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राजनीतिअदालत

यूजीसी के जातिगत भेदभाव नियमों की समीक्षा के लिए समिति बना सकती है सरकार, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा

मुख्य न्यायाधीश की पीठ के यह पूछने पर कि समानता नियमों पर दोबारा विचार क्यों नहीं किया जा सकता, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार चाहती है कि हर छात्र को संरक्षण मिले।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
गांधी न्यूज़ ग्राफ़िक: यूजीसी जाति नियमों पर समीक्षा समिति की तैयारी
गांधी न्यूज़ ग्राफ़िक: यूजीसी जाति नियमों पर समीक्षा समिति की तैयारीGraphic: Gandhi News

मुख्य बातें

  1. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह यूजीसी समानता नियमों की समीक्षा के लिए समिति बनाने पर विचार कर रहा है।
  2. सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने पूछा, "आप यूजीसी नियमों पर दोबारा विचार क्यों नहीं करते?"
  3. 13 जनवरी को अधिसूचित ये नियम इस साल की शुरुआत से अदालत के आदेश पर स्थगित हैं।

केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह कैंपस में जातिगत भेदभाव रोकने वाले विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों की समीक्षा के लिए समिति बनाने पर विचार कर रही है। इससे पहले पीठ ने पूछा था कि क्या इन नियमों पर नए सिरे से विचार किया जा सकता है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ यूजीसी (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता संवर्धन) विनियम, 2026 के खिलाफ कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने पूछा, “आप यूजीसी नियमों पर दोबारा विचार क्यों नहीं करते?” उसने कहा कि हर छात्र के हितों की रक्षा करना और युवा पीढ़ी का ध्यान रखना जरूरी है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार इस मुद्दे की जांच कर रही है ताकि कोई वर्ग असंतुष्ट न हो या आशंकित न रहे। उन्होंने अदालत से कहा, “सरकार ने फैसला किया है कि हर छात्र का ध्यान रखा जाना चाहिए।” पीठ ने उनकी बात दर्ज की और सुनवाई टाल दी।

नियम क्या कहते हैं

ये नियम 13 जनवरी को अधिसूचित हुए थे और देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों पर लागू होते हैं। इनके तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को समान अवसर केंद्र और समानता समितियां बनानी हैं और भेदभाव की शिकायतों की जांच करनी है।

याचिकाकर्ताओं की आपत्ति है कि शिकायत निवारण तंत्र से “सामान्य वर्ग” के छात्र बाहर रखे गए हैं, जिससे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से बाहर के छात्रों को संरक्षण नहीं मिलता। इस साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने तक नियमों को स्थगित रखने का आदेश दिया था।

अगर सरकार समीक्षा समिति बनाती है, तो अदालत के फैसले से पहले ही केंद्र को नियमों में बदलाव का रास्ता मिल जाएगा।