दो दिन में होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुल सकता है। जलडमरूमध्य में टैंकरों पर हमलों के चलते शिपिंग और बीमा की लागत ऊंची बनी हुई है।
दूसरी जगहों से आपूर्ति बनी रही है। तीन में से दो शिप-ट्रैकिंग कंपनियों के मुताबिक हूती हमलों के बावजूद सऊदी अरब ने अक्टूबर में कच्चे तेल का निर्यात बढ़ाया। ओपेक+ ने दिसंबर के उत्पादन लक्ष्य में कोई बदलाव नहीं किया है और अगले साल से पहले नीति में बदलाव की उम्मीद नहीं है।
भारत अपना ज़्यादातर तेल विदेश से खरीदता है, इसलिए हर डॉलर मायने रखता है। अप्रैल से सितंबर के बीच देश का कच्चे तेल का आयात बिल 46% बढ़कर 90.6 अरब डॉलर हो गया था, और सितंबर में भारतीय बास्केट का औसत 116 डॉलर प्रति बैरल रहा। रिज़र्व बैंक की मदद से रुपया डॉलर के मुकाबले 95 से मज़बूत स्तर पर टिका है, जबकि मई में यह 96.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गया था। सोमवार की गिरावट सुबह 9:15 बजे दलाल स्ट्रीट खुलने से पहले कुछ राहत देती है, लेकिन कारोबारियों की नज़र मंगलवार के अमेरिकी चुनाव और दोहा व तेहरान से आने वाली खबरों पर रहेगी।