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राजनीतिअदालत

बाल श्रम पर रोक लागू कराने के लिए विशेष प्रकोष्ठ बनाए केंद्र: सुप्रीम कोर्ट

2009 में दायर याचिका का निपटारा करते हुए अदालत ने महिला एवं बाल विकास सचिव से ऐसा प्रकोष्ठ बनाने को कहा जो 14 साल से कम उम्र के बच्चों से काम पर रोक वाले 2016 के कानून की निगरानी करे।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
गांधी न्यूज़ ग्राफ़िक: रोक लागू कराने के लिए केंद्र बनाए प्रकोष्ठ
गांधी न्यूज़ ग्राफ़िक: रोक लागू कराने के लिए केंद्र बनाए प्रकोष्ठGraphic: Gandhi News

मुख्य बातें

  1. सुप्रीम कोर्ट ने बाल श्रम कानून की निगरानी के लिए केंद्र को विशेष प्रकोष्ठ बनाने का निर्देश दिया।
  2. महिला एवं बाल विकास सचिव इसे बनाएंगे और मुख्य सचिवों के जरिए राज्यों को निर्देश जाएंगे।
  3. 2016 का संशोधन 14 साल से कम उम्र के बच्चों को हर तरह के काम से रोकता है, परिवार के लिए कुछ छूट के साथ।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सामने आए एक आदेश में केंद्र को बच्चों से काम कराने पर रोक वाले कानून के पालन पर नजर रखने के लिए विशेष प्रकोष्ठ बनाने का निर्देश दिया है।

जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव से कहा कि वह बाल एवं किशोर श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम की निगरानी के लिए प्रकोष्ठ बनाएं और इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। केंद्र को राज्यों के मुख्य सचिवों के जरिए प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश भी जारी करने होंगे।

यह आदेश हेल्थ फॉर मिलियंस की 2009 की रिट याचिका का निपटारा करता है, जिसमें 1986 के कानून और खासकर उसकी धारा 3 को चुनौती दी गई थी। तब यह धारा बच्चों को केवल सूचीबद्ध खतरनाक पेशों और प्रक्रियाओं में काम से रोकती थी।

2016 में संसद ने यह बदल दिया। संशोधन ने 14 साल से कम उम्र के बच्चों से हर पेशे में काम पर पूरी रोक लगा दी, कुछ सीमित छूट के साथ। बच्चे स्कूल के बाद या छुट्टियों में कानून की शर्तों के तहत गैर-खतरनाक पारिवारिक काम में हाथ बंटा सकते हैं।

पीठ ने कहा कि कानून बदलने के बाद याचिका की मूल मांगें बची नहीं हैं। अदालत के मुताबिक अब काम 2016 के संशोधन अधिनियम संख्या 35 से लाए गए बदलावों को पूरी तरह लागू कराना है।

रिपोर्ट किए गए आदेश में प्रकोष्ठ बनाने की कोई समय सीमा तय नहीं की गई है और न ही मामले को आगे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।