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राजनीतिआंतरिक सुरक्षा

बस्तर के कोबरा बेस पर मोदी: हर जिला नक्सलवाद से मुक्त, पहली ऐसी दिवाली

प्रधानमंत्री ने करनपुर में सीआरपीएफ, कोबरा और राज्य पुलिस के जवानों के साथ दिवाली मनाई, कहा "हर सैनिक मेरे परिवार का हिस्सा है" और माओवादी खतरा खत्म करने का श्रेय उन्हें दिया।

संपादकीय डेस्क से · बस्तर, छत्तीसगढ़संपादन: पुनीत पनेसरप्रकाशित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फ़ाइल फ़ोटो)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फ़ाइल फ़ोटो)फ़ोटो: Photos: Narendra Modi; Prime Minister's Office / विकिमीडिया कॉमन्स, CC BY 3.0; GODL-India

मुख्य बातें

  1. मोदी ने बस्तर के करनपुर में कोबरा ऑपरेशंस बेस पर सुरक्षा बलों के साथ दिवाली मनाई।
  2. उन्होंने कहा कि यह पहली दिवाली है जब देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त है।
  3. सशस्त्र या सुरक्षा बलों के साथ यह उनकी लगातार 13वीं दिवाली थी, जो 2014 में सियाचिन से शुरू हुई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को दिवाली छत्तीसगढ़ के बस्तर में करनपुर के कोबरा ऑपरेशंस बेस पर सुरक्षा बलों के साथ मनाई और उनसे कहा कि देश ने माओवादी हिंसा के खिलाफ लंबी लड़ाई जीत ली है।

“हर सैनिक मेरे परिवार का हिस्सा है,” उन्होंने कहा। वहां सीआरपीएफ, उसकी जंगल युद्ध इकाई कोबरा और राज्य पुलिस के जवान मौजूद थे।

नक्सलवाद से मुक्त “पहली दिवाली”

मोदी ने कहा कि यह पहली दिवाली है जब देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त है। “यह पहली दिवाली है जब करोड़ों देशवासी नक्सलवाद के डर से बाहर आ गए हैं,” उन्होंने कहा और जोड़ा कि इसका बड़ा श्रेय सामने बैठे जवानों को जाता है।

“माओवादी आतंक और नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई आसान नहीं थी,” उन्होंने कहा। उन्होंने याद दिलाया कि करीब 20 राज्यों के लगभग 230 जिले प्रभावित थे, एक साल में लगभग 2,000 हमले हुए, 2010 के दंतेवाड़ा हमले में सीआरपीएफ के 76 जवान मारे गए और छत्तीसगढ़ में 1,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की जान गई।

राजनीतिक इच्छाशक्ति और विकास का नया दौर

मोदी ने कहा कि इस काम के लिए देश में जिस राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी थी, वह 2014 में मजबूत हुई। उन्होंने कहा कि खतरा हटने के बाद बस्तर अब विकास के नए दौर में है। उन्होंने यह भी कहा कि आंतरिक सुरक्षा बलों की भूमिका सीमा पर तैनात सशस्त्र बलों जितनी ही अहम है: “जब देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है, तो बाहरी विरोधी सफल नहीं हो सकते।”

करनपुर का बेस बस्तर और अबूझमाड़ के जंगलों में नक्सल विरोधी अभियानों का प्रशिक्षण केंद्र और लॉन्चपैड रहा है। ये इलाके कभी माओवादियों के प्रमुख गढ़ थे।

कार्यक्रम की रिपोर्टों के मुताबिक मोदी ने यह भी चेताया कि “दिमागी नक्सली”, यानी हथियार उठाए बिना उसी विचारधारा को मानने वाले लोग, राजनीतिक रैंकों में अब भी मौजूद हैं। भाषण का पूरा पाठ यह रिपोर्ट लिखे जाने तक उपलब्ध नहीं था।

2014 से चली आ रही परंपरा

सशस्त्र या सुरक्षा बलों के साथ यह मोदी की लगातार 13वीं दिवाली थी। उन्होंने 2014 में सियाचिन से शुरुआत की थी और पिछले साल वे गोवा तट पर आईएनएस विक्रांत पर थे। उन्होंने रविवार सुबह बस्तर जाने की घोषणा करते हुए कहा था कि जहां कुछ समय पहले तक नक्सली आतंक फैलाते थे, वहां आज विकास की बहार है।

मोदी ने देश भर के सुरक्षाकर्मियों को दिवाली की शुभकामनाएं भी दीं और कहा कि वे 140 करोड़ भारतीयों की ओर से बोल रहे हैं।