समझिएअमेरिकी राजनीति
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव: मंगलवार को क्या दांव पर है, और भारत में नतीजे कब पता चलेंगे
3 नवंबर को अमेरिकी मतदाता प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों, सीनेट की 35 सीटों और 36 राज्यों के गवर्नर के लिए वोट डालेंगे। किस पार्टी को क्या चाहिए, कौन से मुकाबले फैसला कर सकते हैं, गिनती में कई दिन क्यों लग सकते हैं, और इसका असर वॉशिंगटन से बाहर तक क्यों होगा।
संक्षेप में
मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच में होते हैं। मंगलवार 3 नवंबर 2026 को अमेरिकी पूरी प्रतिनिधि सभा, 100 में से 35 सीनेटर और 36 राज्यों के गवर्नर चुनेंगे। प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन 218 के मुकाबले 214 से और सीनेट में 53 के मुकाबले 47 से आगे हैं, इसलिए डेमोक्रेट्स को प्रतिनिधि सभा में कुछ ही सीटें चाहिए, लेकिन सीनेट जीतने के लिए चार सीटों की शुद्ध बढ़त चाहिए। भारतीय समय से बुधवार 4 नवंबर को सुबह 4:30 बजे से 11:30 बजे के बीच मतदान बंद होगा। कुछ मुकाबलों के नतीजे उसी दिन आ सकते हैं, लेकिन कड़े मुकाबलों और देर से पहुंचने वाले डाक मतपत्रों के कारण पूरी तस्वीर में दिन या हफ्ते लग सकते हैं। अगर डेमोक्रेट्स किसी भी सदन में जीतते हैं, तो वे डोनाल्ड ट्रंप के आखिरी दो साल के एजेंडे के बड़े हिस्से को रोक सकते हैं।
मध्यावधि चुनाव क्या होते हैं?
ये राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच में होने वाले चुनाव हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति चार साल के लिए चुना जाता है, लेकिन पूरी प्रतिनिधि सभा हर दो साल में चुनाव का सामना करती है, और सीनेट की एक-तिहाई सीटें भी। डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी 2025 में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया था, इसलिए यह चुनाव ठीक बीच में हो रहा है, और वे खुद मैदान में नहीं हैं।
मंगलवार 3 नवंबर को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सभी 435 सदस्य, 35 सीनेटर और 36 राज्यों के गवर्नर चुनेंगे। सीनेट की सीटें आम 33 से ज़्यादा हैं, क्योंकि फ्लोरिडा और ओहायो में उपचुनाव हैं, उन सीटों के लिए जो मार्को रूबियो के विदेश मंत्री और जेडी वेंस के उपराष्ट्रपति बनने से खाली हुई थीं। इनके अलावा 99 में से 88 राज्य विधायी सदनों की 6,139 सीटें भी भरी जा रही हैं।
किस पार्टी को क्या चाहिए?
दोनों सदनों पर रिपब्लिकन का कब्ज़ा है, लेकिन बहुत कम अंतर से। प्रतिनिधि सभा में उनके 218 सदस्य हैं और डेमोक्रेट्स के 214, एक निर्दलीय है और दो सीटें खाली हैं। बहुमत 218 पर है, इसलिए डेमोक्रेट्स को सत्ता के लिए कुछ ही सीटें चाहिए, और रिपब्लिकन बहुत कम सीटें गंवाने की स्थिति में हैं।
सीनेट डेमोक्रेट्स के लिए कठिन है। वहां रिपब्लिकन 53 के मुकाबले 47 से आगे हैं, जिसमें डेमोक्रेट्स के साथ वोट करने वाले दो निर्दलीय भी गिने गए हैं। डेमोक्रेट्स को 51 तक पहुंचने के लिए चार सीटों की शुद्ध बढ़त चाहिए। 50-50 की स्थिति में भी रिपब्लिकन का नियंत्रण रहेगा, क्योंकि बराबरी पर उपराष्ट्रपति वेंस निर्णायक वोट डालते हैं।
3 नवंबर को दांव पर दोनों सदन
कौन से मुकाबले फैसला कर सकते हैं?
सीनेट के करीब दस मुकाबले कड़े माने जा रहे हैं। डेमोक्रेट्स रिपब्लिकन की सीटें छीनने की कोशिश में हैं: टेक्सस में, जहां जेम्स टैलारिको का मुकाबला केन पैक्सटन से है; ओहायो में, जहां पूर्व सीनेटर शेरोड ब्राउन जॉन हस्टेड को चुनौती दे रहे हैं; मेन में, जहां सूज़न कॉलिन्स ट्रॉय जैक्सन के खिलाफ अपनी सीट बचा रही हैं; और आयोवा व अलास्का में, जहां एशली हिंसन के सामने जॉश ट्यूरेक हैं और मैरी पेल्टोला सीनेटर डैन सलिवन के खिलाफ हैं। नॉर्थ कैरोलाइना में पूर्व गवर्नर रॉय कूपर थॉम टिलिस की खाली की हुई सीट के लिए माइकल व्हाटली से भिड़ रहे हैं।
रिपब्लिकन, बदले में, मिशिगन जीतने की उम्मीद में हैं, जहां डेमोक्रेट सीनेटर गैरी पीटर्स रिटायर हो रहे हैं। उनके उम्मीदवार माइक रॉजर्स को रविवार को अप्रत्याशित बढ़त मिली, जब डेमोक्रेटिक प्राइमरी में अब्दुल अल-सईद से हारने वाली हेली स्टीवंस ने पार्टी लाइन तोड़कर उनका समर्थन किया।
गवर्नर के चुनावों में ओहायो में भारतीय-अमेरिकी रिपब्लिकन विवेक रामास्वामी का मुकाबला एमी एक्टन से है, और टेक्सस के गवर्नर ग्रेग एबट के सामने जीना हिनोहोसा हैं। प्रतिनिधि सभा के मुकाबलों का अलग-अलग अनुमान लगाना कठिन है, और कई राज्यों में नए सिरे से खींची गई ज़िला सीमाओं ने अनिश्चितता बढ़ाई है।
हवा किस ओर है?
