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मेघवाल बोले, मुख्य चुनाव आयुक्त मिलने को तैयार थे, पर प्रदर्शनकारियों ने सूची ही नहीं दी
रविवार को कोच्चि में कानून मंत्री ने इंडिया गठबंधन की मॉक संसद को लोकतंत्र का मज़ाक बताया, वहीं बिहार में एनडीए नेताओं ने विपक्ष पर विवाद गढ़ने का आरोप लगाया।

मुख्य बातें
- अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल से मिलने की पेशकश की थी, पर सूची कभी नहीं भेजी गई।
- उन्होंने इंडिया गठबंधन की मॉक संसद को 'लोकतांत्रिक व्यवस्था का मज़ाक' बताया।
- पटना में भाजपा के मंगल पांडेय ने कहा कि विपक्ष 'विवाद गढ़ने की कोशिश' कर रहा है।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने रविवार को कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उन्हें हटाने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों से मिलने की पेशकश की थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इसका जवाब ही नहीं दिया।
कोच्चि में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर भाजपा की एक बहस में मेघवाल ने कहा कि कुमार ने प्रदर्शनकारियों से तारीख और समय तय करने और प्रतिनिधिमंडल के नाम भेजने को कहा था। उन्होंने कहा, “लेकिन उन्होंने वह सूची कभी नहीं दी।”
उनकी यह टिप्पणी दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की रैली के कुछ घंटे बाद आई, जहां विपक्षी नेताओं ने “वोट चोरी” का आरोप दोहराया और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।

लोकतंत्र का ‘मज़ाक’
मेघवाल ने शनिवार को दिल्ली में हुई विपक्ष की मॉक संसद पर भी निशाना साधा, जिसमें इंडिया गठबंधन के सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सांकेतिक महाभियोग चलाया था। उन्होंने इसे “लोकतांत्रिक व्यवस्था का मज़ाक” बताया। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी नेता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिले थे, लेकिन जब उन्होंने सबूत मांगा तो वे कोई सबूत नहीं दे सके। भाषण खत्म करने से पहले मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में बने रहने पर एक गीत गाया और श्रोताओं से साथ गाने को कहा।
बिहार एनडीए भी हमलावर
पटना में बिहार के सत्तारूढ़ एनडीए के नेताओं ने भी रैली पर हमला बोला। पूर्व मंत्री और भाजपा नेता मंगल पांडेय ने कहा कि चुनाव आयोग ने एसआईआर पारदर्शी तरीके से कराया। उन्होंने कहा, “विपक्ष बिना किसी ठोस आधार के विवाद गढ़ने की कोशिश कर रहा है।”
जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि विपक्ष ने ‘वोट चोरी’ के आरोप का कोई सबूत नहीं दिया, और दावा किया कि रैली में भीड़ कम थी। उन्होंने पूछा कि कांग्रेस सिर्फ हारे हुए नतीजों पर ही सवाल क्यों उठाती है, और कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में उसकी जीत का हवाला दिया। उन्होंने गठबंधन को “कमज़ोर और अंदरूनी विरोधाभासों से भरा” बताया और कहा कि इसके सदस्य “एक-दूसरे के खिलाफ खंजर निकाले हुए हैं”। उन्होंने उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे पर विवाद की खबरों का भी ज़िक्र किया।