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पेट्रोनेट एलएनजी का तिमाही मुनाफ़ा 54% उछलकर ₹1,235 करोड़, ₹7 का लाभांश
देश के सबसे बड़े एलएनजी आयात टर्मिनल की संचालक कंपनी ने आय में तेज़ गिरावट के बावजूद सितंबर तिमाही में ज़्यादा कमाया। बोर्ड ने ₹7 प्रति शेयर के अंतरिम लाभांश को मंज़ूरी दी।

मुख्य बातें
- पेट्रोनेट एलएनजी का समेकित मुनाफ़ा 54% बढ़कर ₹1,234.63 करोड़ रहा।
- आय पिछले साल के ₹11,009.13 करोड़ से घटकर ₹7,200.35 करोड़ रह गई।
- बोर्ड ने ₹7 प्रति शेयर का अंतरिम लाभांश घोषित किया।
दाहेज और कोच्चि के टर्मिनलों से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात करने वाली पेट्रोनेट एलएनजी ने सोमवार को सितंबर तिमाही के मुनाफ़े में 54% की छलांग दर्ज की, और उसके बोर्ड ने शेयरधारकों के लिए अंतरिम लाभांश को मंज़ूरी दी।
30 सितंबर को ख़त्म तिमाही में समेकित मुनाफ़ा ₹1,234.63 करोड़ रहा, जबकि एक साल पहले यह ₹801.88 करोड़ था। स्टैंडअलोन आधार पर मुनाफ़ा ₹805.75 करोड़ से बढ़कर ₹1,235.40 करोड़ हो गया।
यह बढ़ा हुआ मुनाफ़ा कम कारोबार पर आया। आय पिछले साल की इसी तिमाही के ₹11,009.13 करोड़ से घटकर ₹7,200.35 करोड़ रह गई।
निवेशकों को ₹7 प्रति शेयर
बोर्ड ने 2026-27 के लिए ₹10 अंकित मूल्य वाले हर शेयर पर ₹7 का अंतरिम लाभांश घोषित किया। कंपनी ने कहा कि रिकॉर्ड तारीख़ और भुगतान की तारीख़ बाद में बताई जाएगी। एक साल पहले भी कंपनी ने ₹7 का ही अंतरिम लाभांश दिया था।
नोट्स में दावे
नतीजों के साथ ऑडिटर वी शंकर अय्यर एंड कंपनी ने दो मामलों पर ज़ोर दिया। जहाज़ मालिकों ने बंद पड़े संचालन को लेकर ₹625.42 करोड़ के मध्यस्थता दावे किए हैं, जिन्हें पेट्रोनेट टिकाऊ नहीं मानती। नोट्स में ₹408.23 करोड़ के सकल मूल्य वाले “यूज़ ऑर पे” बकाये का भी ज़िक्र है।
पेट्रोनेट दाहेज में देश का सबसे बड़ा एलएनजी आयात और रीगैसिफ़िकेशन टर्मिनल चलाती है। इसके प्रमोटर सरकारी कंपनियां बीपीसीएल, इंडियन ऑयल, गेल और ओएनजीसी हैं। नतीजे शेयर बाज़ार बंद होने के बाद आए।