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राज्यदिल्ली

दिल्ली: 16 साल की घरेलू सहायिका छुड़ाई गई, गर्म प्रेस से जलाने का आरोप; अभी कोई गिरफ्तारी नहीं

लड़की को 3 और 4 नवंबर को अबुल फजल एन्क्लेव-2 के एक घर से छुड़ाकर एम्स में भर्ती कराया गया। पुलिस ने बाल श्रम और किशोर न्याय कानूनों के तहत मामला दर्ज किया है।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीसंपादन: पुनीत पनेसरप्रकाशित
गांधी न्यूज़ ग्राफ़िक: दिल्ली के एक घर से छुड़ाई गई 16 साल की लड़की
गांधी न्यूज़ ग्राफ़िक: दिल्ली के एक घर से छुड़ाई गई 16 साल की लड़कीग्राफ़िक: गांधी न्यूज़

मुख्य बातें

  1. दक्षिण-पूर्व दिल्ली के अबुल फजल एन्क्लेव-2 के एक घर से 3 और 4 नवंबर को 16 साल की घरेलू सहायिका को छुड़ाया गया।
  2. उसने बाल कल्याण समिति को बताया कि उसे गर्म प्रेस से जलाया गया और सुबह 6 से रात 2 बजे तक काम कराया गया।
  3. शाहीन बाग थाने ने मामला दर्ज किया है, पर अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।

दक्षिण-पूर्व दिल्ली में घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली 16 साल की लड़की ने बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को बताया कि उसे गर्म प्रेस से जलाया गया और रोज करीब 20 घंटे काम कराया गया। दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया है, पर अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

लड़की को 3 और 4 नवंबर को अबुल फजल एन्क्लेव-2 के एक घर से छुड़ाया गया। एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन ने पुलिस से शिकायत की थी। कालकाजी के उपमंडल मजिस्ट्रेट के निर्देश पर श्रम विभाग, दिल्ली पुलिस और एनजीओ के प्रतिनिधि घर पहुंचे और उसे मुक्त कराया। उसका बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज हुआ और उसे सीडब्ल्यूसी के सामने पेश किया गया, जिसने उसे इलाज के लिए एम्स में भर्ती कराने का निर्देश दिया।

लड़की का कहना

उसने सीडब्ल्यूसी को बताया कि वह सुबह 6 बजे से रात 2 बजे तक काम करती थी, अक्सर उसे बचा हुआ खाना दिया जाता था और छोटी गलतियों पर पिटाई होती थी। उसके अनुसार उसे पीठ, हाथों और कूल्हों पर बार-बार गर्म प्रेस से जलाया गया, गर्म चाकू से घायल किया गया और तीन दिन तक खाना-पानी नहीं दिया गया। इलाज के बजाय उसे दुकान से दवाएं दी गईं। उसने यह भी कहा कि किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी गई।

एनजीओ के अनुसार उसे माता-पिता से दूर रखा गया। लगभग एक साल में माता-पिता उससे फोन पर सिर्फ दो-तीन बार बात कर सके और उन बातचीतों में उसका चेहरा ढका रहता था। एक दूसरी महिला ने उसे इस घर में रखवाया था, और एनजीओ के अनुसार लगभग एक साल के काम के लिए लड़की को सिर्फ ₹18,000 दिए गए।

मामला

मजिस्ट्रेट ने शाहीन बाग थाने को बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 और किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया। पुलिस ने शनिवार को कहा कि मामला दर्ज हो गया है और किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

लड़की ने सीडब्ल्यूसी को बताया कि वह आगे क्या चाहती है: स्कूल लौटना और शिक्षिका बनना।