राजनीतिअदालत
सोनिया गांधी मतदाता सूची मामला: शिकायतकर्ता को और दस्तावेज देने की छूट, अगली सुनवाई 18 नवंबर को
सत्र अदालत के आदेश पर एफआईआर की अर्जी नए सिरे से सुन रहे राउज एवेन्यू के मजिस्ट्रेट ने शिकायतकर्ता को अपना दावा पुष्ट करने के लिए समय दिया। दावा है कि नागरिकता मिलने से पहले 1980 की सूची में उनका नाम था।

मुख्य बातें
- एसीजेएम विनोद जोशी ने शिकायतकर्ता को अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने की अनुमति दी।
- मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
- शिकायत के अनुसार उनका नाम नागरिकता से तीन साल पहले 1980 की सूची में था।
दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को 1980 की मतदाता सूची में नाम को लेकर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर की अर्जी में शिकायतकर्ता को और दस्तावेज दाखिल करने की अनुमति दी और अगली सुनवाई 18 नवंबर को तय की।
राउज एवेन्यू अदालत में सांसदों और विधायकों से जुड़े मामले सुनने वाले अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद जोशी सत्र अदालत के आदेश पर शिकायत की नए सिरे से सुनवाई कर रहे हैं। शिकायतकर्ता अधिवक्ता विकास त्रिपाठी ने अपने दावे के समर्थन में और सामग्री रिकॉर्ड पर रखने के लिए अनुमति और समय मांगा, जिसे अदालत ने मान लिया। 28 अक्टूबर की पिछली सुनवाई वकीलों की हड़ताल के कारण नहीं हो सकी थी।
दावा और मामले की वापसी
त्रिपाठी का आरोप है कि उनका नाम 1980 में नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की सूची में था, यानी अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिकता मिलने से तीन साल पहले, और यह प्रविष्टि जाली कागजात के बिना नहीं हो सकती थी।
2025 में एक मजिस्ट्रेट ने एफआईआर का आदेश देने से इनकार कर दिया था। 21 सितंबर को विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने वह इनकार रद्द कर दिया। उन्होंने कहा, “यह आदेश बिना कारण वाला आदेश है। इसे रद्द किया जाना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि आदेश में कोई कारण नहीं दिया गया और वह एक असत्यापित फोटोकॉपी पर टिका था। उन्होंने मामला वापस भेजते हुए निर्देश दिया कि संबंधित पुलिस अधिकारी से स्थिति रिपोर्ट मंगाई जाए और उस अधिकारी को सुनकर कारण सहित आदेश पारित किया जाए।
शिकायत के गुण-दोष पर अभी कोई निष्कर्ष नहीं आया है, और सोनिया गांधी या उनके वकीलों की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।