नीतिरक्षा
शेरथांग में राजनाथ सिंह: सैनिक दिवाली का सबसे उज्ज्वल प्रकाश हैं
सिक्किम में चीन सीमा पर रक्षा मंत्री ने जवानों से कहा कि अनुशासन और साहस के बिना कोई तकनीक काम की नहीं, और शेरथांग युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

मुख्य बातें
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को सिक्किम के अग्रिम क्षेत्रों में त्रिशक्ति कोर के सैनिकों के साथ दिवाली मनाई।
- उन्होंने सैनिकों को दिवाली का सबसे उज्ज्वल प्रकाश बताया और कहा कि उनकी सतर्कता से पूरा देश सुरक्षित महसूस करता है।
- उन्होंने कहा कि अनुशासन और साहस के बिना कोई भी तकनीक काम की नहीं, और जवानों से स्थानीय लोगों का भरोसा बनाए रखने को कहा।
- उन्होंने नाथू ला के पास शेरथांग युद्ध स्मारक और बाबा हरभजन सिंह स्मारक पर श्रद्धांजलि दी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को सिक्किम के अग्रिम क्षेत्रों में तैनात त्रिशक्ति कोर के सैनिकों के साथ दिवाली मनाई। चीन सीमा के पास शेरथांग में उन्होंने जवानों को “दिवाली का सबसे उज्ज्वल प्रकाश” बताया।
रक्षा मंत्रालय की दोपहर 3:08 बजे IST जारी विज्ञप्ति के अनुसार उन्होंने कहा, “जिस तरह एक दीपक बिना किसी दिखावे के अंधकार दूर करता है, उसी तरह सैनिक भी चुपचाप अपना कर्तव्य निभाते हैं, ताकि देशवासी शांति और सुरक्षा के साथ त्योहार मना सकें।”
उनके साथ थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ, पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल वी.एम.बी. कृष्णन, 33 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल मान राज सिंह मान और सेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी थे।
जवानों से क्या कहा
राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमाओं पर सैनिकों के समर्पण और सतर्कता के कारण ही पूरा देश सुरक्षित महसूस करता है। उन्होंने दुर्गम ऊंचाई वाले इलाकों में सीमा की रक्षा कर रहे जवानों की कार्यकुशलता, मनोबल और संकल्प की सराहना की और उनसे इसी उत्साह के साथ मातृभूमि की रक्षा करते रहने का आह्वान किया।
उन्होंने उन सैनिकों के त्याग को नमन किया जो परिवार से दूर रहकर अपने त्योहारों से ऊपर देश के प्रति कर्तव्य को रखते हैं। शेरथांग में तैनात बहुत से जवान दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज घर से दूर बिताएंगे।
इसके बाद रक्षा मंत्री ने अनुशासन की बात की। उन्होंने कहा कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, अनुशासन और साहस के बिना उसका कोई महत्व नहीं है। शनिवार को उत्तर बंगाल में भी उन्होंने ड्रोन, ड्रोन-रोधी प्रणालियों और आधुनिक युद्ध की चर्चा करते हुए यही कहा था कि बहादुर सैनिकों के बिना उपकरण किसी काम के नहीं।
उन्होंने जवानों से कहा कि उनका आचरण, वर्दी, भाषा और संयम ही स्थानीय समुदायों के बीच सेना की छवि तय करते हैं। उन्होंने शेरथांग और आसपास के गांवों में सेना और स्थानीय लोगों के बीच विश्वास और सद्भाव को और मजबूत करने का आग्रह किया। यह सीमावर्ती इलाका है, जहां सेना और आम लोग साथ-साथ रहते हैं।
शेरथांग और बाबा हरभजन सिंह स्मारक पर श्रद्धांजलि
राजनाथ सिंह ने शेरथांग युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया। यह स्मारक सीमा के इस हिस्से की रक्षा में प्राण देने वाले सैनिकों की याद में है, जिनमें 1967 में नाथू ला और चो ला पर चीन के साथ हुए संघर्ष में शहीद हुए जवान भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे स्मारक केवल अतीत की घटनाओं और बलिदानों की याद नहीं दिलाते, बल्कि सामूहिक स्मृति को संजोते हैं और राष्ट्रीय गौरव जगाते हैं। उन्होंने बताया कि इस स्मारक पर सम्मानित सैनिक नागालैंड, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान और असम से थे, जिन्होंने क्षेत्र, भाषा या समुदाय का भेद किए बिना देशवासियों के लिए प्राण न्योछावर किए। उन्होंने कहा कि एकता और निस्वार्थ सेवा की यही भावना भारत की आत्मा है, जहां हर नागरिक दूसरे भारतीयों को एक ही परिवार का सदस्य मानता है।
