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दिवाली का कारोबार ₹6 लाख करोड़ के पार, अकेले दिल्ली में ₹1 लाख करोड़: व्यापारी संगठन
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स को देशभर में त्योहारी बिक्री ₹7 लाख करोड़ से ऊपर जाने की उम्मीद है। खरीदारी धनतेरस पर चरम पर रही। ये आंकड़े संगठन के अपने अनुमान हैं।

मुख्य बातें
- कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने शनिवार को कहा कि दिवाली का कारोबार देशभर में ₹6 लाख करोड़ के पार हो गया।
- दिल्ली का त्योहारी कारोबार रिकॉर्ड ₹1 लाख करोड़ से ऊपर है और देश का कुल आंकड़ा ₹7 लाख करोड़ से अधिक होने की उम्मीद है।
- सोना-जेवर, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े और वाहन आगे रहे; 6 नवंबर को धनतेरस पर खरीदारी चरम पर रही।
देशभर में इस दिवाली का कारोबार ₹6 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है और ₹7 लाख करोड़ से ऊपर जाने की राह पर है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने शनिवार 7 नवंबर 2026 को एक बयान में यह कहा। अकेले दिल्ली के बाजारों में ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का दिवाली कारोबार हुआ, जिसे संगठन ने रिकॉर्ड बताया। ये आंकड़े कैट के अपने अनुमान हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
खरीदारी शुक्रवार 6 नवंबर को धनतेरस पर चरम पर रही, जब राजधानी और देशभर के बाजारों में भीड़ उमड़ी।
लोगों ने क्या खरीदा
कैट के मुताबिक हर श्रेणी में मांग मजबूत रही। सोना, चांदी और जेवर की भारी खरीदारी हुई, साथ ही मोबाइल फोन, एलईडी टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और एसी भी बिके। साड़ी, सूट, कुर्ते, रेडीमेड कपड़े और बच्चों के कपड़ों की अच्छी बिक्री रही, वैसे ही मिट्टी के दीये, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, पूजा सामग्री और मिठाइयों की भी। कार, दोपहिया और व्यावसायिक वाहनों ने कुल कारोबार में इजाफा किया और खादी, हथकरघा व हस्तशिल्प का कारोबार भी स्थिर रहा।
कैट के महासचिव और सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि बाजारों में अभूतपूर्व भीड़ ने कारोबारी गतिविधियों को नई गति दी है। उन्होंने इस रुझान को भारतीय उत्पादों को तरजीह देते उपभोक्ताओं से जोड़ा और प्रधानमंत्री के “वोकल फॉर लोकल” और “आत्मनिर्भर भारत” के आह्वान का हवाला दिया।
किसे फायदा
कैट ने कहा कि इसका लाभ छोटे और मझोले व्यापारियों, फेरीवालों, दिहाड़ी मजदूरों, सूक्ष्म और कुटीर उद्योगों, स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमियों और कारीगरों के साथ परिवहन कंपनियों, पैकेजिंग फर्मों और डिलीवरी सेवाओं तक पहुंचता है।
राजनीतिक रंग
खंडेलवाल ने यह भी कहा कि दिल्ली के लोगों ने दिखा दिया कि वे नहीं चाहते कि त्योहार और व्यापारिक जीवन “राजनीतिक व्यवधानों का बंधक” बने। उन्होंने 1 नवंबर की विपक्षी रैली और पिछले एक महीने के धरना-प्रदर्शनों से “काफी कारोबारी नुकसान” का आरोप लगाया। यह व्यापारी संगठन का दावा है; नुकसान का कोई स्वतंत्र आकलन नहीं दिया गया।
बयान में इस साल के कारोबार की पिछली दिवाली से तुलना नहीं की गई और दिल्ली के अलावा किसी राज्य का आंकड़ा नहीं दिया गया। त्योहारी दौर खत्म होने पर कैट का अंतिम आंकड़ा आने की उम्मीद है।