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राम मंदिर दान चोरी: पुलिस की चार्जशीट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाएं बंद कीं
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने सीबीआई जांच से इनकार किया, फॉरेंसिक ऑडिटर के साथ पुलिस एसआईटी को जांच जारी रखने दी और याचिकाकर्ताओं को निचली अदालत भेजा।

मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राम मंदिर के दान की कथित चोरी से जुड़ी याचिकाएं बंद कर दीं।
- अदालत ने सीबीआई जांच का आदेश नहीं दिया और पुलिस एसआईटी को जांच जारी रखने दी।
- एसआईटी को आठ आरोपियों से जुड़े नकदी निकालने के 105 अनधिकृत मामले और संदिग्ध जमा मिले।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या के राम मंदिर के लिए आए दान की कथित चोरी से जुड़ी याचिकाओं का पूरा बैच बंद कर दिया। अदालत को बताया गया कि पुलिस इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची व वी. मोहना की पीठ ने जांच सीबीआई को सौंपने से इनकार किया, जिसकी मांग याचिकाकर्ता कर रहे थे। इसके बजाय अदालत ने पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) को, जिसमें अब एक फॉरेंसिक ऑडिटर भी शामिल है, जांच जारी रखने की अनुमति दी।
चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामला अब निचली अदालत में है। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता उसी तरह निचली अदालत की मदद कर सकते हैं जैसे कानून अपराध पीड़ितों को अदालत की सहायता की इजाजत देता है, और निचली अदालत को कानून के मुताबिक आगे बढ़ने का निर्देश दिया।
एसआईटी को क्या मिला
राज्य की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को पैसे का पूरा सिलसिला बताया। एसआईटी को आठ आरोपियों से जुड़े नकदी निकालने के 105 अनधिकृत मामले और संदिग्ध जमा मिले।
मेहता ने कहा कि कुछ आरोपियों ने पैसा निवेश किया या बैंक खातों में जमा कराया। उन्होंने एक उदाहरण दिया: एक संपत्ति जिसकी बिक्री के कागज में ₹15 लाख दिखाए गए, जबकि उसकी कीमत करीब ₹50 लाख थी, और बाकी रकम कथित तौर पर नकद दी गई, जो उनके मुताबिक आय के किसी और स्रोत से नहीं आ सकती थी। पीठ ने चार्जशीट की एक प्रति मांगी थी।
105 का यही आंकड़ा उत्तर प्रदेश सरकार ने सितंबर में अदालत के सामने रखा था, जब उसने कहा था कि मंदिर के सीसीटीवी फुटेज की जांच में ये घटनाएं पकड़ी गईं और कुछ ही दिनों में चार्जशीट का वादा किया था।
आगे क्या
सोमवार के आदेश के साथ जांच पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी खत्म हो गई। आठ आरोपियों का मुकदमा अब निचली अदालत में चलेगा, और पैसे का फॉरेंसिक ऑडिट जारी रहने के साथ एसआईटी वहां आगे की रिपोर्ट दाखिल कर सकती है।