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डीए बकाया मामले में पंजाब के मुख्य सचिव के खिलाफ आपराधिक अवमानना पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन ने केएपी सिन्हा को जारी हाईकोर्ट का कारण बताओ नोटिस रोक दिया। मामला कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते के बकाये से जुड़ा है।
मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही पर रोक लगाई।
- हाईकोर्ट ने उन्हें 12 अक्टूबर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
- पंजाब ने अदालत को बताया कि वह करीब ₹5,000 करोड़ चुका चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट का यह मामला राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ते का बकाया देने में लंबी देरी से शुरू हुआ था।
जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 12 अक्टूबर के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें सिन्हा से पूछा गया था कि उन पर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न हो। पीठ ने “अगले आदेश तक” इस मामले की आगे की सारी कार्यवाही भी रोक दी। पीठ ने कहा, “हमने विवादित आदेशों को देखा है।” इससे पहले दिन में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ राज्य की याचिका पर तुरंत सुनवाई के लिए राजी हुई थी।
विवाद हाईकोर्ट के 3 अगस्त के आदेश से शुरू हुआ, जिसमें पंजाब से 18 अगस्त तक महंगाई भत्ते और महंगाई राहत का बकाया चुकाने को कहा गया था। इसके बाद राज्य की बिजली कंपनी पीएसपीसीएल के एक सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता ने अवमानना याचिका दायर कर कहा कि आदेश का पालन नहीं हुआ। जस्टिस हर्ष बुंगर का आपराधिक अवमानना नोटिस राज्य के एक हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट में अपील की स्थिति को लेकर कथित गलत बयान से जुड़ा था।
राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि पंजाब बकाया चुकाने की योजना के तहत करीब ₹5,000 करोड़ चुका चुका है। राज्य ने दलील दी कि भुगतान लागू कराने की तय प्रक्रिया को दरकिनार करने के लिए आपराधिक अवमानना का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। बकाये को लेकर एक अलग दीवानी अवमानना याचिका हाईकोर्ट में अब भी लंबित है।
हाईकोर्ट ने सिन्हा को 13 नवंबर तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने और 17 नवंबर को खुद पेश होने को कहा था।