राजनीतिजम्मू और कश्मीर
नाराज़ विधायकों से मिलने के बाद फ़ारूक़ अब्दुल्ला बोले, नेशनल कॉन्फ़्रेंस को कोई नहीं तोड़ सकता
नेकां अध्यक्ष ने विधायकों की शिकायतों को जायज़ बताया और जल्द कदम उठाने का भरोसा दिया। एक हफ़्ते पहले इन विधायकों ने उमर अब्दुल्ला मंत्रिमंडल में नए फेरबदल की मांग की थी।

मुख्य बातें
- फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ़्रेंस टूटने की ख़बरें झूठी हैं।
- उन्होंने विधायकों की समस्याओं को जायज़ बताया और कहा कि कुछ कदम जल्द उठाए जाएंगे।
- श्रीनगर में करीब 15 नेकां विधायक उनसे और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मिले।
नेशनल कॉन्फ़्रेंस के अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि उनकी पार्टी एकजुट है और इसे कोई नहीं तोड़ सकता। उन्होंने यह बात उन विधायकों से मिलने के बाद कही जो मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार से खुलकर नाराज़ हैं।
मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर हुई बैठक के बाद श्रीनगर में पत्रकारों से अब्दुल्ला ने कहा, “नेशनल कॉन्फ़्रेंस टूट रही है, यह झूठी ख़बर पूरी तरह गलत है।” उन्होंने पार्टी को एक जमात, यानी संगठन, बताया और कहा कि जो इसे तोड़ने की सोच रहे हैं वे कामयाब नहीं होंगे।
बताया गया कि करीब 15 नेकां विधायक गुपकार रोड पर अब्दुल्ला और उनके बेटे, मुख्यमंत्री, से मिले। उन्होंने मंत्रिपरिषद के पुनर्गठन और पार्टी व सरकार के कामकाज के तरीके पर अपनी शिकायतें रखीं।
‘उनकी समस्याएं जायज़ थीं’
अब्दुल्ला ने शिकायतों को खारिज नहीं किया। उन्होंने कहा, “हमने उनसे बात की, उनकी समस्याएं जायज़ थीं, उन्हें बहुत अच्छे से सुना गया, और कुछ कदम जल्द उठाए जाएंगे।” बाकी बदलाव धीरे-धीरे होंगे, उन्होंने जोड़ा। उनके मुताबिक मकसद यह है कि विधायक “पार्टी और सरकार को मज़बूत करेंगे ताकि लोगों की समस्याएं हल हों।”
उन्होंने इस मौके पर पार्टी की मुख्य मांगें भी दोहराईं। उन्होंने कहा, “राज्य के दर्जे के लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी, और अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए के लिए भी।”
नाराज़ विधायकों का ज्ञापन पार्टी अध्यक्ष तक ले जाने के लिए चुने गए विधायक नज़ीर अहमद ख़ान गुरेज़ी ने अलग गुट की बातों को हल्का बताया। उन्होंने कहा, “हम नेशनल कॉन्फ़्रेंस के विधायक हैं। हम हर बार अपने मुद्दे लेकर पार्टी नेतृत्व के पास आते हैं।” उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ़्रेंस से कोई अलग पार्टी नहीं बनी है।
उन्होंने बताया कि विधायक पिछले कुछ दिनों से एक जगह बैठे थे और सोशल मीडिया ने बात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। उनके मुताबिक नेतृत्व ने भरोसा दिया है कि राजनीतिक और दूसरे कुछ मुद्दे तुरंत सुलझाए जाएंगे।
विवाद कैसे शुरू हुआ
मामला 27 अक्टूबर को शुरू हुआ, जब उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने चार नए मंत्रियों अली मोहम्मद सागर, मीर सैफ़ुल्लाह, शमीमा फ़िरदौस और अल्ताफ़ कालू को शपथ दिलाई। इससे मंत्रिपरिषद अपनी अधिकतम सीमा नौ पर पहुंच गई। ईदगाह से छह बार के विधायक मुबारक गुल जैसे वरिष्ठ नेता बाहर रह गए।
तीन दिन बाद करीब 17 नेकां विधायकों और एक निर्दलीय ने श्रीनगर में बैठक की, “चापलूस मंडली की संस्कृति” और “एकतरफ़ा फ़ैसलों” के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित किया, और दोनों अब्दुल्लाओं को नए फेरबदल के लिए 15 दिन की समय सीमा दी। यह समय सीमा नवंबर के मध्य तक है।
अब्दुल्ला ने यह नहीं बताया कि पहले कौन से कदम उठाए जाएंगे या किसी मंत्री को हटाया जाएगा या नहीं। विधायकों ने अपनी मांगों की सूची सार्वजनिक नहीं की है।