वे बाबा हरभजन सिंह स्मारक भी गए। बाबा हरभजन सिंह की विरासत आज भी इस क्षेत्र की सैन्य और असैन्य परंपराओं में विशेष स्थान रखती है। नाथू ला के पास बने इस स्मारक पर सैनिक और यात्री दोनों आते हैं।
रक्षा मंत्री ने नई दिल्ली के राष्ट्रीय समर स्मारक का भी उल्लेख किया, जिसे सरकार ने सेवा में शहीद हुए सैनिकों के सम्मान में बनाया है। उन्होंने कहा, “शहीद सैनिकों के अद्वितीय साहस और बलिदान को सम्मान देने के लिए राष्ट्रीय समर स्मारक पर उनके लगभग 26 हजार नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित किए गए हैं।” उन्होंने कहा कि स्मारक पर अपने प्रियजन का नाम देखकर शहीद के परिवार, रिश्तेदारों और पैतृक गांव के लोगों में गर्व जागता है, और ऐसे स्मारक आज और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते हैं।
अब तक क्या हुआ
पूर्वी सीमा पर सेनाओं के साथ रक्षा मंत्री के दिवाली कार्यक्रम का यह दूसरा दिन था। शनिवार को उन्होंने बागडोगरा में वायुसेना कर्मियों और सिलीगुड़ी के पास सुकना में थलसेना के जवानों से मुलाकात की थी। सुकना 33 कोर का मुख्यालय है, जहां उन्होंने वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास बन रहे बुनियादी ढांचे की समीक्षा की। वहां उन्होंने मनोबल को “सबसे बड़ा हथियार” बताया और पिछले दशक में रक्षा उत्पादन की बढ़त की बात की।
रविवार सुबह वे पूर्वी सिक्किम के शेरथांग पहुंचे। शेरथांग नाथू ला के रास्ते पर है, जो भारत-चीन सीमा पर लगभग 14,140 फुट की ऊंचाई पर स्थित दर्रा है और सीमा व्यापार तथा कैलाश मानसरोवर यात्रा का भी रास्ता है।
इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में कोबरा कैंप में सुरक्षा बलों के साथ दिवाली मनाई। यह परंपरा उन्होंने 2014 में सियाचिन से शुरू की थी। त्योहार सीमा पर जवानों के साथ मनाना अब देश के राजनीतिक नेतृत्व की नियमित परंपरा बन गया है।
यह क्यों अहम है
त्रिशक्ति कोर सिक्किम और उत्तर बंगाल में मोर्चा संभालती है, जिसमें पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी देश से जोड़ने वाले संकरे सिलीगुड़ी कॉरिडोर के रास्ते भी शामिल हैं। त्योहार के दिन रक्षा मंत्री और थल सेनाध्यक्ष का एक साथ यहां आना चीन सीमा के सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक में तैनात जवानों पर ध्यान का संकेत है।
जवानों को दिया गया उनका संदेश, कि अनुशासन नए उपकरणों जितना ही जरूरी है और सेना को सीमावर्ती गांवों का भरोसा बनाए रखना है, सीमा को लेकर सरकार के बताए तरीके को भी दिखाता है: वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास बेहतर सड़कें और बुनियादी ढांचा, और वहां रहने वाले लोगों से करीबी रिश्ते।
आगे क्या
रक्षा मंत्रालय ने सिक्किम के बाद मंत्री के कार्यक्रम में किसी और पड़ाव की घोषणा नहीं की है। त्योहार का सप्ताह गोवर्धन पूजा और भाई दूज के साथ जारी है, और दूसरे मंत्रियों ने भी यह दिन सुरक्षा बलों के साथ बिताया: कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बीकानेर में बीएसएफ के जवानों के साथ दिवाली मनाई।
मूल दस्तावेज़
- Raksha Mantri celebrates Deepawali with troops in forward areas of SikkimPIB, Ministry of Defence, 8 नवंबर 2026
- रक्षा मंत्री ने सिक्किम के अग्रिम मोर्चों पर तैनात सैनिकों के साथ दीपावली मनाईPIB, Ministry of Defence, 8 नवंबर 2026