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1980 की मतदाता सूची पर सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर की अर्जी पर आज सुनवाई
राउज एवेन्यू के मजिस्ट्रेट शिकायत पर नए सिरे से सुनवाई करेंगे, क्योंकि सत्र न्यायाधीश ने एफआईआर से इनकार वाला पिछला आदेश रद्द कर दिया था। पिछली सुनवाई वकीलों की हड़ताल के कारण नहीं हो सकी थी।

मुख्य बातें
- एसीजेएम विनोद जोशी शुक्रवार को शिकायत पर नए सिरे से सुनवाई करेंगे।
- शिकायत के अनुसार सोनिया गांधी का नाम अप्रैल 1983 में नागरिकता मिलने से पहले 1980 की मतदाता सूची में था।
- सत्र न्यायाधीश ने एफआईआर से इनकार के पहले आदेश को बिना कारण वाला आदेश बताया था।
दिल्ली की एक अदालत शुक्रवार को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ 1980 की मतदाता सूची में नाम को लेकर एफआईआर की मांग वाली अर्जी पर नए सिरे से सुनवाई करेगी। आरोप है कि उनका नाम भारत की नागरिकता मिलने से तीन साल पहले सूची में था।
राउज एवेन्यू अदालत में सांसदों और विधायकों के मामले सुनने वाले अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद जोशी ने 28 अक्टूबर की सुनवाई वकीलों की हड़ताल के कारण टलने के बाद मामले को 6 नवंबर के लिए सूचीबद्ध किया था।
शिकायतकर्ता, वकील विकास त्रिपाठी का आरोप है कि उनका नाम 1980 में नई दिल्ली क्षेत्र की मतदाता सूची में था, 1982 में हटाया गया और 1983 में फिर जोड़ा गया, जबकि उन्हें उसी साल अप्रैल में नागरिकता मिली। उनका कहना है कि 1980 की प्रविष्टि जाली दस्तावेजों के बिना नहीं हो सकती थी, और वे चाहते हैं कि पुलिस मामला दर्ज करे।
सत्र अदालत ने वापस भेजा
एक मजिस्ट्रेट ने 2025 में सामग्री को नाकाफी मानते हुए एफआईआर का आदेश देने से इनकार कर दिया था। शिकायत 1980 की सूची की प्रमाणित प्रति पर नहीं, बल्कि फोटोकॉपी की फोटोकॉपी बताई गई प्रति पर आधारित थी। त्रिपाठी ने पुनरीक्षण याचिका दायर की, और सत्र अदालत ने 9 दिसंबर 2025 को सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया।
21 सितंबर को विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने इनकार का आदेश रद्द कर दिया। उन्होंने कहा, “यह आदेश बिना कारण बताए दिया गया आदेश है। इसे रद्द किया जाना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकता के संबंध में “केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को लेकर की गई टिप्पणी अनुचित है”। उन्होंने मामला वापस भेजते हुए संबंधित पुलिस अधिकारी से स्थिति रिपोर्ट मंगाने और उस अधिकारी को सुनकर तर्कसंगत आदेश देने का निर्देश दिया।
पुनरीक्षण की सुनवाई धीमी रही। मई की एक सुनवाई में त्रिपाठी ने आरोप लगाया था कि उनके वकील एक के बाद एक तारीख मांग रहे हैं। शिकायत पर सोनिया गांधी या उनके वकीलों की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।