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तिरुपति लड्डू घी मामले का मुकदमा आंध्र से बाहर नहीं जाएगा, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने एक डेयरी कंपनी की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें कहा गया था कि चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण के बयानों के बाद राज्य में निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है।

मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति लड्डू घी मामले का मुकदमा दूसरे राज्य में भेजने की याचिका खारिज कर दी।
- याचिकाकर्ताओं का कहना था कि नायडू और पवन कल्याण के बयानों से माहौल प्रतिकूल हो गया है।
- पीठ ने कहा कि इस चरण में स्थानांतरण का कोई आधार नहीं बनता, ज्यादातर गवाह आंध्र प्रदेश के हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तिरुपति लड्डू घी मिलावट मामले का मुकदमा आंध्र प्रदेश से बाहर भेजने से इनकार कर दिया। अदालत ने वह दलील ठुकरा दी कि राज्य के शीर्ष नेताओं के बयानों ने निष्पक्ष सुनवाई का माहौल बिगाड़ दिया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ मचिंद्र शांताराम लांके और मेसर्स मालगंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स की आपराधिक स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा, “हम मुकदमा स्थानांतरित करने के इच्छुक नहीं हैं। खारिज।”
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने मुकदमा किसी पड़ोसी राज्य में भेजने की मांग की। उनका तर्क था कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के बयानों और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण की टिप्पणियों से प्रतिकूल माहौल बना है और निष्पक्ष अभियोजन कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर आरोपी उत्तर भारत के हैं और एक फॉरेंसिक रिपोर्ट ने घी में पशु चर्बी होने से इनकार किया था।
पीठ इससे सहमत नहीं हुई। उसने कहा कि इस चरण में स्थानांतरण का कोई आधार नहीं बनता। अदालत ने ध्यान दिलाया कि “कई गवाह राज्य के ही हैं” और जांच सुप्रीम कोर्ट की बनाई विशेष जांच टीम ने की है। पीठ ने टिप्पणी की कि अदालत अपने आदेश से “सबको पहले ही चुप करा चुकी है”, और कहा कि ऐसी कोई समस्या फिर आए तो याचिकाकर्ता दोबारा अदालत आ सकते हैं।
मामला कैसे शुरू हुआ
विवाद तब शुरू हुआ जब नायडू ने आरोप लगाया कि वाई एस जगन मोहन रेड्डी की पिछली वाईएसआरसीपी सरकार के दौरान तिरुमला मंदिर के लड्डुओं में पशु चर्बी इस्तेमाल हुई थी। वाईएसआरसीपी ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया, जबकि टीडीपी ने अपने दावे के समर्थन में एक प्रयोगशाला रिपोर्ट जारी की।
राज्य सरकार ने 26 सितंबर 2024 को अपनी एसआईटी बनाई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी जगह स्वतंत्र टीम बनाई, जिसमें सीबीआई के दो अधिकारी, आंध्र प्रदेश पुलिस के दो अधिकारी और एफएसएसएआई का एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जो सीबीआई निदेशक की निगरानी में काम करती है। अब मुकदमा आंध्र प्रदेश में ही चलेगा।