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राज्यमहाराष्ट्र

सूखा-पीड़ित किसानों के घर मंत्रियों ने मनाई दिवाली, बांधों में 65.79% पानी

मुख्यमंत्री की अपील के बाद चार मंत्री सोलापुर, अहिल्यानगर, नांदेड़ और ठाणे में किसानों से मिले, जबकि राज्य के जलाशयों में एक साल पहले से करीब 25 प्रतिशत अंक कम पानी है।

संपादकीय डेस्क से · मुंबईसंपादन: पुनीत पनेसरप्रकाशित
गांधी न्यूज़ ग्राफ़िक: बांधों में 65.79%, पिछले साल 90.67%
गांधी न्यूज़ ग्राफ़िक: बांधों में 65.79%, पिछले साल 90.67%ग्राफ़िक: गांधी न्यूज़

मुख्य बातें

  1. मुख्यमंत्री की अपील पर मंत्री दिवाली के दिन सोलापुर, अहिल्यानगर, नांदेड़ और ठाणे के किसान परिवारों से मिले।
  2. महाराष्ट्र के बांधों में 65.79% पानी है, जबकि पिछले साल इसी तारीख को 90.67% था।
  3. 5 नवंबर तक 304 सूखाग्रस्त तालुकों के 87.45 लाख किसानों को ₹5,000 प्रति किसान दिए जा चुके हैं।

महाराष्ट्र के चार मंत्रियों ने रविवार को दिवाली चार जिलों के सूखा-पीड़ित किसानों के घर मनाई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने त्योहार को संकट झेल रहे लोगों के साथ मनाने की अपील की थी। इसी दिन राज्य के जल संसाधन विभाग ने बताया कि बांधों में भंडारण घटकर 65.79% रह गया है।

गांवों में मंत्री

शिवेंद्रराजे भोसले, राधाकृष्ण विखे पाटिल, उदय सामंत और गणेश नाईक सोलापुर, अहिल्यानगर, नांदेड़ और ठाणे जिलों में किसान परिवारों से मिले। उन्होंने परिवारों के साथ त्योहार का भोजन किया और बारिश की विफलता के साल में उनकी दिक्कतें पूछीं। राज्य ने नहीं बताया कि चारों मंत्री कितने घरों में गए।

फडणवीस ने खुद नागपुर जिले के लोहारी सावंगा गांव में दिन बिताया, जहां वे राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज की शिक्षाओं पर आधारित प्रार्थना सभा में शामिल हुए और स्थानीय प्रतिनिधियों से मिले। उन्होंने किसानों से कहा कि सूखे के बीच जहां संभव हो वहां बोरवेल की अनुमति दी जाएगी। उनकी घोषणाओं का ब्योरा हमारी उस दौरे की खबर में है।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुंबई स्थित अपने निवास पर दिव्यांगजनों के साथ दिवाली मनाई। उन्होंने कल्याण योजनाओं का जिक्र किया, जिनमें ठाणे में 1,500 से अधिक लाभार्थियों को सहायक उपकरण शामिल हैं।

बांध क्या बताते हैं

जल संसाधन विभाग की 8 नवंबर की रिपोर्ट 3,042 बड़ी, मध्यम और छोटी सिंचाई परियोजनाओं को कवर करती है। इनमें कुल जीवित क्षमता का 65.79%, यानी 26,979 मिलियन घन मीटर पानी है। पिछले साल इसी तारीख को यह आंकड़ा 90.67% था, यानी करीब 25 प्रतिशत अंक की गिरावट।

हर श्रेणी की परियोजनाओं में भंडारण पिछले साल से कम है। बड़ी परियोजनाओं में 73.16% पानी है, जो एक साल पहले 97.09% था। मध्यम परियोजनाओं में 58.43% और छोटी परियोजनाओं में सिर्फ 38.02% है।

क्षेत्रवार अंतर बड़ा है। कोंकण में सबसे ज्यादा 83.34%, फिर पुणे में 76.32% और नासिक में 75.56%। नागपुर संभाग में 57.99% और अमरावती में 53.97% है। मराठवाड़ा के बड़े हिस्से वाला छत्रपति संभाजीनगर संभाग 38.39% के साथ सबसे नीचे है।

राहत अब तक कैसे पहुंची

राज्य ने सितंबर में बारिश की कमी के बाद 265 तालुकों में सूखा घोषित किया, फिर 40 और जोड़े, जिससे 358 में से 305 तालुके हुए। 14 अक्टूबर को फडणवीस ने प्रभावित तालुकों के किसानों के लिए दिवाली से पहले ₹5,000 के अग्रिम की घोषणा की, साथ में सूखे की सामान्य रियायतें: कर्ज का पुनर्गठन, भू-राजस्व में राहत, बिजली बिल में सब्सिडी, 7.5 एचपी तक के कृषि पंपों को मुफ्त बिजली, जबरन कर्ज वसूली पर रोक और अक्टूबर-नवंबर में जीपीएस से निगरानी वाले पानी के टैंकर।

राहत और पुनर्वास मंत्री मकरंद जाधव पाटिल ने शुक्रवार को बताया कि 5 नवंबर तक राज्य 304 तालुकों के 87,45,669 किसानों को ₹4,372.83 करोड़ दे चुका है। छत्रपति संभाजीनगर संभाग सबसे आगे रहा, जहां 33.36 लाख किसानों को ₹1,668.18 करोड़ मिले; नासिक में 18.07 लाख किसान रहे। अहिल्यानगर 8.07 लाख किसानों और ₹403.64 करोड़ के साथ सबसे बड़ा जिला रहा, उसके बाद बीड, सोलापुर और नांदेड़ हैं। जाधव पाटिल ने कहा कि बैंक खाते या अन्य तकनीकी दिक्कतों से जिनका भुगतान अटका है, उन्हें गड़बड़ी दूर होने पर पैसा मिलेगा।

क्यों मायने रखता है

कम जलाशय वही समस्या हैं जिसे ₹5,000 नहीं सुलझा सकते। छोटी परियोजनाओं में 38.02% और मराठवाड़ा वाले संभाग में 38.39% पानी होने से जिन जिलों में मंत्री गए, वहां रबी की फसल और पीने के पानी का सवाल सबसे बड़ा है। सरकार ने टैंकर और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चारा खरीद का वादा किया है, और फडणवीस ने बोरवेल की अनुमति आसान करने का संकेत दिया है।

आगे क्या

तकनीकी दिक्कतों से अटके किसानों को दिवाली अग्रिम का बाकी भुगतान होना है। जल संसाधन विभाग नियमित रूप से भंडारण के आंकड़े जारी करता है, इसलिए अगले आंकड़े बताएंगे कि सूखे महीनों में जलाशय कितनी तेजी से खाली होते हैं। राज्य ने पहले कहा था कि सूखे की घोषणा आम तौर पर नवंबर के अंत में होती है और मदद दिसंबर से मिलती है, पर कमी की गंभीरता देखकर अधिसूचना अक्टूबर में ही कर दी गई।