बुधवार, 4 नवंबर
भारत और दुनिया,
हिंदी और अंग्रेज़ी में
सेंसेक्स 76,864.55 −0.07%निफ्टी 50 23,794.00 −0.07%₹ / $ 94.61

राजनीतिअदालत

दिल्ली एसआईआर: फॉर्म 6 पर चुनाव आयोग की सलाह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे भूषण, सीजेआई बोले, लोग आशंकित न हों

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि दिल्ली की मसौदा सूची से कटे मतदाताओं के लिए आयोग का ताजा स्पष्टीकरण पिछले हफ्ते अदालत के सुझावों के उलट है। मुख्य न्यायाधीश ने उनसे अर्जी दाखिल करने को कहा।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
गांधी न्यूज़ ग्राफ़िक: कटे मतदाताओं के लिए फॉर्म 6 पर याचिकाकर्ताओं की आपत्ति
गांधी न्यूज़ ग्राफ़िक: कटे मतदाताओं के लिए फॉर्म 6 पर याचिकाकर्ताओं की आपत्तिGraphic: Gandhi News

मुख्य बातें

  1. प्रशांत भूषण ने कहा कि आयोग का 3 नवंबर का फॉर्म 6 वाला बयान अदालत के 28 अक्टूबर के सुझावों के खिलाफ है।
  2. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि मामला लंबित है और लोगों को आशंकित होने की जरूरत नहीं।
  3. अदालत आयोग से समय सीमा बढ़ाने को कह सकती है; अगली सुनवाई 19 नवंबर को।

दिल्ली की मसौदा मतदाता सूची से कटे मतदाताओं का मामला बुधवार को फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। याचिकाकर्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से कहा कि चुनाव आयोग की ताजा सलाह अदालत के अपने सुझावों के उलट है।

याचिकाकर्ता अंजलि भारद्वाज और अमृता जौहरी की ओर से मामले का उल्लेख करते हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि आयोग का 3 नवंबर का बयान पिछले हफ्ते की अदालती टिप्पणियों के खिलाफ जाता है। 28 अक्टूबर को अदालत ने कहा था कि जिन मतदाताओं के नाम 2026 की सूची में थे, उन्हें नए मतदाता के फॉर्म 6 से दोबारा पंजीकरण के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, और उन्हें फॉर्म 8 या गणना फॉर्म इस्तेमाल करने दिया जाए।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मामला अदालत में लंबित है और लोगों को आशंकित होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने याचिकाकर्ताओं से आयोग के स्पष्टीकरण पर अर्जी दाखिल करने को कहा और संकेत दिया कि जरूरत पड़ी तो अदालत आयोग से समय सीमा और बढ़ाने को कह सकती है। इस मुद्दे पर 19 नवंबर को सुनवाई होगी।

आयोग ने क्या कहा

सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को 3 नवंबर के स्पष्टीकरण में आयोग ने कहा कि मसौदा सूची से छूटे मतदाता, पहले से पंजीकृत होने पर भी, अंतिम सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 जमा कर सकते हैं। आयोग के मुताबिक ऐसी घोषणा केवल इसलिए झूठी नहीं मानी जाएगी कि मतदाता पहले पंजीकृत था, और अगर वह कहीं और दर्ज नहीं है तो सिर्फ इस आधार पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई नहीं होगी।

आयोग ने दिल्ली हाईकोर्ट के 14 अक्टूबर के नीलोत्पल दत्ता बनाम चुनाव आयोग फैसले का हवाला दिया, जिसमें झूठी घोषणा के आरोप का डर निराधार बताया गया था।

कितने मतदाता

दिल्ली के करीब 47.56 लाख मतदाता अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरे की श्रेणी में मसौदा सूची से बाहर रहे। याचिकाकर्ताओं के अनुसार इनमें करीब 31.59 लाख को स्थायी रूप से स्थानांतरित और 11.73 लाख को अनुपस्थित या लापता बताया गया।

मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखे पत्र में याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि इन मतदाताओं से फॉर्म 6 पर जोर दिए बिना फॉर्म 8 और गणना फॉर्म लिए जाएं, कटे नामों की सूची बूथ या ब्लॉक स्तर पर उपलब्ध हो और प्रक्रिया का प्रचार हिंदी समेत दूसरी भाषाओं में हो।