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सेबी के नए निपटान नियम लागू, ऑनलाइन आवेदन और ₹25,000 की फीस
सेबी (प्रशासनिक और दीवानी कार्यवाहियों का निपटान) विनियम, 2026 शनिवार से लागू हो गए हैं और 2018 के नियमों की जगह लेंगे।

मुख्य बातें
- विनियम 7 नवंबर से लागू हो गए और 2018 के निपटान नियम रद्द हो गए।
- आवेदन ऑनलाइन सुविधा से होंगे, फीस व्यक्तियों के लिए ₹25,000 और अन्य के लिए ₹35,000 है।
- न्यूनतम निपटान राशि पहली बार आवेदन करने वालों के लिए ₹3 लाख और बाकी के लिए ₹7 लाख है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के नए निपटान नियम शनिवार, 7 नवंबर से लागू हो गए। सेबी (प्रशासनिक और दीवानी कार्यवाहियों का निपटान) विनियम, 2026 की अधिसूचना 8 अक्टूबर को जारी हुई थी। ये 2018 के निपटान कार्यवाही विनियमों की जगह लेते हैं, हालांकि संक्रमणकालीन और बचाव प्रावधान लागू रहेंगे। सेबी ने इनके लागू होने की तारीख 7 नवंबर 2026 तय की थी।
बाज़ार नियामक ने अपनी वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन सुविधा भी शुरू की है। इसके साथ निपटान राशि का कैलकुलेटर, समझाने वाला वीडियो, अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और एक हेल्प डेस्क भी है।
फीस और राशि
आवेदकों को वापस न होने वाली फीस देनी होगी: व्यक्तियों के लिए ₹25,000 और अन्य संस्थाओं के लिए ₹35,000। न्यूनतम निपटान राशि पहली बार आवेदन करने वालों के लिए ₹3 लाख और बाकी के लिए ₹7 लाख है। अंतिम राशि आधार राशि, कार्यवाही के चरण, नियामकीय कार्रवाई, उल्लंघन की गंभीरता और बढ़ाने या घटाने वाले कारकों से तय होती है।
कौन और कब आवेदन कर सकता है
कोई भी संस्था तय शर्तों के अधीन निर्दिष्ट कार्यवाही के किसी भी चरण में आवेदन कर सकती है। सेबी के सामने लंबित कार्यवाहियों के लिए आवेदन आमतौर पर कारण बताओ नोटिस या पूरक नोटिस मिलने के 90 दिन के भीतर करना होता है, जो भी बाद में मिले। प्रतिभूति अपीलीय अधिकरण या सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों पर यह सीमा लागू नहीं होती।
जानबूझकर चूक करने वाले, धोखाधड़ी करने वाले कर्ज़दार और भगोड़े आर्थिक अपराधी निपटान नहीं कर सकते। जिन उल्लंघनों का असर पूरे बाज़ार पर पड़ा हो, निवेशकों को भारी नुकसान हुआ हो या बाज़ार की साख को चोट पहुंची हो, उन्हें भी बाहर रखा जा सकता है।
फास्ट ट्रैक और गोपनीयता
नियमों में फास्ट-ट्रैक रास्ता है, उल्लंघन के प्रकार या रकम की सीमा के आधार पर। रकम वाला रास्ता ₹10 लाख तक के उन आवेदनों के लिए है, जिनमें वसूली या सुधारात्मक और नियामकीय शर्तें नहीं हैं। जांच, निरीक्षण या ऑडिट में काफी मदद करने वाले आवेदकों को शर्तों के साथ गोपनीयता का लाभ मिल सकता है।
हर आवेदन की जांच एक आंतरिक समिति और एक उच्चाधिकार प्राप्त सलाहकार समिति करती है और शर्तें सुझाती है। पूर्णकालिक सदस्यों का पैनल तय करता है कि आवेदन स्वीकार हो या नहीं।