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राजनीतिउत्तर प्रदेश

'उन्हें कैसे पता कि गायब वोटर हिंदू हैं?' 1.27 करोड़ के दावे पर अखिलेश का योगी से सवाल

सपा प्रमुख का कहना है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची का डेटा पहले मुख्यमंत्री कार्यालय को देता है और भाजपा 'मतदान से पहले ही चुनाव हार चुकी है'।

संपादकीय डेस्क से · लखनऊसंपादन: पुनीत पनेसरप्रकाशित
अखिलेश यादव (फ़ाइल फ़ोटो)
अखिलेश यादव (फ़ाइल फ़ोटो)Global Panorama / विकिमीडिया

मुख्य बातें

  1. अखिलेश यादव ने पूछा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कैसे पता कि 1.27 करोड़ गायब मतदाता हिंदू हैं।
  2. उनके मुताबिक 1.27 करोड़ वोट घटने का मतलब हर विधानसभा सीट पर करीब 31,000 वोट का नुकसान है, और भाजपा 2 करोड़ नाम जुड़वाना चाहती है।
  3. सपा का आरोप है कि नाम कटवाने के लिए फॉर्म-7 का दुरुपयोग हुआ; एफआईआर का उसका दावा स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं है।

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने शुक्रवार को सवाल किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कैसे पता कि उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची से गायब नाम हिंदुओं के हैं। उन्होंने भाजपा और चुनाव आयोग पर मिलीभगत का आरोप भी लगाया।

लखनऊ में पार्टी के एक कार्यक्रम में अखिलेश ने कहा: “उन्हें कैसे पता कि हिंदू मतदाताओं के नाम गायब हैं?” आदित्यनाथ ने पिछले हफ्ते दावा किया था कि मतदाता सूची से 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम कट गए हैं।

अखिलेश ने कहा, “ऐसा लगता है कि चुनाव आयोग ने पूरा डेटा मुख्यमंत्री या उनके कार्यालय को दे दिया है।” उनका आरोप है कि आंकड़े जनता तक बाद में पहुंचते हैं, पहले मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंच जाते हैं।

अखिलेश के मुताबिक भाजपा की योजना

सपा प्रमुख ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लखनऊ दौरे में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान कार्यकर्ताओं से 2 करोड़ नाम जुड़वाने को कहा गया। उनका कहना है कि भाजपा ने पहले “घुसपैठियों” के मुद्दे पर विशेष गहन पुनरीक्षण का समर्थन किया और अब हिंदू मतदाताओं की बात कर रही है।

उन्होंने हिसाब भी बताया। उनके मुताबिक 1.27 करोड़ वोट घटने का मतलब है हर विधानसभा सीट पर करीब 31,000 वोट का नुकसान, और भाजपा “मतदान से पहले ही चुनाव हार चुकी है।”

फॉर्म-7 और सुल्तानपुर का मामला

सपा का यह भी आरोप है कि नाम कटवाने के लिए भरे जाने वाले फॉर्म-7 का फर्जी हस्ताक्षरों के साथ दुरुपयोग हुआ। अखिलेश ने सुल्तानपुर के निवासी नंद लाल निषाद का नाम लिया, जिनके नाम से कथित तौर पर करीब 26 मतदाताओं के नाम कटवाने के आवेदन दिए गए। कथित फर्जीवाड़ा उजागर करने में मदद के लिए अखिलेश ने निषाद को ₹1 लाख का इनाम देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि सपा कार्यकर्ताओं ने यह पकड़ा, जिसके बाद फर्जी आवेदन बंद हुए। उन्होंने चुनाव आयोग से जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की। पार्टी के मुताबिक आयोग ने संज्ञान लिया है और एफआईआर दर्ज हुई है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अखिलेश ने मतदाता सूची को पहचान पत्रों से जोड़ने का सुझाव भी दिया और कहा कि नागरिकों का बायोमेट्रिक और रेटिना डेटा पहले से मौजूद है। उन्होंने चेताया कि पुनरीक्षण के बाद सूची से गायब नाम नागरिकता को लेकर डर बढ़ा सकते हैं।

आगे क्या

विवाद 2027 के चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची के चुनाव आयोग के पुनरीक्षण को लेकर है। उपलब्ध खबरों में अखिलेश के बयान पर मुख्यमंत्री कार्यालय या भाजपा की प्रतिक्रिया नहीं है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए दोनों दलों के बीच मतदाता सूची बड़ा मुद्दा बनती दिख रही है।