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आडवाणी के 99वें जन्मदिन पर मोदी: उन्होंने भाजपा को राष्ट्र प्रथम की नींव दी
प्रमुख अखबारों में लिखे लेख में प्रधानमंत्री ने आडवाणी का 1991 का नामांकन पत्र तैयार करने में मदद को याद किया और पार्टी के उदय, कड़े आतंकरोधी कानून और रथ यात्रा का श्रेय उन्हें दिया।

मुख्य बातें
- मोदी ने लिखा कि आडवाणी ने भाजपा को राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत की स्पष्ट नींव दी।
- उन्होंने 1989 में कांग्रेस के 400 से 200 से कम सीटों पर आने का श्रेय आडवाणी को दिया।
- आडवाणी रविवार को अपने जीवन के सौवें वर्ष में प्रवेश कर गए; मोदी ने उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को लालकृष्ण आडवाणी के 99वें जन्मदिन पर प्रमुख अखबारों में एक लेख लिखा। उन्होंने लिखा कि पूर्व उप प्रधानमंत्री और भाजपा के संस्थापकों में से एक आडवाणी ने “भारतीय जनता पार्टी को राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर टिकी स्पष्ट नींव दी”। आडवाणी अब अपने जीवन के सौवें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं।
मोदी ने कामना की कि आडवाणी स्वस्थ रहें और हमेशा की तरह सबको प्रेरित करते रहें। सार्वजनिक प्रसारक की रिपोर्ट दोपहर 2:04 बजे आई।
लेख में क्या है
मोदी ने आडवाणी की वैचारिक स्पष्टता और बौद्धिक पैनेपन का जिक्र किया और कहा कि उन्होंने उस चीज को चुनौती दी जिसे मोदी छद्म धर्मनिरपेक्षता कहते हैं। उन्होंने आडवाणी की सादगी और निष्कलंक छवि को भी उनके सार्वजनिक जीवन की पहचान बताया।
पार्टी के चुनावी उदय पर मोदी ने भाजपा अध्यक्ष के रूप में आडवाणी के कार्यकाल को श्रेय दिया: 1989 में कांग्रेस 400 सीटों से 200 से कम पर आ गई और 1996 में भाजपा पहली बार सबसे बड़ी पार्टी बनी।
मोदी ने एक निजी याद भी साझा की। 1991 के लोकसभा चुनाव में आडवाणी दो सीटों से लड़े, जिनमें से एक गुजरात की गांधीनगर थी। मोदी ने लिखा कि उन्होंने नामांकन पत्र तैयार करने में मदद की और प्रचार में भी हाथ बंटाया।
गृह मंत्रालय और रथ यात्रा
मोदी ने आडवाणी को देश के सबसे लंबे समय तक रहे गृह मंत्रियों में से एक बताया। उनके अनुसार आडवाणी ने सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया, सुरक्षाकर्मियों का जीवन बेहतर बनाया और देश को कड़ा आतंकरोधी कानून दिलाया। आडवाणी 1998 से गृह मंत्री रहे और जून 2002 से मई 2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उप प्रधानमंत्री रहे।
प्रधानमंत्री ने सोमनाथ से अयोध्या की रथ यात्रा को एक यादगार क्षण कहा, जिसने भारतीय समाज को बेहतर दिशा में बदला। आडवाणी ने यह यात्रा 25 सितंबर 1990 को गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या में राम मंदिर के लिए समर्थन जुटाने को शुरू की थी। उसी साल अक्टूबर में इसे बिहार में रोक दिया गया और यह अयोध्या नहीं पहुंच सकी।
एक नज़र में आडवाणी
- जन्म: 8 नवंबर 1927, कराची में, जो तब अविभाजित भारत में था।
- पार्टी: अप्रैल 1980 में भाजपा के संस्थापकों में; तीन बार पार्टी अध्यक्ष, 1986 से 1991, 1993 से 1998 और 2004 से 2005 तक।
- सीटें: भाजपा 1984 में 2 लोकसभा सीटों से 1989 में 85 और 1996 में 161 सीटों पर पहुँची, जिस उभार का श्रेय मोदी के लेख में उनके नेतृत्व को दिया गया है।
- गांधीनगर: 1991 से 2019 तक अधिकांश समय उन्होंने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया; 2019 में अमित शाह यहाँ से चुने गए।
- 2009: उस वर्ष के लोकसभा चुनाव में वे भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे।
हम यहां तक कैसे पहुंचे
आडवाणी को 2024 में देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न मिला; इसकी घोषणा उस साल 3 फरवरी को हुई थी। मोदी ने 2024 और 2025 में भी जन्मदिन पर आडवाणी को बधाई दी थी। इस बार श्रद्धांजलि छोटे संदेश की जगह लंबे लेख के रूप में आई।
रविवार को ही मोदी ने बस्तर में सुरक्षाबलों के साथ दिवाली मनाई, जिसकी खबर हम पहले दे चुके हैं, और देशवासियों को दिवाली की शुभकामनाएं भी दी थीं।
क्यों मायने रखता है
मोदी का वृत्तांत केंद्र में एक दशक से अधिक से सत्तारूढ़ मौजूदा भाजपा को आडवाणी की 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की रणनीति से जोड़ता है और पार्टी के इस मूल दावे को दोहराता है कि राष्ट्रहित सबसे पहले है। सीटों के आंकड़े और धर्मनिरपेक्षता पर टिप्पणी मोदी की अपनी व्याख्या है।
आगे क्या
रिपोर्ट में जन्मदिन के किसी और कार्यक्रम या अन्य दलों अथवा आडवाणी के परिवार की प्रतिक्रिया का जिक्र नहीं है। आडवाणी का अगला जन्मदिन, 8 नवंबर 2027, उनके 100 वर्ष पूरे होने का होगा।
मूल दस्तावेज़
- PM Modi credits L K Advani with giving BJP a foundation rooted in the Nation First principleNews On AIR (Akashvani), 8 नवंबर 2026