हफ्तों से सर्वेक्षण डेमोक्रेट्स के पक्ष में रहे हैं। मतदान से पहले के आखिरी न्यूयॉर्क टाइम्स/सिएना सर्वे में संभावित मतदाताओं के बीच कांग्रेस के लिए डेमोक्रेट्स 52% के मुकाबले 41% से आगे थे, और ट्रंप की लोकप्रियता 36% पर थी, इस सर्वे में उनका सबसे निचला स्तर। इन सर्वेक्षणों में मतदाता महंगाई और ईरान युद्ध से नाराज़ दिखे।
लेकिन सर्वे नतीजे नहीं होते, और मतदान का प्रतिशत बहुत कुछ तय करेगा। रविवार तक 5.2 करोड़ से ज़्यादा अमेरिकी पहले ही वोट डाल चुके थे, खुद जाकर या डाक से। यह अब तक का सबसे महंगा मध्यावधि चुनाव भी है: 2025-26 चक्र का खर्च करीब 12 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि पिछला रिकॉर्ड 2022 में 8.9 अरब डॉलर का था।
नतीजे कब पता चलेंगे?
भारतीय समय से बुधवार 4 नवंबर को सुबह 4:30 बजे मतदान बंद होना शुरू होगा, यानी अमेरिका के पूर्वी तट पर मंगलवार शाम 6 बजे। अगले कुछ घंटों में अहम राज्य बंद होंगे: जॉर्जिया सुबह 5:30 बजे, नॉर्थ कैरोलाइना और ओहायो 6 बजे, और मिशिगन, टेक्सस व मेन 6:30 बजे। कैलिफोर्निया सुबह 9:30 बजे, हवाई और अलास्का का ज़्यादातर हिस्सा 10:30 बजे, और आखिरी मतदान केंद्र, अलास्का के पश्चिमी अल्यूशियन द्वीपों में, 11:30 बजे बंद होंगे।
कुछ मुकाबलों के नतीजे बुधवार को आ जाएंगे। प्रतिनिधि सभा का नियंत्रण तय होने में ज़्यादा समय लग सकता है। कैलिफोर्निया और ओरेगन 10 नवंबर तक पहुंचने वाले डाक मतपत्र गिनते हैं, और नेवाडा 7 नवंबर तक। 2022 में प्रतिनिधि सभा के बहुमत का अनुमान 16 नवंबर को जाकर लगा था। अगर सीनेट में किसी उम्मीदवार को बहुमत नहीं मिलता, तो जॉर्जिया में 1 दिसंबर को रन-ऑफ होगा, और लुइज़ियाना का आम चुनाव 12 दिसंबर को है।
गिनती अदालत तक भी जा सकती है। रविवार को एक संघीय जज ने ट्रंप प्रशासन का वह मुकदमा खारिज कर दिया, जिसमें अलास्का को सीनेटर सलिवन की हार प्रमाणित करने से रोकने की मांग थी, और रिपब्लिकन वहां नतीजे को चुनौती देने की धमकी दे चुके हैं।
डेमोक्रेट्स जीते तो क्या बदलेगा?
डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि सभा या सीनेट ट्रंप के एजेंडे का बड़ा हिस्सा रोक सकती है। खर्च की मंज़ूरी प्रतिनिधि सभा देती है, इसलिए डेमोक्रेटिक बहुमत बजट रोक सकता है या उस पर मोलभाव कर सकता है, और उसे जांच शुरू करने और सैद्धांतिक रूप से महाभियोग चलाने का अधिकार मिल जाएगा। न्यूयॉर्क के हकीम जेफ्रीज़ के माइक जॉनसन की जगह स्पीकर बनने की संभावना है।
सीनेट राष्ट्रपति के मंत्रियों, जजों और राजदूतों की नियुक्ति की पुष्टि करती है, इसलिए डेमोक्रेटिक सीनेट हर नियुक्ति को मोलभाव का मामला बना देगी। अगर दोनों सदन रिपब्लिकन के पास रहे, तो ट्रंप के हाथ आखिरी दो साल खुले रहेंगे।
भारत के लिए इसका क्या मतलब?
क्योंकि नतीजा बाज़ारों को हिलाएगा और ईरान पर अमेरिकी नीति को प्रभावित कर सकता है। भारतीय शेयर और रुपया बुधवार को नतीजे पर प्रतिक्रिया देंगे। ट्रंप संकेत दे चुके हैं कि चुनाव के बाद ईरान पर और हमले हो सकते हैं, और भारत के लिए, जो अपना ज़्यादातर तेल आयात करता है, कोई भी तनाव ईंधन की कीमतों में दिखता है। व्हाइट हाउस को रोकने वाली कांग्रेस अमेरिका की विदेश नीति रातोंरात नहीं बदलेगी, लेकिन 2028 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले के दो सालों में ट्रंप को व्यापार, खर्च और युद्ध पर कम गुंजाइश देगी।